US Midterm Elections 2026:अमेरिका मिडटर्म इलेक्शन 2026 के नतीजे अब सामने आने लगे हैं और भारतीय मूल के उम्मीदवारों का प्रदर्शन इस बार खासा बेहतर रहा है। 3 नवंबर को हुए मतदान के बाद शुरुआती रुझानों में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रिया डंडिया ने फ्लोरिडा से जीत दर्ज कर ली है, वहीं रिपब्लिकन स्टार विवेक रामास्वामी ओहायो की गवर्नर रेस में पिछड़े चल रहे हैं। इन नतीजों का असर सिर्फ वॉशिंगटन पर नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीति में भारतवंशियों की बढ़ती भूमिका पर भी पड़ेगा।
प्रिया डंडिया की जीत: भारतीयों को बड़ी सीट
भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार प्रिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट (FL-22) से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीत लिया है। डिसीजन डेस्क HQ और एसोसिएटेड प्रेस ने उन्हें विजेता प्रोजेक्ट किया है। करीब 94 प्रतिशत वोटों की गिनती के समय प्रिया को 52.2 प्रतिशत मत मिले, जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी 47.8 प्रतिशत पर सिमट गए।
यह सीट रेडिस्ट्रिक्टिंग के बाद ओपन हुई थी, यानी इस बार कोई मौजूदा सांसद मैदान में नहीं था। पेशे से पूर्व स्कूल प्रिंसिपल रहीं प्रिया डंडिया की इस जीत को अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ओहायो चुनाव: विवेक रामास्वामी क्यों पिछड़े?
रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुरजोर समर्थक विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन शुरुआती रुझान उनके लिए चिंता के हैं। करीब 28 से 29 प्रतिशत वोटों की गिनती के दौरान डेमोक्रेट उम्मीदवार और ओहायो की पूर्व हेल्थ डायरेक्टर एमी एक्टन को 61 से 62 प्रतिशत वोट मिले, जबकि रामास्वामी 35 से 36 प्रतिशत पर ही रुके।
यानी दोनों के बीच करीब 25 प्रतिशत का बड़ा अंतर। हालांकि मतगणना अधूरी है और अंतिम नतीजा बाकी है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतना बड़ा गैप पाटना रामास्वामी के लिए लगभग असंभव है। 2024 में रिपब्लिकन प्रेसिडेंशियल रेस लड़ने वाले रामास्वामी के लिए यह नतीजा बड़ा झटका हो सकता है।
एरिजोना में शाह-श्वाइकर्ट की कांटे की टक्कर
भारतीय मूल के डॉक्टर और मौजूदा सांसद अमिश शाह एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट (AZ-1) से अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं। 2024 में एरिजोना से एकमात्र डेमोक्रेटिक फ्लिप यही सीट थी। इस बार उनका सामना पूर्व रिपब्लिकन सांसद डेविड श्वाइकर्ट से है — यानी दो साल पहले वाली जंग का रिमैच।
रियलक्लियरपॉलिटिक्स के मुताबिक इस सीट पर श्वाइकर्ट को 49.2 प्रतिशत और अमिश शाह को 48.6 प्रतिशत वोट मिले हुए दिखाए गए हैं — अंतर सिर्फ आधा प्रतिशत! फॉक्स न्यूज ने इस रेस को टॉस-अप यानी बराबरी का मुकाबला रेट किया है। एरिजोना में मेल-इन बैलेट की गिनता धीमी रहने के कारण अंतिम नतीजे में समय लग सकता है।
LA मेयर चुनाव: नित्या रमन vs करेन बास
अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर लॉस एंजिल्स के मेयर पद के लिए भारतीय मूल की नित्या रमन मौजूदा मेयर करेन बास को चुनौती दे रही हैं। लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल की सदस्य रहीं नित्या रमन इस पद पर पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार बन सकती हैं।
चुनाव से पहले के सर्वे में दोनों उम्मीदवारों को करीब 40-40 प्रतिशत का समान समर्थन मिला था, जिससे यह रेस बेहद करीबी मानी जा रही है। 4 नवंबर की सुबह तक इस मुकाबले का नतीजा स्पष्ट नहीं हुआ था। कैलिफोर्निया में मेल-इन बैलेट की बड़ी संख्या के चलते फाइनल रिजल्ट में देरी हो सकती है।
न्यूयॉर्क चुनाव: सरिता के सामने लेटिसिया जेम्स
न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद के लिए भारतीय मूल की रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमारेड्डी डेमोक्रेटिक दिग्गज लेटिसिया जेम्स के खिलाफ मैदान में हैं — वही जेम्स, जिन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ कोर्ट केस लड़ा था।
चुनाव से पहले के सर्वे लेटिसिया जेम्स को साफ बढ़त दे रहे थे। मैरिस्ट पोल में जेम्स को 52 प्रतिशत और कोमारेड्डी को 38 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान था, वहीं सिएना कॉलेज के सर्वे में यह अंतर 54 प्रतिशत बनाम 39 प्रतिशत था — यानी 13 से 15 प्रतिशत की बढ़त। अंतिम नतीजा मतगणना के बाद ही साफ होगा।
कांग्रेस और मेयर पद पर भी भारतवंशियों का दबदबा
अमेरिका मिडटर्म इलेक्शन 2026 में भारतीय मूल के दर्जनों उम्मीदवार टिकट पर थे:
- राजा कृष्णमूर्ति — इलिनॉय से सीनेट की रेस
- सुहास सुब्रमण्यम — वर्जीनिया की 10वीं कांग्रेसनल सीट
- प्रमिला जयपाल — वॉशिंगटन स्टेट से कांग्रेस
- श्री थानेदार — मिशिगन से कांग्रेस
- आफताब पुरेवाल — सिंसिनाटी के मेयर पद
अमेरिका मिडटर्म चुनाव 2026 क्यों अहम?
अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है और उसके बीच में पड़ने वाले चुनाव को मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है। इसमें:
- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव होता है (बहुमत के लिए 218 जरूरी)
- सीनेट की इस बार 35 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें फ्लोरिडा और ओहायो की खाली सीटों के विशेष चुनाव भी शामिल हैं
- कई राज्यों में गवर्नर और स्थानीय पदों के लिए भी वोट पड़े
इस चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास हाउस में 219 और सीनेट में 53 सीटें थीं। अगर पार्टी किसी भी एक सदन में बहुमत गंवाती है, तो ट्रंप का एजेंडा अटक सकता है और डेमोक्रेट्स को सरकार पर निगरानी की ताकत मिल जाएगी। यही वजह है कि मिडटर्म 2026 को ट्रंप प्रशासन की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
रिकॉर्ड तोड़ अर्ली वोटिंग और सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
इस बार चुनाव से पहले ही 5 करोड़ 70 लाख से ज्यादा अमेरिकियों ने वोट डाल दिया था — जिनमें करीब 3.20 करोड़ लोगों ने पोलिंग बूथ पर और लगभग 2.50 करोड़ ने मेल-इन बैलेट से वोटिंग की। 2022 के मिडटर्म में यह आंकड़ा 4.60 करोड़ था, यानी इस बार अर्ली वोटिंग में साफ इजाफा हुआ है।
वहीं, कैलिफोर्निया के करीब 20 हजार विवादित मेल-इन बैलेट को लेकर ट्रंप प्रशासन की सुप्रीम कोर्ट में आपातकालीन अपील खारिज कर दी गई। निचली अदालतें भी पहले ही गिनती रोकने की मांग ठुकरा चुकी थीं। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन के लिए झटका माना जा रहा है।
























