Delhi News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक अधिकारों की एक अनूठी जंग शुरू हो गई है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा शिक्षा व्यवस्था और छात्र हितों को लेकर आयोजित धरने के तीसरे दिन को एक अजीबो-गरीब स्थिति उत्पन्न हो गई। धरना स्थल पर आने वाले लोगों और समर्थकों से पुलिस द्वारा आधार कार्ड और पैन कार्ड की मांग की जाने लगी। इस मुद्दे पर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली और साफ शब्दों में कहा कि “जंतर-मंतर आने के लिए किसी वीजा की जरूरत नहीं होती।”
यह घटना तब सामने आई जब धरना स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने बैरिकेडिंग कड़ी कर दी और वहां आने वाले हर व्यक्ति से उनकी पहचान पुख्ता करने के लिए आधार या पैन कार्ड दिखाने की मांग करने लगी। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
पुलिस का जानबूझकर परेशान
धरना स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से हम लोग यहां शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हुए हैं। हमने न कोई कानून-व्यवस्था बिगाड़ी है और न ही किसी तरह की परेशानी पैदा की है। बावजूद इसके, लोगों को बैरिकेड पर रोककर उनसे आधार कार्ड और पैन कार्ड मांगना पूरी तरह से समझ से परे है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी लगातार पुलिस का पूरा सहयोग कर रहे हैं, लेकिन इस तरह की अनावश्यक जांच का मतलब है कि लोगों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।
पानी और खाना पर पुलिस की नजर
अभिजीत दीपके ने सबसे ज्यादा तंज कसा उन लोगों की जांच पर, जो धरना स्थल पर पीने का पानी और खाना लेकर आ रहे थे। उन्होंने पूछा कि जो लोग यहां पानी पहुंचा रहे हैं, उनसे आधार कार्ड क्यों? क्या पानी देने के लिए भी किसी सरकारी दस्तावेज की जरूरत पड़ती है?
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यहां पानी आ रहा है, खाना आ रहा है, राजमा-चावल आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कोई नशीला पदार्थ, हथियार या कोई गैरकानूनी सामान लाया जा रहा हो। फिर लोगों से आधार कार्ड और पैन कार्ड मांगने की जरूरत ही क्या है? उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया।
निजता का अधिकार: आधार-पैन क्यों खतरनाक हैं?
अभिजीत दीपके ने इस मुद्दे को सिर्फ परेशानी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ‘निजता के अधिकार’ (Right to Privacy) से जोड़कर एक गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने समझाया कि आधार कार्ड में किसी व्यक्ति की बायोमेट्रिक जानकारी होती है, जबकि पैन कार्ड उसके वित्तीय और आय से जुड़े राज हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस बैरिकेड पर खड़े होकर किसी व्यक्ति का आधार या पैन कार्ड देख ले, इससे उसकी पूरी व्यक्तिगत और आर्थिक जानकारी उजागर हो जाती है। यह लोगों की निजता से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने वाले नागरिकों की इस तरह से निजी जानकारी जमा करना गलत है।
“जंतर-मंतर आने के लिए वीजा नहीं चाहिए
अभिजीत दीपके का सबसे चर्चित बयान तब आया जब उन्होंने जंतर-मंतर की ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक पहचान पर बात की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर देश का एक लोकतांत्रिक प्रदर्शन स्थल है। यह किसी विदेशी देश नहीं है जहां आने के लिए किसी वीजा या पासपोर्ट की जरूरत पड़े।
उन्होंने याद दिलाया कि भारत के संविधान में हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार दिया गया है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि बैरिकेड लगाकर उसे कुचलने की कोशिश की जानी चाहिए।
अभिजीत दीपके का पुलिस को चेतावनी
बहस के दौरान अभिजीत दीपके ने पुलिस प्रशासन को एक सख्त चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि आगे भी किसी व्यक्ति को बैरिकेड पर रोककर आधार कार्ड या पैन कार्ड मांगा गया, तो वह खुद बैरिकेड पर जाकर बैठ जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मैं लोगों को धरना स्थल तक लेकर आऊंगा और वहीं बैठकर विरोध दर्ज कराऊंगा। हम पुलिस का सहयोग करना चाहते हैं और किसी भी प्रकार का टकराव नहीं चाहते। लेकिन अगर लोगों को केवल आधार कार्ड के नाम पर रोका जाता रहा, तो हमें हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से भी अपील की कि अगर कोई पुलिसकर्मी ऐसा करता है, तो उन्हें तुरंत इसकी जानकारी दी जाए, वह खुद प्रशासन से इस मुद्दे पर बात करेंगे।






















