UP News: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के 9 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भदोही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई। जब मंच पर प्रभारी मंत्री एके शर्मा सरकारी उपलब्धियों की गिनती कर रहे थे, वहीं पंडाल में बैठी जनता धीरे-धीरे कुर्सियां छोड़कर निकलने लगी। मंत्री के संबोधन के दौरान खाली होती कुर्सियां सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती नजर आईं।
‘हवाई’ सलाह और जमीनी हकीकत
कार्यक्रम का सबसे चर्चित पल तब आया जब मंत्री एके शर्मा ने किसानों को आलू, गोभी, भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियां बनारस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ‘हवाई मार्ग’ द्वारा एक्सपोर्ट करने की सलाह दी। इस सलाह ने तब तहलका मचाया जब इस वक्त विश्व में मिडिल ईस्ट का संकट चरम पर है। ईरान-इजराइल युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य और प्रमुख हवाई मार्ग पूरी तरह प्रभावित हैं। ऐसे में आसमान छूते हवाई किराए और वैश्विक अस्थिरता के बीच मंत्री का यह ‘हवाई ज्ञान’ पंडाल में बैठे लोगों की मुस्कान नहीं था। इसी बीच लोगों ने मंत्री का भाषण बीच में ही छोड़कर कार्यक्रम स्थल से निकलना शुरू कर दिया।
स्थानीय मुद्दों पर चुप्पी, विपक्ष पर जवाबी हमला
ज्ञानपुर स्थित विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज (VNGIC) के मैदान में ‘नवनिर्माण के 9 वर्ष’ के इस कार्यक्रम में मंत्री एके शर्मा ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा ‘Pooch AI’ कंपनी के साथ हुए 25,000 करोड़ रुपये के समझौते (MoU) पर उठाए गए सवालों के जवाब में शर्मा ने कहा कि अगर विपक्ष को पिछले 9 वर्षों का विकास नजर नहीं आ रहा, तो अखिलेश यादव को अपने चश्मे का नंबर बदल लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के कार्य इतने व्यापक हैं कि उनका वर्णन करना मुश्किल है।
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हालांकि, जब पत्रकारों ने स्थानीय मुद्दों पर सवाल पूछे तो मंत्री काफी घबराए हुए नजर आए। भदोही नगर पालिका क्षेत्र के बॉर्डर पर बसपा के रंग वाले साइन बोर्ड और सड़क निर्माण में हो रही धांधली को लेकर उठाए गए सवालों पर एके शर्मा जवाब देने के बजाय कुर्सी छोड़कर निकल खड़े हुए।
जनता की बेरुखी का संदेश
कार्यक्रम में गोदभराई और पुरस्कार वितरण जैसी रस्में तो अदा की गई, लेकिन मंच के बयानों और जनता की बेरुखी ने एक अलग ही कहानी कह दी। खाली होते पंडाल ने स्पष्ट संकेत दिया कि जनता को केवल ‘जय श्री राम’ और ‘जय माता दी’ के नारों से संतुष्ट नहीं रखा जा सकता। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह घटना सता पक्ष के लिए चेतावनी का संदेश है। मंत्रियों को आत्ममुग्धता छोड़कर स्थानीय मुद्दों और जनता की समस्याओं की ओर ध्यान देने की जरूरत है।


























