Delhi News: दिल्ली जंतर-मंतर पर चल रहा शिक्षा सुधार आंदोलन अब एक नए मोड़ में प्रवेश कर गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर पर बदलने का ऐलान किया गया है। पार्टी ने पूरे देश में ‘प्रधान गो बैक’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही, मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक ने रविवार से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने की चुनौती दी है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
सरकार की चुप्पी के खिलाफ सोनम वांगचुक का कड़ा कदम
आज शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 20 जून को जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू होने के दिन ही सोनम वांगचुक ने साफ शर्त रखी थी कि यदि शनिवार तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं देते, तो वह अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।
एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली गई। अभिजीत दीपके ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है। यदि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे जनता का पूरी व्यवस्था से भरोसा टूटता है। इसी कारण रविवार से भूख हड़ताल का फैसला लिया गया है।
‘प्रधान गो बैक’ अभियान
पार्टी ने साफ किया कि यह आंदोलन अब केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहेगा। ‘प्रधान गो बैक’ अभियान के तहत पूरे देश में लोगों को जोड़ा जाएगा। अभिजीत दीपके ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, किसान संगठनों, युवा संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस अभियान से जुड़ें और जंतर-मंतर पहुंचकर इस मुद्दे को ताकत दें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे जरूरी होती है। जब सरकारें अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेती हैं, तो जनता को सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ती है।
छात्र आत्महत्या मामले
प्रेस वार्ता के दौरान सबसे भावुक और संवेदनशील मुद्दा छात्रों की आत्महत्या रहा। अभिजीत दीपके ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे सभी प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने बताया कि अधिकांश प्रभावित परिवार मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग से हैं। इन परिवारों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए वर्षों तक मेहनत की और आर्थिक तंगी का सामना किया। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नीतियों पर कई राजनीतिक आरोप लगाए और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।
पार्टी ने की अपनी टीम का विस्तार, नए चेहरे शामिल
आंदोलन को और पेशेवर और मजबूत बनाने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी नेतृत्व और प्रवक्ता टीम का विस्तार किया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने चार नए चेहरों को आधिकारिक रूप से प्रवक्ता टीम में शामिल किए जाने की जानकारी दी:
- वैष्णवी गौर: पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स हैं। वे आर्थिक नीति और गवर्नेंस सुधार की विशेषज्ञ हैं और पहले केंद्र-राज्य सरकारों व थिंक टैंक के साथ काम कर चुकी हैं।
- आफरीन नवाज: एमबीए ग्रेजुएट और एक सफल उद्यमी हैं। उन्होंने बेंगलुरु में पार्टी के आंदोलन को ग्राउंड लेवल पर आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई।
- दीपक बालियान: राजनीति विज्ञान में परास्नातक हैं और पिछले 8 वर्षों से किसान आंदोलन से गहराई से जुड़े हुए हैं।
- रत्ना सिंह: एक कानूनी पत्रकार रह चुकी हैं और वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत कर रही हैं।
‘यह आंदोलन किसी एक का नहीं
नई प्रवक्ता आफरीन नवाज ने आंदोलन की जमीनी हकीकत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या नेता का नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने ‘प्रोटेस्ट को-ऑर्डिनेशन कमेटी’ के उन सदस्यों का नाम लिया, जिन्होंने पहले दिन से लेकर अब तक पूरी निष्ठा के साथ काम किया।






















