Whose law applies in space: धरती की सीमाओं, समुद्रों और देशों की सीमाओं से कहीं दूर, अंतरिक्ष की अनंत और अंधेरी ऊंचाइयों में अगर कोई इंसान किसी अपराध को अंजाम दे दे, तो फिर उस पर मुकदमा कौन चलाएगा? क्या उसे सजा भी मिलेगी? और यदि मिलेगी, तो वह सजा देने वाली अदालत किस देश की होगी?
शायद कुछ दशक पहले तक यह सवाल किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लगता होगा। लेकिन आज, जब अंतरिक्ष में मानव की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है और जल्द ही ‘स्पेस टूरिज्म’ का दौर शुरू होने वाला है, तो यह एक बेहद व्यावहारिक और सैद्धांतिक सवाल बन चुका है। दरअसल, पृथ्वी की तरह अंतरिक्ष में किसी एक देश की हुकूमत या पुलिस नहीं है। फिर वहां कानून व्यवस्था कैसे मैनेज होती है? आइए इस रहस्यमयी और दिलचस्प विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
अंतरिक्ष में क्राइम का बेसिक नियम: ‘पासपोर्ट’ है आधार
धरती पर जहां जुर्म होता है, आमतौर पर वहीं के देश या राज्य का कानून लागू होता है। लेकिन अंतरिक्ष एक ऐसा क्षेत्र है जहां किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता (Sovereignty) मान्य नहीं है। तो फिर कानून कैसे काम करता है?
अंतरराष्ट्रीय समझौतों के मुताबिक, अगर कोई एस्ट्रोनॉट स्पेस में कोई गैर-कानूनी काम करता है, तो उस पर मुकदमा चलाने का ‘पहला अधिकार’ उस एस्ट्रोनॉट के अपने देश को हासिल है। अंतरराष्ट्रीय कानून की भाषा में इसे ‘Active Nationality Principle’ कहा जाता है। सरल शब्दों में, अपराधी जिस देश का नागरिक है और जिस देश का पासपोर्ट रखता है, वही देश अपने नागरिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।
उदाहरण के लिए, अगर अंतरिक्ष में अमेरिका का नागरिक कोई जुर्म करता है, तो वापसी पर उसे अमेरिकी अदालतों के सामने पेश किया जाएगा। वहीं, अगर रूस या भारत का कोई एस्ट्रोनॉट ऐसा करता है, तो उस पर उसके मूल देश के कानून के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
‘रजिस्ट्रेशन का नियम’ – मॉड्यूल के हिसाब से बदलता है कानून
अंतरिक्ष स्टेशन (खासकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS) कोई एक मशीन नहीं है, बल्कि यह कई देशों द्वारा बनाए गए मॉड्यूल्स (हिस्सों) को जोड़कर बनाया गया एक विशाल लैब है। यहां एक और बेहद दिलचस्प कानूनी नियम लागू होता है, जिसे ‘रजिस्ट्रेशन का नियम’ कहते हैं।
ISS में हर हिस्से या मॉड्यूल का रजिस्ट्रेशन अलग-अलग देशों के नाम है। जिस देश ने अपना मॉड्यूल बनाया है, उसे अंतरिक्ष में भेजने वाला रॉकेट उसी देश का है, तो उस हिस्से में उसी देश का कानून प्रभाव में रहता है।
इसे ऐसे समझिए कि अगर कोई एस्ट्रोनॉट अमेरिकी मॉड्यूल में घूसकर कोई चीज चुराता है, तो अमेरिकी कानून लागू होगा। अगर वही एस्ट्रोनॉट रूसी मॉड्यूल (जैसे ज़वेज़दा) में जाकर कोई विवाद करता है, तो वहां रूसी कानून के तहत उसे दोषी माना जा सकता है। यानी अंतरिक्ष स्टेशन के अंदर कुछ कदम चलने भर से आपके ऊपर लागू होने वाला कानून बदल सकता है!
अगर पीड़ित किसी और देश का नागरिक हो तो?
