Maharashtra News: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ रेलवे स्टेशन के पश्चिमी क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो रियल एस्टेट में पुनर्विकास के नाम पर हो रही धोखाधड़ी और बिल्डरों की लापरवाही की पोल खोलता है। यहां के महाराष्ट्र हाउसिंग बोर्ड (एमएचबी) कॉलोनी के 192 फ्लैटधारकों ने एक ऐतिहासिक और दर्दनाक कदम उठाने का ऐलान किया है। घर बनने का इंतजार करते-करते थक चुके और आर्थिक तबाही का सामना कर रहे ये परिवार 6 जुलाई से उग्र भूख हड़ताल पर बैठने जा रहे हैं। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
कैसे शुरू हुआ था पुनर्विकास का सपना?
दरअसल, अंबरनाथ पश्चिम में स्थित इस पुरानी आवासीय कॉलोनी में बिल्डिंग नंबर 8, 9, 10, 11, 12 और 13 शामिल थीं। साल 2013 में, सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, यहां रहने वाले नागरिकों ने इन इमारतों के पुनर्विकास का ठेका ‘मेसर्स क्रिस्टल बालाजी सिटी बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी को सौंपा था। तब सभी परिवारों को यह विश्वास दिलाया गया था कि कुछ ही वर्षों में उन्हें नए और आधुनिक फ्लैट्स मिल जाएंगे। लेकिन आज 11 साल बाद भी यह सपना सपना ही बना हुआ है।
ठप पड़ा निर्माण और टूटे हुए वादे
बिल्डर ने शुरुआत में निर्माण कार्य की शुरुआत तो की, लेकिन कुछ समय बाद ही काम की रफ्तार धीमी होती चली गई और अंततः पूरी तरह से ठप हो गई। परिणामस्वरूप, सैकड़ों परिवार आज भी अपने नए घरों के लिए भटक रहे हैं। पुनर्विकास के नाम पर अपने पुराने घर खाली करने वाले ये लोग आज महज किराए के मकानों में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
आमतौर पर पुनर्विकास परियोजनाओं में बिल्डर द्वारा फ्लैटधारकों को जगह खाली करने के लिए ‘ट्रांजिट कैंप’ या किराए का भुगतान किया जाता है। शुरुआती कुछ साल तक कंपनी ने इन परिवारों को किराया दिया, लेकिन जून 2019 के बाद अचानक यह राशि बंद कर दी गई। पिछले पांच सालों से बिना किसी किराए के सहारे के, ये परिवार दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तो किराएदार की तरह दूसरों के घर में रहने की बेचैनी, दूसरा अपने खर्चे उठाने का आर्थिक बोझ।
बुजुर्गों और गरीबों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
इस संकट का सबसे ज्यादा प्रभाव उन परिवारों पर पड़ा है, जिनमें कमाने वाला कोई सदस्य नहीं बचा है या जो निम्न आय वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच किराए का बोझ झेलना उनके लिए नामुमकिन हो गया है। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिनकी पेंशन या बचत किराए के भुगतान में खत्म हो चुकी है और वो बीमारियों और भुखमरी के कगार पर खड़े हैं।
निवासियों का कहना है कि सबसे ज्यादा तकलीफ बिल्डर के ‘भूत बन जाने’ से है। ना तो डेवलपर किसी तरह की प्रगति के बारे में उन्हें जानकारी देता है, ना ही उनके फोन उठाता है। सालों से दिए जा रहे झूठे आश्वासनों ने लोगों में गहरा मानसिक तनाव पैदा कर दिया है। जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण स्थल पर पिछले कई महीनों से कोई काम नहीं हो रहा है।
प्रशासन को दिया ज्ञापन, 6 जुलाई की तारीख तय
अब सीमा पार होने के बाद 192 फ्लैटधारकों ने एकजुट होकर अंबरनाथ के नायब तहसीलदार दीपक अनारे को एक औपचारिक निवेदन सौंपा है। इस ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में बताया गया है कि कैसे वर्षों के इंतजार और किराए के बोझ ने उन्हें गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल दिया है। यदि प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप नहीं करती है, तो ये सभी परिवार 6 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे।






















