पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीतिक गलियारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है। एक 12 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी निर्मम हत्या के मामले ने पूरे इलाके को आक्रोश के समुद्र में डुबो दिया। वहीं, इस घटना को लेकर पीड़ित परिवार से मिलने जा रहीं पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को उनके ही घर पर रोके जाने के दावों ने सियासत का तापमान चरम पर पहुंचा दिया है।
बरुईपुर में क्या हुआ?
बीते रविवार की सुबह बरुईपुर क्षेत्र के एक स्थानीय तालाब से 12 वर्षीय नाबालिग लड़की का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के आरोपों ने मामले को और भी भयावह कर दिया, जब सामने आया कि लड़की के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
इस दर्दनाक घटना की खबर फैलते ही इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला। पीड़िता के परिवार वालों और स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। भीड़ का गुस्सा इतना बाहर निकला कि लोगों ने इंद्रजीत तांती (26) नामक एक युवक पर इस जघन्य अपराध में शामिल होने का शक जताते हुए उसे घेर लिया और बेरहमी से पीटा। हालांकि, पुलिस किसी तरह घायल युवक को भीड़ से बचाकर अस्पताल पहुंचा पाई, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने पुलिस बल पर भी हमला बोल दिया और एक पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। बाद में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
ममता बनर्जी का ‘हाउस अरेस्ट’ दावा
इस बीच, मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया जब ममता बनर्जी ने पीड़ित परिवार से एकजुटता दिखाने के लिए उनके घर जाने का फैसला किया। ममता ने दावा किया कि उन्होंने घटना की जानकारी मिलते ही परिवार वालों को फोन कर ढाढ़स बंधाया और तय किया कि वह खुद उनसे मिलने जाएंगी। लेकिन जैसे ही वह अपने कालीघाट स्थित आवास से निकलने वाली थीं, हालात तेजी से बदल गए।
तृणमूल सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि अचानक उनके और अभिषेक बनर्जी के घरों के बाहर भारी संख्या में राज्य पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय बल (सीआरपीएफ और आरपीएफ) के जवान तैनात कर दिए गए। उन्होंने कहा कि पूरा इलाका घेर लिया गया और उन्हें घर से बाहर निकलने से प्रभावी ढंग से रोक दिया गया, जो कि एक प्रकार से ‘हाउस अरेस्ट’ है।
फेसबुक लाइव पर भड़कीं ममता
रात करीब 10 बजे, जब यह खबर चारों ओर फैल चुकी थी, तब ममता बनर्जी ने एक पार्टी कार्यकर्ता के फेसबुक लाइव सेशन में हिस्सा लेकर राज्य प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “मैंने परिवार से बात की है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसा क्या हो गया कि सीआरपीएफ और आरपीएफ के जवान अचानक मेरे घर के सामने रूट मार्च करने लगे? हमारे पड़ोस में कोई अशांति नहीं है। क्या हम चोर हैं या डकैत? क्या हमने कभी दंगे भड़काए हैं?”
उन्होंने आगे कहा, “मैं अब अकेली हूँ। तुम मुझसे इतना क्यों डरते हो? मुझे हाउस अरेस्ट क्यों किया गया है? मुझे समझ नहीं आ रहा कि आप क्या चाहते हैं।” हालांकि, इस पूरे मामले पर राज्य प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
‘तृणमूल का सियासी ड्रामा’
वहीं, इस पूरे प्रकरण पर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद और नाटक बताया है। बंगाल BJP के प्रमुख प्रवक्ता देबजीत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तृणमूल अपना वजूद बनाए रखने और खुद को राजनीतिक रूप से ‘रेलिवेंट’ (प्रासंगिक) दिखाने के लिए ऐसे ड्रामे कर रही है।
देबजीत सरकार ने ममता बनर्जी की ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा का हवाला देते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले जब ममता बनर्जी के पीएसओ (Personal Security Officer) बदले गए थे, तब भी उन्होंने ऐसा ही ड्रामा किया था। ममता बनर्जी को जेड-प्लस सिक्योरिटी प्रदान की गई है। उन्हें सुरक्षा देने में क्या दिक्कत आ रही है? क्या प्रशासन या सुरक्षा बल ने कभी कहा है कि वह अपना घर नहीं छोड़ सकतीं? यह सब एक तरह से जनता का ध्यान भटकाने का नाटक है।”
























