दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिस और मीडियाकर्मियों की तकरार ने एक पुराने सवाल को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। पुलिस ने कई स्वतंत्र पत्रकारों से प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद पीआईबी (PIB) कार्ड मांग लिया, जिसके बाद पत्रकार संगठनों ने इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया है। आम पाठकों के लिए भी जानना जरूरी हो गया है कि प्रेस कार्ड और पीआईबी (PIB) कार्ड में आखिर अंतर है क्या, इन्हें बनाता कौन है और कौन-सा कार्ड कहां काम आता है। आइए समझते हैं पूरा मामला।
प्रेस कार्ड क्या है और कौन जारी करता है?
प्रेस कार्ड कोई सरकारी दस्तावेज नहीं है। यह उस मीडिया संस्थान की ओर से जारी एक निजी पहचान पत्र है, जहां पत्रकार काम करता है। अखबार, टीवी चैनल, रेडियो स्टेशन या रजिस्टर्ड न्यूज वेबसाइट—किसी भी संस्थान का संपादक अपने रिपोर्टर, फोटोग्राफर या कैमरापर्सन को यह कार्ड देता है। इसका एकमात्र उद्देश्य है—फील्ड में यह बताना कि यह व्यक्ति एक सक्रिय मीडियाकर्मी है और व्यावसायिक कवरेज कर रहा है।

यहां एक अहम बात समझने जरूरी है। भारत में कोई राष्ट्रीय स्तर का वैधानिक प्रेस कार्ड नहीं है। न कोई सरकारी एजेंसी इसे जारी करती है, न ही इसका किसी केंद्रीय रजिस्टर में पंजीकरण होता है। रिपोर्टिंग का अधिकार पत्रकार को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(अ) के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की आजादी से मिलता है, प्रेस कार्ड से नहीं। कार्ड सिर्फ पहचान का माध्यम भर है।
पीआईबी (PIB) कार्ड क्या है? सरकारी मान्यता का दूसरा स्तर
PIB कार्ड यानी पत्र सूचना कार्यालय (Press Information Bureau) का एक्रेडिटेशन कार्ड। यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाला दफ्तर है और यहां से मिलने वाला कार्ड किसी निजी आईडी से कहीं बड़ी चीज है—यह केंद्र सरकार की ओर से एक पत्रकार को दी जाने वाली आधिकारिक मान्यता है। इसे एक्रेडिटेशन कहा जाता है और इसकी सिफारिश एक समिति करती है, जिसमें मीडिया संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। केंद्रीय PIB एक्रेडिटेशन मुख्य रूप से दिल्ली में तैनात पत्रकारों के लिए होता है।
PIB एक्रेडिटेशन के लिए क्या-क्या चाहिए?
यह कार्ड हासिल करना आसान नहीं है, इसके लिए सरकार के तय नियम हैं:

- पत्रकार के पास मुख्यधारा के मीडिया संस्थान में कम से कम 5 साल का पूर्णकालिक अनुभव होना चाहिए।
- संस्थान का नियमित प्रकाशन/प्रसारण हो और उसका सर्कुलेशन, व्यूअरशिप व राजस्व सरकार के न्यूनतम मानकों पर खरा उतरे।
- फ्रीलांस पत्रकार आमतौर पर इस मान्यता के पात्र नहीं होते।
- एक्रेडिटेशन हमेशा के लिए नहीं मिलता; इसका हर साल नवीनीकरण होता है।
- आवेदन PIB की आधिकारिक वेबसाइट के एक्रेडिटेशन पोर्टल से ऑनलाइन किया जाता है।
इन्हीं कड़ी शर्तों की वजह से हर पत्रकार के पास PIB कार्ड नहीं होता। कई वरिष्ठ रिपोर्टर्स तक के पास यह मान्यता नहीं होती।
कहां-कहां काम आता है PIB कार्ड?
PIB एक्रेडिटेशन का सबसे बड़ा फायदा है हाई-सिक्योरिटी और हाई-प्रोफाइल जगहों पर प्रवेश। इस कार्ड से संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, केंद्रीय मंत्रालयों और प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों जैसी जगहों पर आधिकारिक कवरेज की पहुंच मिलती है।
सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस, बजट सत्र और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की सूचनाएं सबसे पहले एक्रेडिटेड पत्रकारों तक पहुंचती हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार इन पत्रकारों को सीजीएचएस यानी केंद्रीय स्वास्थ्य योजना का लाभ भी देती है।

प्रेस कार्ड धारकों का दायरा कितना बड़ा है?
साधारण प्रेस कार्ड धारक पत्रकार प्रदर्शन स्थल, सार्वजनिक कार्यक्रम, अपने बीट के दफ्तर और निजी इवेंट्स में अपने संस्थान की पहचान से काम कर सकते हैं। लेकिन सुरक्षा घेरे वाले सरकारी स्थलों पर इस कार्ड से स्वतः प्रवेश नहीं मिलता। इस कार्ड से कोई वीआईपी एंट्री या सरकारी विशेषाधिकार भी नहीं जुड़ा होता।
एक नजर में: प्रेस कार्ड vs PIB कार्ड
मीडिया विशेषज्ञों और वरिष्ठ पत्रकारों के मुताबिक जंतर-मंतर जैसी सार्वजनिक जगह पर रिपोर्टिंग के लिए पीआईबी कार्ड होना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है। संस्थान द्वारा जारी प्रेस कार्ड से पहचान साबित होने पर पत्रकार को कवरेज से रोका नहीं जा सकता, जब तक कोई विशेष आदेश या प्रतिबंध लागू न हो।
इसीलिए पत्रकार संगठनों ने जंतर-मंतर की घटना पर गंभीर आपत्ति जताई है और इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया है। पुलिस द्वारा पीआईबी कार्ड की मांग करना दरअसल सरकारी और गैर-सरकारी कवरेज के अंतर से जुड़ा सवाल बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में बहस और तेज होने की संभावना है।






















