कॉकरोच जनता पार्टी नोएडा- गाजियाबाद चींटी जनता पार्टी बिल्डर पंजाब-हरियाणा बिहार-झारखंड क्राइम न्यूज़ फिल्म न्यूज राजनीतिक न्यूज लाइफस्टाइल जरा हटके खेल जर्नल नॉलेज

---Advertisement---

Artificial Rain : दिल्ली में 3.21 करोड़ की क्लाउड सीडिंग पर सवाल

Artificial Rain

राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए सरकार ने कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) का सहारा लिया, लेकिन क्लाउड सीडिंग का ट्रायल नाकाम रहा। IIT कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के ऊपर पर्याप्त नमी की कमी** थी, जिसके कारण आसमान में बादल तो बने, लेकिन वे बारिश कराने लायक नहीं थे।

क्या है क्लाउड सीडिंग और कैसे होती है बारिश की कोशिश?

क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है जिसके जरिए ऐसे बादलों से बारिश कराई जाती है जिनमें पहले से *पर्याप्त नमी मौजूद हो। इस प्रक्रिया में विमान के जरिए **सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या कैल्शियम क्लोराइड जैसे रसायन बादलों में छोड़े जाते हैं, जिससे जलवाष्प संघनित होकर बूंदों में बदल जाता है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक साफ आसमान से बारिश नहीं करा सकती।

दिल्ली में हुआ ट्रायल — दो फ्लाइट, दो घंटे की विंडो

IIT कानपुर की टीम ने मंगलवार को मेरठ एयरस्ट्रिप से दो फ्लाइट्स के जरिए क्लाउड सीडिंग की है जो कि पहली उड़ान दोपहर 12:13 बजे IIT कानपुर से टेकऑफ़, 2:30 बजे मेरठ में लैंडिंग। लगभग 3–4 किलो सीडिंग मिश्रण छोड़ा गया। दूसरी उड़ान 3:45 बजे मेरठ से उड़ी, 4:45 बजे उतरी। करीब 4 किलो रसायन का इस्तेमाल हुआ। दोनों उड़ानें खेकरा, बुराड़ी, करोल बाग, मयूर विहार और भोजपुर जैसे इलाकों के ऊपर की गईं।

क्या हुआ नतीजा?

IIT कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार, पहली सीडिंग के बाद PM2.5 में 6–10% और PM10 में 14–21% की कमी आई। दूसरी सीडिंग के बाद भी PM10 में लगभग 15% तक गिरावट दर्ज की गई।
लेकिन यह सुधार “वास्तविक बारिश” से नहीं बल्कि हवा में बढ़ी नमी और कणों के बैठने** के कारण हुआ। रिपोर्ट में बताया गया कि नोएडा में केवल 0.1 mm बूंदाबांदी दर्ज की गई — यानी बारिश के लिहाज़ से असर लगभग शून्य रहा।

प्रदूषण में मामूली गिरावट

क्लाउड सीडिंग से पहले मयूर विहार, करोल बाग और बुराड़ी में PM2.5 का स्तर 220–230 के बीच था, जो ट्रायल के बाद घटकर 200 के करीब पहुंच गया। मंगलवार सुबह दिल्ली का AQI 305 रिकॉर्ड किया गया, जो “बेहद खराब” श्रेणी में है।

IIT कानपुर की रिपोर्ट ने क्या कहा?

“मौजूदा मौसम क्लाउड सीडिंग के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं था। नमी का स्तर केवल 10–15% था, जबकि इस तकनीक के सफल होने के लिए कम से कम 60% नमी जरूरी है।” रिपोर्ट में कहा गया कि प्रयोग सीमित रूप से कारगर रहा और भविष्य में यह तभी सफल हो सकता है जब पश्चिमी विक्षोभ के दौरान पर्याप्त नमी वाले बादल मौजूद हों।
मिट्टी के नमूनों में किसी हानिकारक रासायनिक असर के प्रमाण नहीं मिले।

3.21 करोड़ की लागत से पांच ट्रायल

दिल्ली सरकार ने मई 2025 में 3.21 करोड़ रुपये की लागत से 5 क्लाउड सीडिंग ट्रायल्स** को मंज़ूरी दी थी। यह परियोजना IIT कानपुर और दिल्ली सरकार के संयुक्त प्रयास से चलाई जा रही है। लगातार मौसम में बदलाव और तकनीकी मंज़ूरियों में देरी के कारण यह ट्रायल कई बार टल चुका था।

राजनीति भी हुई शुरू

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इस ट्रायल पर सवाल उठाते हुए कहा “बारिश में भी फर्ज़ीवाड़ा! कृत्रिम वर्षा का कोई नामोनिशान नहीं दिख रहा। इंद्र देवता भी सरकार का साथ नहीं दे रहे।” वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रयोग सही दिशा में एक कदम है, लेकिन गलत मौसम में किया गया।

कब होगी असली ‘कृत्रिम बारिश’?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में क्लाउड सीडिंग का सही समय सर्दियों की शुरुआत में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के दौरान होता है, जब वातावरण में पर्याप्त नमी और विकसित वर्षा वाले बादल मौजूद रहते हैं। फिलहाल, दिल्ली की हवा अभी भी जहरीली है और लोगों की उम्मीदें अगले मौसमीय सिस्टम पर टिकी हैं।

Sandhya Samay News

संध्या समय न्यूज़ – आपके विश्वास की आवाज़ संध्या समय न्यूज़ की स्थापना वर्ष 2018 में की गई, जो कि MSME में विधिवत रूप से पंजीकृत है। हमारा उद्देश्य समाज तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है। हम देश-प्रदेश की ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों, और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आपके सामने सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम अपने सभी दर्शकों और पाठकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें लगातार देखा, समझा और अपना विश्वास बनाए रखा। आपकी यही सराहना और समर्थन हमें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। संध्या समय न्यूज़ हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा के मूल्यों पर कार्य करता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now