Bihar News: बिहार अब तकनीक के नए दौर में कदम रख चुका है। प्रदेश की राजधानी पटना में आयोजित ‘बिहार AI समिट-2026’ ने साबित कर दिया है कि राज्य की कानून व्यवस्था से लेकर प्रशासन तक, सब कुछ अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव में बदलने जा रहा है। इस दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक ओर जहां अपराधियों के लिए AI को ‘खतरनाक’ बताया, वहीं दूसरी ओर बिहार के विकास में युवाओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण करार दिया।
हरा गमछा और AI की तलाश
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने एक बहुत ही मजबूत और प्रतीकात्मक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “मान लीजिए पटना में 4000 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अगर हमें एक हरे गमछे वाले व्यक्ति को पकड़ना है, तो बस आपको AI को कमांड देनी है कि ‘हरा गमछा वाले को खोजो’।” सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि वह किसी की तरफ इशारा नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए अपराधी की जाति नहीं होती, सिर्फ अपराध होता है।
यह बयान बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर सरकार के मंतव्य को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में अब AI की बहुत जरूरत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने दिल्ली की AI समिट में हिस्सा लिया था और तब से वह लगातार IT विभाग को सलाह दे रहे हैं कि विभागीय कामकाज में AI का इस्तेमाल कैसे बढ़ाया जाए। मंच पर मौजूद डीजीपी की उपस्थिति में यह बात कहने का मतलब साफ था कि पुलिस बल भी इस तकनीकी क्रांति से अछूता नहीं रहेगा।
डिजिटल क्रांति और बिहार का विकास
सीएम सम्राट ने अपने संबोधन में बिहार को ‘डिजिटल क्रांति का अग्रणी राज्य’ बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति, स्टार्टअप्स और नवाचार ही बिहार की ताकत हैं। AI की मदद से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने तकनीक के बदलते रुझान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि बिहार में करोड़ों मोबाइल दिखेंगे, लेकिन आज भारत में 120 करोड़ से ज्यादा लोग मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं। फेसबुक और ट्विटर (अब X) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने संचार क्रांति ला दी है।
उन्होंने अपने वरिष्ठ साथी और उपमुख्यमंत्री विजेंद्र चौधरी का उदाहरण देते हुए कहा कि 80 वर्ष से अधिक उम्र के होते हुए भी वे सोशल मीडिया पर पूरी तरह सक्रिय हैं और जनता से जुड़े हुए हैं। यह बात यह दर्शाती है कि तकनीत सीखने में उम्र कोई बाधा नहीं है।
सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और अफसरों पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने AI की व्यावहारिक उपयोगिता पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण विभाग में AI के माध्यम से टेंडरों की जांच कराई गई, जिसके परिणाम बहुत ही सकारात्मक रहे। कुछ टेंडरों में AI ने 6% से 8% तक धन की बचत कराकर सरकारी खर्च में कमी लाने में मदद की।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कही। सीएम ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर कोई अधिकारी 10 दिन तक कोई काम नहीं करता, तो उसे मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पहला नोटिस मिलेगा। 20 दिन पर CMO का दूसरा नोटिस और 25 दिन पर तीसरा नोटिस जारी होगा। अगर 30 दिन तक काम नहीं हुआ, तो 31वें दिन वह अधिकारी स्वयं निलंबित हो जाएंगे, उसके लिए किसी अलग आदेश की जरूरत नहीं होगी। यह प्रणाली पूरी तरह से AI आधारित होगी, जो देरी करने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
जन्मभूमि का कर्ज और मगध का गौरव
समिट के अंत में सीएम सम्राट ने बिहार के प्रवासी भाइयों और युवाओं को भावनात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब वापस लौटने और अपनी जन्मभूमि के निर्माण में योगदान देने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, “कर्मभूमि से इस जन्मभूमि का कर्ज उतारने का काम करें।” चाहे कोई विदेश में इंडस्ट्री स्थापित करे या IT सेक्टर में काम करे, उसे बिहार की चीजों को स्थापित करने के लिए काम करना चाहिए।
उन्होंने ‘सहयोग पोर्टल’ का जिक्र करते हुए आम लोगों और युवाओं से अपील की कि वे बिहार सरकार को सुझाव दें। उनका कहना था कि मगध के गौरवशाली इतिहास को वापस लाना है और इसमें नई पीढ़ी की भूमिका सबसे अहम है। AI के माध्यम से बिहार को बदलने का रास्ता तलाशना है और इस क्रांति में सभी को साथ आना होगा। इस अवसर पर IT विभाग से भी आग्रह किया गया कि वे सहयोग पोर्टल पर एक ऐसी व्यवस्था बनाएं जहां लोग अपने सुझाव आसानी से दे सकें।























