वैश्विक राजनीति के गलियारों में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनावपूर्ण दौर एक बार फिर सुर्खियों में है। ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ तौर पर अमेरिका को संदेश दिया है कि अगर वह तेहरान के साथ कूटनीतिक स्तर पर आगे बढ़ना चाहता है, तो उसे अपनी पुरानी नीतियों, लहजे और नजरिए को बदलना होगा। पेजेशकियान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए एक समझौते की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है और क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ता दिख रहा है।
पाकिस्तानी आर्मी चीफ के साथ बैठक
तेहरान में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपनी बात रखी। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिकी विदेश नीति की आलोचना की। पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका की जिस परंपरा में वह दूसरे देशों पर दबाव बनाता है और अपनी मर्जी थोपता है, उससे प्रशासनिक और कूटनीतिक प्रक्रियाएं केवल और केवल जटिल होती हैं, इसका कोई हल नहीं निकलता।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। ईरानी राष्ट्रपति ने इस बात की उम्मीद जताई कि 18 जून को दोनों देशों के बीच हुए ‘शांति समझौता ज्ञापन’ के उद्देश्यों को आपसी सहयोग और ठोस इच्छाशक्ति के दम पर हासिल किया जा सकता है।
60 दिन की समय-सीमा खत्म, भविष्य अनिश्चित
गौरतलब है कि इस साल 18 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य 60 दिन के अंदर-अंदर वार्ता के जरिए एक स्थायी और अंतिम समझौते पर पहुंचना था। हालांकि, 17 अगस्त को इस 60 दिनों की समय-सीमा समाप्त हो गई।
चीन की समाचार एजेंसी शिनहुआ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय-सीमा के खत्म होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच पुराने तनाव एक बार फिर सिर उठाने लगे हैं। ऐसे में इस शांति समझौते का भविष्य अत्यधिक अनिश्चित नजर आ रहा है।
विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिका को घेरा
इधर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिका के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोमवार को तेहरान में आयोजित एक साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बघाई ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी ‘आक्रामक ताकत’ द्वारा थोपी गई शर्तों पर युद्ध या संघर्ष को खत्म नहीं होने देगा।
उन्होंने कहा कि हमारा इरादा कभी भी युद्ध शुरू करने का नहीं रहा है, लेकिन यह बिल्कुल भी संभव नहीं है कि हम उन लोगों की शर्तों को स्वीकार करें जिन्होंने आक्रमण किया है। बघाई ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपनी धरती और सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी कीमत पर प्रतिबद्ध है और वह आक्रामक पक्षों की अनुचित मांगों के आगे कभी नहीं झुकेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ‘मीडिया युद्ध’
अमेरिकी नौसेना और प्रशासन लगातार यह दावा करता रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से सुरक्षित और खुला है, जहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल बिना किसी रुकावट के गुजर रहा है। हालांकि, ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इन अमेरिकी दावों को पूरी तरह से नकार दिया।
उन्होंने अमेरिका के इस कथन को ‘मनोवैज्ञानिक और मीडिया युद्ध’ करार देते हुए कहा कि वास्तविकता कुछ और ही है। बघाई ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को एक खुली ‘आक्रामकता’ बताया। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे क्रूचियल चोकपॉइंट्स में से एक है, और यहां होने वाली किसी भी अड़चन का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का मुकाबला करने की तैयारी
प्रवक्ता ने अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए ताज़ा आर्थिक प्रतिबंधों की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ये प्रतिबंध मुक्त व्यापार और ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए एक बड़ा झटका हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने आत्मविश्वास जताया कि तेहरान इन प्रतिबंधों का सामना करने के लिए अपनी ‘बहुपक्षीय क्षमताओं’ का पूरा इस्तेमाल करेगा।
ईरानी प्रवक्ता ने उन देशों को भी चेतावनी दी है जो अमेरिका के इन अभियानों में उसका साथ दे रहे हैं। बघाई ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई राष्ट्र ईरान के खिलाफ अमेरिकी साजिशों और अभियानों में मदद करता है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

























