पूर्व DGP आलोक राज की आवाज में T-Series का नया भक्ति गीत रिलीज

बिहार के पूर्व DGP आलोक राज की आवाज में T-Series ने भक्ति गीत 'जोतावाली शेरावाली मां' रिलीज किया है। जानिए उनके IPS करियर, संगीत साधना और गायकी के सफर की पूरी कहानी।

माता रानी के भजन में दिखे पूर्व DGP आलोक राज

HIGHLIGHTS

  • पूर्व DGP आलोक राज की आवाज में भक्ति गीत रिलीज
  • खाकी के बाद सुरों से धमाल मचा रहे आलोक राज
  • T-Series ने रिलीज किया पूर्व DGP का नया भजन
  • अपराधियों में खौफ, अब भजनों से जीतेंगे दिल

पुलिस की वर्दी में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले और बिहार की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल चुके पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आलोक राज इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं। इस बार उनकी पहचान किसी पुलिस अभियान या प्रशासनिक फैसले को लेकर नहीं, बल्कि उनकी गायकी को लेकर सुर्खियों में है। देश की प्रमुख म्यूजिक कंपनी T-Series ने उनकी आवाज में माता रानी का भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ रिलीज किया है। T-Series Bhakti Sagar के बैनर तले जारी इस गीत में आलोक राज खुद भी नजर आ रहे हैं।

इस भक्ति गीत का संगीत निर्देशन दिलीप सेन-समीर सेन ने किया है, जबकि इसके बोल अशोक शौक ने लिखे हैं। खास बात यह है कि आलोक राज के लिए संगीत कोई नया शौक नहीं, बल्कि वर्षों की साधना और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। आईपीएस अधिकारी के रूप में बेहद व्यस्त करियर के बावजूद उन्होंने संगीत के प्रति अपने लगाव को बनाए रखा और शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा हासिल की।

22 साल की पुलिस सेवा के बाद शुरू की शास्त्रीय संगीत की साधना

आलोक राज का संगीत से रिश्ता उनके स्कूल और कॉलेज के दिनों से रहा है। उस समय उन्हें फिल्मी गीत गाने का काफी शौक था। लेकिन 20 अगस्त 1989 को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने के बाद उनकी प्राथमिकताएं बदल गईं। पुलिस की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों और लगातार व्यस्त रहने वाले पेशेवर जीवन के कारण संगीत का शौक कुछ समय के लिए पीछे छूट गया।

करीब 22 वर्षों तक पुलिस सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद दिसंबर 2011 में उन्होंने दोबारा संगीत की ओर गंभीरता से कदम बढ़ाया। इस बार उन्होंने केवल शौक के तौर पर गायकी नहीं की, बल्कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा लेनी शुरू की।

संगीत गुरु अशोक कुमार प्रसाद के मार्गदर्शन में उन्होंने नियमित प्रशिक्षण लिया और करीब छह वर्षों तक रियाज किया। उनकी इसी मेहनत का परिणाम था कि वर्ष 2017 में T-Series के बैनर तले उनका पहला म्यूजिक एल्बम ‘साईं रचना’ रिलीज हुआ। इसके बाद उन्होंने भक्ति संगीत, गजल और साहित्यिक रचनाओं को अपनी आवाज देना जारी रखा।

गोपालदास नीरज और दुष्यंत कुमार की रचनाओं को भी दी आवाज

आलोक राज की गायकी की खासियत यह है कि उन्होंने खुद को केवल भक्ति गीतों तक सीमित नहीं रखा। साहित्य और संगीत के प्रति अपनी रुचि के चलते उन्होंने कई प्रतिष्ठित कवियों की रचनाओं को भी स्वर दिया है।

उन्होंने पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित कवि गोपालदास नीरज के गीतों पर आधारित एक एल्बम तैयार किया था। इसके लिए उन्होंने नीरज से उनकी रचनाओं के अधिकार भी प्राप्त किए थे। इसके अलावा प्रसिद्ध कवि और शायर दुष्यंत कुमार की गजलों को भी अपनी आवाज दी।

