अमेरिका ने ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार में मदद करने के आरोप में भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और भारत से जुड़ी नौ कंपनियों व संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, कथित नेटवर्क ने फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और जहाजों के झंडे से जुड़े दस्तावेजों के जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को संचालन जारी रखने में मदद की है।
यह कार्रवाई ईरान की तेल बिक्री और उससे होने वाली आय को रोकने के अमेरिकी अभियान का हिस्सा बताई गई है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि समुद्री सेवाएं देने के नाम पर बनाई गई फर्जी रजिस्ट्रियों ने जहाजों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और नियमों से बचने का रास्ता दिया। इन आरोपों को अमेरिकी सरकार का दावा समझना चाहिए; प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
चंडीगढ़ से नेटवर्क चलाने का आरोप
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, शर्मा और शाहिद कथित तौर पर चंडीगढ़ से नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने विभिन्न देशों के समुद्री प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान और अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर ऐसी रजिस्ट्रियां तैयार कीं, जिनकी आधिकारिक अनुमति संबंधित देशों ने नहीं दी थी।
इन सेवाओं के लिए वेबसाइटें बनाई गई थीं। वेबसाइटों पर जहाजों का पंजीकरण, समुद्री झंडा उपलब्ध कराना, नाविकों को प्रशिक्षण देना और जहाजों का वर्गीकरण जैसी सुविधाएं देने का दावा किया जाता था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन सेवाओं का इस्तेमाल ईरानी तेल ले जा रहे जहाजों ने किया।
मंत्रालय ने कथित धोखाधड़ी की शुरुआत 2014 के आसपास बताई है। आरोप है कि उस समय दंपति ने कैरेबियाई देश डोमिनिका के समुद्री झंडा प्राधिकरण के प्रतिनिधि के रूप में खुद को पेश करने की कोशिश की थी। बाद में, 2023 में शर्मा ने सिंगापुर में Eswatini Maritime Affairs and International Ship Registry Pte. Ltd. नाम की कंपनी स्थापित की। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि एस्वातिनी के अधिकारियों ने इस संगठन से किसी भी संबंध से सार्वजनिक तौर पर इनकार किया था।
कई देशों के नाम पर फर्जी रजिस्ट्रियां
अमेरिकी अधिकारियों ने जिन वेबसाइटों की पहचान की, वे अरूबा, गुयाना, माली, मोजांबिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते जैसे देशों या क्षेत्रों के नाम पर समुद्री पंजीकरण सेवाएं देने का दावा कर रही थीं। अमेरिका का आरोप है कि इन रजिस्ट्रियों के सहारे कुछ जहाजों ने अपनी पहचान और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी छिपाकर प्रतिबंधित तेल की ढुलाई की।
भारत से जुड़ी नौ संस्थाएं प्रतिबंधों के दायरे में
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने नेटवर्क से जुड़ी भारत स्थित नौ कंपनियों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई की है। घोषित सूची में ओशनिक टेक्नोलॉजीज इंडिया, आर्यावर्त शिप मैनेजमेंट, प्रिसेप्ट ट्रेंड्स, पॉलीनेशिया मैरीटाइम, एलेक्सार्या फिनसर्व, एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, विहाराबोटिंग और आर्यावर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट में सूची को नौ संस्थाओं का बताया गया है, लेकिन यहां उपलब्ध नामों में आठ ही दिखते हैं; इसलिए नौवें नाम की आधिकारिक सूची से पुष्टि जरूरी है।
मंत्रालय ने भारतीय नागरिक अश्वनी कुमार धीमान और इश्विंदर सिंह का भी उल्लेख किया है। उसके मुताबिक, वे शर्मा के नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों में निदेशक के तौर पर काम कर रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों का यह भी आरोप है कि ओशनिक टेक्नोलॉजीज इंडिया का इस्तेमाल फर्जी जहाज रजिस्ट्रियां तैयार करने में किया गया। जांच का दबाव बढ़ने के बाद शाहिद ने कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़ी कुछ कंपनियों का प्रबंधन संभाल लिया था।
फर्जी जहाज पंजीकरण से क्या जोखिम?
समुद्री जहाजों का राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन और झंडा यह तय करने में मदद करता है कि जहाज किस देश के नियमों के अधीन है। अगर कोई जहाज गलत या अनधिकृत पंजीकरण के तहत चलता है, तो उसकी निगरानी और जवाबदेही मुश्किल हो सकती है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी है कि ऐसे जहाजों के पास वैध प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) बीमा न हो। दुर्घटना की स्थिति में इससे तटीय देशों को आर्थिक नुकसान और पर्यावरणीय सफाई की लागत उठानी पड़ सकती है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की मदद करने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जमीन, समुद्र या हवाई मार्ग से ईरानी शासन की सहायता करने वालों को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यह कार्रवाई ईरान के तेल राजस्व और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क को सीमित करने की व्यापक अमेरिकी नीति का हिस्सा है।



























