Maharashtra News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मराठा आरक्षण का मुद्दा तूल पकड़ता हुआ नजर आ रहा है। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे और कट्टरपंथी नेता मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार के खिलाफ अपना रुख और भी आक्रामक कर लिया है। उन्होंने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए घोषणा की है कि वे अपनी मांगों को लेकर 30 मई से जालना जिले के आंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे। यह ऐलान उस समय किया गया है, जब महाराष्ट्र में गर्मी अपने चरम पर है, जिससे इस आंदोलन की तीव्रता और बढ़ गई है।
चिलचिलाती धूप में ‘अंतिम और निर्णायक’ संघर्ष
मनोज जरांगे पाटिल का यह अनशन पिछले आंदोलनों से अलग होगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस बार वे छत के नीचे या आरामदायक माहौल में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे चिलचिलाती धूप में अनशन पर बैठेंगे। उनका यह कदम सरकार पर दबाव बनाने की एक कूटनीतिक चाल मानी जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने मराठा आरक्षण पर ठोस फैसला नहीं लिया, तो यह अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक आंदोलन साबित होगा।
जरांगे पाटिल ने अपने संबोधन में कहा कि अगर मैं हीटस्ट्रोक (लू) लगने से मर जाऊं तो मर जाऊं, लेकिन पीछे नहीं हटूंगा। उन्होंने सरकार को सीधी धमकी देते हुए कहा कि अगर उनके साथ कुछ भी अनहोनी होती है, तो इसके लिए पूरी तरह से राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। उनका कहना है कि जब तक मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं मिल जाता, वे चैन से नहीं बैठेंगे। इस बयान से साफ है कि वे अपनी मांगों को लेकर कोई समझौता नहीं करने वाले हैं।
कुनबी सर्टिफिकेट और हैदराबाद गजट पर मुख्य जोर
जरांगे पाटिल ने गुरुवार को आंतरवाली सराटी में एक सभा को संबोधित करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे में शामिल करने के लिए ‘हैदराबाद गजट’ को ठीक से लागू करना अनिवार्य है। उनकी मांग है कि मराठा समुदाय के सभी लोगों को बिना किसी रुकावट के एक बार में ‘कुनबी सर्टिफिकेट’ दिया जाए। यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुनबी ओबीसी श्रेणी में आता है, और अगर मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र मिल जाता है, तो वे आरक्षण का लाभ आसानी से उठा सकते हैं।
जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने मराठा समुदाय से बार-बार वादे किए हैं, लेकिन हकीकत में केवल समय बर्बाद किया है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल 29 अगस्त को उनके मुंबई दौरे के बाद सरकार को कई डेडलाइन दी गई थीं, लेकिन तब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। उनका कहना है कि सरकार की ओर से देरी करने की नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और शिंदे का बयान
इस बीच, मराठा आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार भी सक्रिय हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार मसले का हल निकालने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने हाल ही में जरांगे पाटिल से मुलाकात की है और सरकार की ओर से बातचीत का दरवाजा खुला है।
शिंदे ने कहा कि वे इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा करेंगे। उन्होंने अपनी पुरानी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अजीत पवार और देवेंद्र फडणवीस की मदद से मराठा समुदाय के हित में कई फैसले लिए थे। उन्होंने दावा किया कि पहले मराठा समुदाय को कुनबी सर्टिफिकेट देने में काफी दिक्कतें आती थीं, लेकिन उनकी सरकार ने लाखों कुनबी सर्टिफिकेट जारी किए हैं। इसके अलावा, सेवानिवृत्त जज शिंदे की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया गया है, जो इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
अब सबकी निगाहें 30 मई पर
महाराष्ट्र की सियासत में अब अगले कुछ दिन बेहद अहम होने वाले हैं। मनोज जरांगे पाटिल का अनशन और उनकी जान को खतरा बताकर दी गई चेतावनी ने सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। एक ओर जहां आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार किसी भी बड़ी अप्रिय घटना से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क है। 30 मई के बाद जालना का माहौल कैसा रहता है और सरकार किस तरह इस संकट का समाधान निकालती है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, मराठा आरक्षण का पिंजरा एक बार फिर गरमा चुका है और सरकार के लिए परीक्षा का समय आ गया है।
























