अशोक चौहान ने खोली पोल, वादे के बावजूद गांवों में बस नहीं

अशोक चौहान ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से इन गांवों और सेक्टरों के निवासी समय-समय पर होने वाले ग्राम चौपाल कार्यक्रमों में तथा "नोएडा आपके द्वार" जैसे जनसुनवाई मंचों पर सिटी बस सेवा शुरू करने की मांग लगातार उठाते आ रहे हैं।

सौतेला व्यवहार! एक्सप्रेसवे वाले गांव आज भी ई-बस सेवा से महरूम

HIGHLIGHTS

  • नोएडा के 40 गांवों की महिलाओं से छिन गई फ्री बस सवारी की खुशी!
  • जमीन ले गए प्राधिकरण, बस सेवा से छोड़ दिया गांव, जानें पूरा मामला
  • योगी सरकार की स्कीम का लाभ नहीं, नोएडा के गांवों में गुस्सा फूटा
  • एक्सप्रेसवे किनारे बसे गांवों की बहनें आज भी बस से वंचित, क्यों?

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर बसे लगभग 35 से 40 गांव और दर्जनों सेक्टर आज भी शहर की ई-सिटी बस सेवा से नहीं जुड़ पाए हैं। जहां एक ओर नोएडा शहर में सिटी बसों के पहिए चलने शुरू हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर एक्सप्रेसवे से लगे ग्रामीण इलाकों के लोग सार्वजनिक परिवहन के अभाव में लंबे सफर तय करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी व्यथा यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महिलाओं के लिए निःशुल्क बस सेवा की जो घोषणा की गई है, उसका लाभ इन गांवों की बेटियों और बुजुर्ग महिलाओं तक पहुंच ही नहीं पा रहा, क्योंकि यहां ई-सिटी बस चलती ही नहीं है।

17 जून को प्राधिकरण में सौंपा गया था ज्ञापन

गत 17 जून को ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नोएडा प्राधिकरण सेक्टर 6 स्थित कार्यालय पहुंचा और प्राधिकरण के ओएसडी अरविंद कुमार सिंह तथा क्रांति शेखर को संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा। संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने अधिकारियों को विस्तार से अवगत कराया कि ई-सिटी बस सेवा के लिए चार रूट तैयार किए गए, लेकिन चारों रूटों में से किसी एक में भी एक्सप्रेसवे किनारे बसे गांवों और सेक्टरों को शामिल नहीं किया गया।

ज्ञापन में रायपुर, बख्तावरपुर, असगरपुर, गढ़ी शाहपुर, शाहपुर गोवर्धनपुर, सुलतानपुर, नंगली शाखपुर, नंगली नंगला, नंगली वाजिदपुर, छपरौली बांगर, दोस्तपुर मंगरौली, याकूतपुर, दल्लूपुरा, मोहियापुर, गुलावली, झट्टा, बादोली, कामबक्सपुर, कोंडली, गढ़ी समस्तीपुर समेत अन्य गांवों का जिक्र किया गया। साथ ही सेक्टर 126 से 135 तक और 151 से 168 तक के सेक्टरों को भी इस सुविधा से जोड़ने की मांग रखी गई।

दशक भर से उठती है मांग, नहीं सुना गया

अशोक चौहान ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से इन गांवों और सेक्टरों के निवासी समय-समय पर होने वाले ग्राम चौपाल कार्यक्रमों में तथा “नोएडा आपके द्वार” जैसे जनसुनवाई मंचों पर सिटी बस सेवा शुरू करने की मांग लगातार उठाते आ रहे हैं। हर बार भरोसा मजबूत होता और हर बार नतीजा शून्य रहा। अब जब शहर में बस सेवा शुरू हो चुकी है, तो ग्रामीण क्षेत्रों को दरकिनार छोड़ देना उनके साथ सौतेला व्यवहार जैसा है।

जमीन ली, पर सुविधा से वंचित रखा

अशोक चौहान का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण ने इन्हीं गांवों की जमीन अधिग्रहित कर आधुनिक सेक्टर विकसित किए, बड़े-बड़े विकास कार्य हुए, लेकिन जब शहर में सिटी बस सेवा चलाने की बारी आई तो इन्हीं ग्रामीणों को नजरअंदाज कर दिया गया। चौहान ने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि जब पूरी बात प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र की थी, तो एक्सप्रेसवे किनारे बसे गांवों और सेक्टरों के साथ भेदभाव क्यों? “हमारी जमीन पर विकास हुआ, लेकिन विकास की सवारी हम तक नहीं पहुंची। आखिर हमारे साथ यह शोषण क्यों?” उन्होंने पूछा।

अधिकारियों ने लिखवाया था पत्र, दिया था आश्वासन

ज्ञापन मिलने के तुरंत बाद ओएसडी अरविंद कुमार सिंह और क्रांति शेखर ने प्रकरण की गंभीरता देखते हुए महाप्रबंधक (सिविल) एसपी सिंह को पत्र लिखकर उपरोक्त सभी गांवों व सेक्टरों को ई-सिटी बस सेवा से जोड़ने के लिए कहा था और शीघ्र समाधान का आश्वासन भी दिया था। लेकिन पत्र और आश्वासन फाइलों में ही दर्ज रह गए। आज तक न कोई नया रूट अधिसूचित हुआ, न ही इन इलाकों में बस का एक भी चक्कर लगा।

रक्षाबंधन पर निःशुल्क सवारी की घोषणा, पर गांवों तक नहीं पहुंचा लाभ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षाबंधन के पावन अवसर पर प्रदेश की महिलाओं एवं उनके साथ यात्रा करने वाले एक साथी के लिए, तथा 60 वर्ष आयु की सभी महिलाओं के लिए यूपी रोडवेज व ई-सिटी बस सेवा निःशुल्क करने की घोषणा की थी। यह कल्याणकारी पहल प्रदेश की महिलाओं के लिए उत्सव जैसी है, लेकिन एक्सप्रेसवे किनारे बसे इन 35 से 40 गांवों और सेक्टरों की महिलाओं के लिए यह अधूरा सपना बनकर रह गई है। कारण सीधा है — जहां बस ही नहीं चलती, वहां निःशुल्क सवारी कैसे मिले?

चौहान ने बताया कि इन गांवों की बहनें, बेटियां और बुजुर्ग महिलाएं स्कूल, कॉलेज, कार्यस्थल, अस्पताल और बाजार के लिए महंगे प्राइवेट वाहनों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। योजना का लाभ पाने का अधिकार इन महिलाओं का भी पूरा है, लेकिन प्राधिकरण की उदासीनता के चलते वे इससे वंचित रह जा रही हैं।

संगठन की मांगें

अशोक चौहान ने अपनी मांगें स्पष्ट रखी हैं कि एक्सप्रेसवे किनारे बसे सभी गांवों तथा सेक्टर 126 से 135 और 151 से 168 तक को तत्काल ई-सिटी बस सेवा से जोड़ा जाए। नए रूट तय करते समय ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से परामर्श किया जाए। निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा इन क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीणों के समर्थन से बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अशोक चौहान ने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण की अध्यक्ष-सीईओ से दखल देने की अपील की है ताकि विकास के लिए अपनी जमीन देने वाले गांव सुविधाओं से दूर न रहें और सरकार की जनकल्याणकारी योजना का लाभ हर पात्र महिला तक पहुंचे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now