अंतरिक्ष में एक देश के एस्ट्रोनॉट ही नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक एक साथ रहते हैं। ऐसे में अगर कोई अपराध होता है और उसमें पीड़ित व्यक्ति आरोपी से अलग देश का नागरिक है, तो मामला और भी संवेदनशील और जटिल हो जाता है।
मान लीजिए, एक अमेरिकी एस्ट्रोनॉट ने जापानी एस्ट्रोनॉट के साथ कोई अपराध किया। ऐसी स्थिति में जापान सरकार चाहे तो अमेरिका से आरोपी के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर सकती है, या फिर अपनी अदालतों में केस चलाने का दबाव बना सकती है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में आरोपी के देश को ही कार्रवाई करने का अधिकार पहले दिया जाता है।
अगर आरोपी का देश न्याय दिलाने में आनाकानी करता है या अपने नागरिक को बचाने की कोशिश करता है, तो पीड़ित देश अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रास्तों, संयुक्त राष्ट्र के मंचों और अंतर-सरकारी समझौतों के जरिए न्याय की मांग कर सकता है। अंतरिक्ष में हुए अपराधों को लेकर कोई भी देश अनदेखी नहीं कर सकता, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों पर संदेह का बादल छा जाता है।
1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ – अंतरिक्ष कानून की नींव
अंतरिक्ष में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए साल 1967 में ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ (Outer Space Treaty) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे अब तक दुनिया के करीब 110 से ज्यादा देशों ने मान लिया है। यह अंतरिक्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून का मुख्य ढांचा है।
इस संधि के तहत यह साफ तौर पर लिखा गया है कि अंतरिक्ष (जिसमें चांद और अन्य खगोलीय पिंड शामिल हैं) पूरी मानवता की साझी धरोहर (Province of all mankind) है। इसका मतलब है कि कोई भी देश अंतरिक्ष में जाकर अपना झंडा गाड़कर उस पर अपनी मालिकाना हक या संप्रभुता का दावा नहीं कर सकता। ठीक वैसे ही जैसे किसी देश को समुद्र के बीच में पानी पर अपना कब्ज़ा नहीं करने दिया जाता।
इसके अलावा, इस संधि में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंतरिक्ष का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। अंतरिक्ष या किसी ग्रह की कक्षा में परमाणु हथियार या जनसंहार (Mass Destruction) के किसी भी तरह के हथियार रखने पर पूरी तरह से पाबंदी है।
ISS इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) की भूमिका
आउटर स्पेस ट्रीटी एक सामान्य ढांचा देती है, लेकिन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जैसे विशिष्ट मिशनों के लिए एक अलग और कड़े कानून की जरूरत थी। इसके लिए अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोपीय संघ के देशों ने मिलकर ‘ISS इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA)’ बनाया।
यह समझौता अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा, स्टेशन के संचालन और अनुशासन को लेकर एक ठोस कानूनी ढांचा तैयार करता है। IGA के तहत अंतरिक्ष में होने वाली किसी भी आपराधिक गतिविधि, सरकारी या निजी संपत्ति के नुकसान, या गंभीर अनुशासनहीनता से निपटने के लिए एक खास प्रक्रिया तय की गई है।
जब भी कोई ऐसी घटना होती है, तो सबसे पहले संबंधित देशों की एजेंसियां (जैसे NASA, Roscosmos) आपसी सहमति से जांच करती हैं। सबूत जुटाने के बाद, मामले को आरोपी के देश के न्याय विभाग (जैसे अमेरिका का डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस) को भेजा जाता है, जो धरती पर बैठकर कानूनी कार्रवाई तय करता है।
क्या अंतरिक्ष में कोई अपराध हुआ है?
यह सवाल सिर्फ कानूनी किताबों तक सीमित नहीं है। साल 2019 में अंतरिक्ष से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। अमेरिकी एस्ट्रोनॉट एनी मैक्लेन (Anne McClain) पर उनकी पूर्व पत्नी समलेसन वॉर्डन की ओर से आईएसएस से उनके बैंक अकाउंट को इलीगली एक्सेस करने का आरोप लगाया गया था।
यह दुनिया का पहला मामला था जहां अंतरिक्ष से कथित तौर पर साइबर क्राइम किया गया हो। इस मामले में ‘रजिस्ट्रेशन का नियम’ और ‘नागरिकता का नियम’ दोनों काम आए। क्योंकि एनी मैक्लेन अमेरिकी नागरिक थीं और उन्होंने अमेरिकी मॉड्यूल से कंप्यूटर का इस्तेमाल किया था, इसलिए इस मामले की जांच अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने की थी। (बाद में जांच में एनी मैक्लेन को निर्दोष करार दिया गया, लेकिन इस मामले ने स्पेस लॉ की व्यावहारिकता को साबित कर दिया)।
भविष्य की चुनौती: प्राइवेट स्पेस कंपनियां और स्पेस टूरिज्म
आज जो कानून बने हैं, वे मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों (जैसे ISRO, NASA) के एस्ट्रोनॉट्स के लिए हैं। लेकिन अब जब एलॉन मस्क की स्पेसएक्स (SpaceX), जेफ बेजोस की ब्लू ऑरिजिन (Blue Origin) जैसी प्राइवेट कंपनियां अंतरिक्ष यात्रा कर रही हैं और आम लोग टिकट खरीदकर स्पेस जा रहे हैं, तो कानून को नए ढंग से सोचना होगा।
अगर दो अरबपति स्पेस टूरिज्म के दौरान किसी प्राइवेट स्पेसशिप में लड़ पड़ते हैं, तो कानून कैसे काम करेगा? इसके लिए दुनिया भर के कानून विशेषज्ञ लगातार नए नियमों पर काम कर रहे हैं, ताकि जब मानव चंद्रमा और मंगल पर बसने लगे, तब तक एक मजबूत ‘स्पेस पुलिस’ और ‘स्पेस कोर्ट’ की व्यवस्था हो सके।

























