अंतरिक्ष में आवाज पर विज्ञान का खुलासा

अंतरिक्ष में आवाज क्यों नहीं सुनाई देती? वैक्यूम, साउंड वेव्स और अंतरिक्ष यात्रियों के संवाद से जुड़े वैज्ञानिक कारणों को आसान भाषा में समझें।

अंतरिक्ष में आवाज क्यों नहीं सुनाई देती जानिए

HIGHLIGHTS

  • आखिर अंतरिक्ष में क्यों नहीं सुनती आवाज
  • सुपरनोवा के धमाके सुनाई क्यों नहीं देते
  • फिल्मों जैसा नहीं होता अंतरिक्ष का सन्नाटा
  • अंतरिक्ष में चीखने पर क्या होगा जानिए

अंतरिक्ष एक ऐसी दुनिया है जहां तारे चमकते हैं, आकाशगंगाएं घूमती हैं और तारों के बीच भीषण टक्करें होती हैं। लेकिन इतने सारे रोमांचक घटनाक्रमों के बावजूद वहां पूर्ण सन्नाटा छाया रहता है। फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि अंतरिक्ष में विस्फोट की भारी गर्जना सुनाई देती है, जबकि वास्तविकता में ऐसा कभी नहीं होता। आखिर ऐसा क्यों है कि ब्रह्मांड के सबसे बड़े धमाके भी हमारे कानों तक अपनी आवाज नहीं पहुंचा पाते? आइए इस दिलचस्प सवाल के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझते हैं।

सबसे पहले समझें: आवाज है क्या?

आवाज असल में एक मैकेनिकल वेव (यांत्रिक तरंग) है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, जैसे कि हमारे गले की वॉइस बॉक्स, तो यह कंपन आसपास मौजूद हवा के कणों को हिलाने लगता है। ये कण एक-दूसरे से टकराकर यही कंपन आगे के कणों तक पहुंचाते हैं और इसी तरह ध्वनि तरंग की यात्रा शुरू होती है।

यानी आवाज को चलने के लिए किसी माध्यम की सख्त जरूरत होती है — चाहे वह हवा हो, पानी हो या कोई ठोस धातु। जहां ये कण मौजूद नहीं, वहां आवाज का सफर वहीं रुक जाता है। यही कारण है कि पानी के नीचे आवाज हवा की तुलना में तेज चलती है, क्योंकि पानी में कण ज्यादा पास-पास होते हैं।

अंतरिक्ष में कोई माध्यम क्यों नहीं है?

पृथ्वी का वायुमंडल हर सेंटीमीटर में करोड़ों हवाई कणों से भरा है। इसके उलट, अंतरिक्ष लगभग पूर्ण वैक्यूम है। वहां कणों की संख्या इतनी कम होती है कि उन्हें लगभग शून्य माना जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की तुलना में अंतरिक्ष के खाली हिस्सों में प्रति क्यूबिक सेंटीमीटर में मात्र एक-दो कण ही मौजूद होते हैं।

जब कण ही नहीं होंगे, तो कंपन को आगे बढ़ाने वाला कौन होगा? यही वजह है कि अंतरिक्ष में आवाज की तरंगें जन्म लेते ही समाप्त हो जाती हैं।

मैकेनिकल और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों में क्या अंतर है?

यहां विज्ञान का एक रोचक पहलू सामने आता है। तरंगें मुख्य रूप से दो तरह की होती हैं कि मैकेनिकल तरंगें आवाज, पानी की लहरें और भूकंप की तरंगें इसी श्रेणी में आती हैं। इन्हें चलने के लिए ठोस, तरल या गैस जैसे माध्यम की जरूरत होती है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें रोशनी, रेडियो तरंगें, एक्स-रे और माइक्रोवेव इसी कैटेगरी में आती हैं। इन्हें किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती और ये वैक्यूम से आसानी से गुजर जाती हैं। यही अंतर हमें बताता है कि हम लाखों प्रकाश वर्ष दूर स्थित तारों और आकाशगंगाओं को देख पाते हैं, लेकिन उनसे जुड़ी कोई आवाज नहीं सुन सकते।

क्या सुपरनोवा जैसे धमाकों की आवाज सुनाई देती है?

तारों का विस्फोट यानी सुपरनोवा, ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक है। इसमें अत्यधिक ऊर्जा निकलती है और आसपास के गैस के बादलों को धक्का दिया जाता है। कुछ हिस्सों में गैस घनी होने से ध्वनि तरंगें बन सकती हैं, लेकिन जैसे ही ये तरंगें विरल (कम घने) अंतरिक्ष में पहुंचती हैं, वे लुप्त हो जाती हैं। इसलिए धरती से इन धमाकों की आवाज कभी नहीं सुनी जा सकती।

अंतरिक्ष यात्री आपस में बात कैसे करते हैं?

अंतरिक्ष यान के अंदर यात्री आराम से एक-दूसरे से बातचीत कर पाते हैं, क्योंकि यान के भीतर कृत्रिम वायुमंडल यानी हवा भरी जाती है। यही हवा माध्यम का काम करती है।

लेकिन खुले अंतरिक्ष में स्पेसवॉक करते समय हालात बदल जाते हैं। वहां चिल्लाने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि आवाज कोई माध्यम नहीं मिलेगा। इसलिए अंतरिक्ष यात्री रेडियो संचार का सहारा लेते हैं। रेडियो तरंगें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक होती हैं, इसलिए वे वैक्यूम से गुजरकर हेलमेट में लगे रिसीवर तक पहुंच जाती हैं।

क्या ब्रह्मांड में आवाज बिल्कुल संभव नहीं है?

एक रोचक तथ्य यह है कि वैज्ञानिकों ने पर्सियस क्लस्टर स्थित एक काले छेद से निकलती ध्वनि तरंगों का पता लगाया है। वहां विशाल गैस के बादल माध्यम का काम करते हैं, लेकिन यह आवाज इतनी गहरी है कि इसे सुनने के लिए उसे करोड़ों गुना ऊंचा करना पड़ता है।

Sandhya Samay News

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