Police Behaviour Report: दुनिया भर में पुलिस का भूमिका और जनता के साथ उसके संबंधों का इतिहास बहुत पुराना रहा है। कुछ देशों में पुलिस को जनता का भरोसा सबसे अधिक मिलता है, जबकि कहीं-कहीं इस संबंध में गंभीर सवाल उठते हैं। यह विश्लेषण हमें यह समझने में मदद करता है कि किस देश की पुलिस कितनी फ्रेंडली है और कहां उसकी छवि सबसे क्रूर और अविश्वसनीय है। चलिए, इस विषय पर विस्तार से जानते हैं।
सबसे ज्यादा भरोसा पाने वाले देश
गैलप की लॉ एंड ऑर्डर इंडेक्स के अनुसार, ताजिकिस्तान इस सूची में टॉप पर है, जहां जनता का पुलिस पर भरोसा 97 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि वहां पुलिस को जनता का समर्थन बहुत मजबूत है। इसके बाद सिंगापुर, कोसोवो, चीन, आइसलैंड और वियतनाम जैसे देश आते हैं, जिनमें से सिंगापुर का प्रदर्शन खासा प्रभावशाली है। सिंगापुर हर साल इस सूचकांक में शीर्ष स्थान या उच्च रैंकिंग पर रहता है, जो वहां की सख्त पुलिस व्यवस्था, कम अपराध दर और जनता के साथ अच्छे संबंध का संकेत है। यूरोप के देशों में फिनलैंड, नॉर्वे और लक्जमबर्ग भी इस लिस्ट में शामिल हैं, जहां पुलिस को मददगार और भरोसेमंद माना जाता है। इन देशों में पुलिस का जनता के प्रति समर्पण और पारदर्शिता का माहौल बनाना उनकी प्राथमिकता रहती है।

सबसे कम भरोसा पाने वाले देश
वहीं दूसरी ओर, लाइबेरिया जैसे देशों में पुलिस पर जनता का भरोसा सबसे कम है। वहां का स्कोर सिर्फ 49 है, जो दर्शाता है कि लोग पुलिस को अनावश्यक और अनिश्चित मानते हैं। अफगानिस्तान भी लगातार निचले पायदान पर रहा है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कई देशों में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं, जैसे अंगोला, मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों में। इन देशों में पुलिस पर गैरकानूनी बल प्रयोग, हिरासत में मौतें, प्रदर्शनकारियों के प्रति सख्ती और मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरें आम हैं। इन रिपोर्ट्स में जनता की शिकायतों के साथ-साथ आधिकारिक जांच और गवाहियों का भी जिक्र होता है, जो इन मामलों की गंभीरता को दर्शाता है। दक्षिण अफ्रीका जैसे देश में स्वतंत्र पुलिस जांच निदेशालय हर साल हजारों शिकायतें दर्ज करता है, जो पुलिस बर्बरता की गंभीरता को उजागर करता है।
पुलिस का भरोसेमंद या अमानवीय होना मात्र घटनाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि लंबे समय की पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी निगरानी पर भी निर्भर करता है। जहां इन पहलुओं को मजबूत किया गया है, वहां जनता का विश्वास भी बढ़ा है।
भारत में पुलिस का स्थिति
भारत में पुलिस पर जनता का भरोसा औसत बहोत कम है, लेकिन अभी भी उसमें सुधार की गुंजाइश है। गैलप का लॉ एंड ऑर्डर इंडेक्स भारत को वैश्विक औसत के आसपास या उससे थोड़ा ऊपर दर्शाता है। यह संकेत जरूर है कि देश की पुलिस व्यवस्था में जनता का भरोसा बना हुआ है, लेकिन यह अभी भी शीर्ष 10 देशों में शामिल नहीं है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में पुलिस हिरासत में हुई मौतों की संख्या 170 के आसपास है, जो पिछले पांच वर्षों में 140 से 176 के बीच रही है। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पुलिस की जवाबदेही और निगरानी में अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। खास बात यह है कि इन मामलों में से केवल एक ही मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है, जो संकेत देता है कि पुलिस सुधार और जवाबदेही के प्रति अभी भी जागरूकता और कार्यवाही की आवश्यकता है।

























