Bihar Legislative Assembly Monsoon Session: बिहार विधानसभा का मानसून सत्र अपने चौथे दिन में काफी अनोखी और निराशाजनक स्थिति का साक्षी बना। जहां एक ओर इस सत्र से जनता को जल, बिजली, सड़क और रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सारगर्भित चर्चा की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर सदन की कार्यवाही एक बार फिर से शोर-शराबे और अराजकता की भेंट चढ़ गई। गुरुवार को हुए इस हंगामे की खासियत यह थी कि इस बार केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के विधायक भी अपना आपा खो बैठे, जिसकी वजह से दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की नौबत तक आ गई।
पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा गर्माया
इस पूरे विवाद की शुरुआत राजधानी पटना में हाल ही में हुए एक घटनाक्रम से हुई, जहां अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर प्रशासन ने लाठीचार्ज किया था। इस घटना के विरोध में आज सुबह से ही विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से काफी पहले ही, विपक्षी विधायकों का एक बड़ा हिस्सा विधानसभा परिसर के अंदर ही एकत्रित हो गया। उन्होंने जमकर नारेबाजी की और राज्य सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ धरना दिया। विपक्ष का मानना था कि छात्रों के साथ जो बर्बरता की गई है, वह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और इसके लिए सरकार को सदन में जवाब देना होगा।
सदन के अंदर तेज हुआ पारा, दोनों पक्ष आमने-सामने
जैसे ही दोपहर में विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने की घोषणा हुई, विपक्षी विधायक सदन के अंदर भी अपना आक्रोश लेकर आ गए। वे स्पीकर के चेंबर के सामने और वेल में पहुंचकर जमकर नारे लगाने लगे। शुरुआती दौर में यह हंगामा पारंपरिक रूप से चल रहा था, लेकिन कुछ ही पलों में माहौल इतना जहरीला हो गया कि बात की बात में तल्खी बढ़ गई।
इस बार का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि सत्तापक्ष (एनडीए) के विधायक भी विपक्ष के आक्रामक रवैये को देखते हुए अपनी कुर्सियों से उठ खड़े हुए और उनका तैश चढ़ गया। आमतौर पर सत्तापक्ष विपक्ष के हंगामे को शांत भाव से देखता है या तंज कसता है, लेकिन आज के दिन दोनों तरफ से जुबानी हमले इतने तेज हो गए कि सदन के बीचों-बीच आक्रामकता का माहौल बन गया। कुछ देर तो ऐसा लगा कि दोनों पक्षों के विधायक आपस में भिड़ जाएंगे और हाथापाई हो जाएगी।
स्पीकर ने दिया युद्धभूमि वाला बयान
जब सदन में कोई सुनवाई नहीं हो रही थी और नारेबाजी के साथ-साथ शारीरिक झड़प की आशंका बनी हुई थी, तब विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने सदन की शांति बहाली के लिए कई बार अपील की, लेकिन जब कोई असर नहीं हुआ, तो उन्हें मजबूरन सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
स्थगन की घोषणा करते हुए स्पीकर ने दोनों पक्षों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “सदन कोई युद्ध का मैदान नहीं है।” उन्होंने विधायकों को याद दिलाया कि इस विधानसभा भवन में कई महान नेताओं ने संयम और शालीनता से बहस की है, और इस तरह का असभ्य व्यवहार इस सदन की गरिमा को नहीं सूटता। उन्होंने सभी दलों से सदन की मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया।
RJD विधायकों ने बताया ‘काला दिन’
सदन के स्थगित होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राजद (RJD) के विधायकों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस पूरी घटना को बिहार विधानसभा के इतिहास का ‘काला दिन’ करार दिया। राजद विधायकों का कहना था कि जब छात्र अपने भविष्य और अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे, तो उन्हें सत्ताधारी दल के विधायकों ने ‘गुंडा’ तक कह दिया गया।
विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष के नेताओं के इस तरह के बयान से छात्र समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है। राजद नेताओं ने कहा कि बिहार की राजनीति छात्र आंदोलनों से सींची गई है और यहां के छात्रों को गुंडा कहना उनकी संस्कृति का अपमान है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री को इस मामले में स्वयं हस्तक्षेप करते हुए छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए और सदन में इस पर चर्चा होनी चाहिए।
इस हंगामे के राजनीतिक मायने
यह घटनाक्रम बिहार की वर्तमान राजनीतिक गतिशीलता को समझने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से बिहार में युवाओं और छात्रों के मुद्दे (जैसे- रोजगार, परीक्षा पैटर्न, भर्ती घोटाले) काफी गर्म हैं। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। वहीं, सत्तापक्ष के विधायकों का आक्रामक रुख दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे पर बैकफुट पर आ चुकी है और वह आंदोलन को किसी भी कीमत पर कुचलने के मूड में नजर आ रही है।
दोपहर 2 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होगी, तो सभी की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या स्पीकर की फटकार का असर होता है या फिर यह हंगामा शाम तक जारी रहेगा। हालांकि, विपक्ष के तेवर देखकर तो यही लग रहा है कि मानसून सत्र के शेष दिन भी शांति से नहीं बीतने वाले और छात्रों का मुद्दा सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह सरकार के लिए सिरदर्द बना रहेगा।
