कबीर के भजनों पर आधारित उनका एल्बम भी संगीत प्रेमियों के बीच आया। वहीं भगवान शिव को समर्पित उनका भजन ‘ये भोला सबसे बड़ा है’ भी चर्चा में रहा। ‘जय अंबे मां जय जय अंबे मां’ और ‘वल्कल ना ओढ़ री’ जैसे गीतों में भी उनकी गायकी सुनने को मिली है।

1989 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं आलोक राज

मुजफ्फरपुर जिले से संबंध रखने वाले आलोक राज 1989 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। अपने लंबे पुलिस करियर में उन्होंने बिहार और देश के अलग-अलग हिस्सों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं।

एकीकृत बिहार के समय वह रांची, गुमला, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, सीतामढ़ी और बेगूसराय जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात रहे। बाद में उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में DIG और IG के रूप में भी सेवाएं दीं।

वर्ष 2004 से 2011 के बीच CRPF में रहते हुए उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पटना में ASP रहते हुए एक पुलिस मुठभेड़ में चार अपराधियों के मारे जाने के मामले में उन्हें राष्ट्रपति का वीरता पदक भी मिला था।

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में टाटा नैनो प्लांट के विरोध में हुए हिंसक आंदोलन के दौरान भी उन्होंने CRPF के IG के रूप में कई दिनों तक मोर्चा संभाला था। उस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही।

करीब 105 दिनों तक रहे बिहार के DGP

आलोक राज ने 30 अगस्त 2024 को बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) का पदभार संभाला था। तत्कालीन डीजीपी आरएस भट्टी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी मिली थी। हालांकि, उनका कार्यकाल लगभग 105 दिनों का रहा।

DGP बनने के बाद उन्होंने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए छह मूलमंत्र दिए थे, जिन्हें उन्होंने ‘6 स’ का सिद्धांत बताया। इसमें समय, सार्थकता, संवेदनशीलता, शक्तिशाली होना, सत्यनिष्ठा और स्पीडी ट्रायल शामिल थे।

उनका जोर पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम में सुधार, पीड़ितों के प्रति संवेदनशील व्यवहार, प्रभावी कार्रवाई और अपराधियों को जल्द सजा दिलाने पर था। DGP पद के बाद उन्होंने बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। 31 दिसंबर 2025 को वह पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए।

तीन बार राष्ट्रपति पदक से हो चुके हैं सम्मानित

आलोक राज का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से भूगर्भशास्त्र में एमएससी की पढ़ाई गोल्ड मेडल के साथ पूरी की।

पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। वर्ष 1994 में पुलिस वीरता पदक, 2008 में सराहनीय सेवा पदक और 2016 में विशिष्ट सेवा पदक से उन्हें नवाजा गया। वर्ष 2019 में उन्हें उत्कृष्ट पुलिस कार्यों के लिए अटल रत्न सम्मान भी मिला।

इसके अलावा उन्होंने इटली में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया था। बिहार पुलिस में विशेष शाखा, CID, विधि-व्यवस्था के ADG और बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर भी उन्होंने काम किया।

संगीत को मानते हैं व्यक्तित्व विकास का माध्यम

पुलिस सेवा के तनावपूर्ण माहौल के बीच संगीत ने आलोक राज को हमेशा सकारात्मक बनाए रखने में मदद की। उनका मानना है कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि इंसान के व्यक्तित्व को निखारने का प्रभावी माध्यम भी है।

उन्होंने बिहार दिवस, सोनपुर के हरिहरक्षेत्र महोत्सव, बोधगया के बौद्ध महोत्सव, राजगीर महोत्सव, पावापुरी महोत्सव और ताज महोत्सव जैसे कई बड़े आयोजनों में अपनी गायकी प्रस्तुत की है। आकाशवाणी, दूरदर्शन और DD उर्दू के कार्यक्रमों में भी उनकी आवाज सुनने को मिली है।

अब T-Series के नए भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ के जरिए आलोक राज अपनी संगीत यात्रा के एक और नए पड़ाव पर पहुंचे हैं। एक ओर जहां उनका पुलिस करियर अनुशासन, नेतृत्व और चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए याद किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर उनकी संगीत साधना यह बताती है कि व्यस्त पेशेवर जीवन के बीच भी अपने जुनून को जिंदा रखा जा सकता है। खाकी की जिम्मेदारियों से लेकर सुरों की साधना तक का उनका सफर निश्चित रूप से प्रेरणादायक है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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