पुणे में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। आंदोलन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार छात्रों के साथ मौजूद हैं। इसी बीच मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल भी विद्यार्थियों से मिलने पहुंचे और उनकी मांगों का समर्थन किया।
छात्रों से बातचीत के दौरान जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि यदि विद्यार्थियों की बात नहीं सुनी गई, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर छात्रों के समर्थन में पूरा महाराष्ट्र बंद किया जाएगा। उनके इस बयान से आंदोलन और सरकार के बीच जारी तनाव को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
‘छात्रों की मांगें जाति से परे हैं’
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि विद्यार्थियों के साथ हुआ अन्याय किसी एक जाति या समुदाय का मुद्दा नहीं है। उन्होंने आंदोलन में शामिल होने के पीछे किसी जातीय राजनीति से इनकार करते हुए कहा कि वहां महाराष्ट्र के किसानों के बच्चे अपनी मांगों के लिए बैठे हैं। जरांगे ने कहा कि वह किसान के बेटे के तौर पर छात्रों का समर्थन करने आए हैं।
उन्होंने सरकार पर घमंड दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विद्यार्थियों की बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आंदोलन में शामिल छात्रों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है और उनकी मांगों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
मेहनतकश माता-पिता के सपनों का सवाल
जरांगे पाटिल ने कहा कि मेहनत-मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाने वाले माता-पिता की उम्मीद होती है कि उनके बेटे-बेटियां पढ़-लिखकर अधिकारी बनें। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर विद्यार्थियों की चिंताओं का समाधान करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण के मुद्दे पर उनका काम जारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह छात्रों की समस्याओं से मुंह मोड़ लेंगे।
उनके अनुसार, विद्यार्थियों की मांगों को राजनीतिक रंग देने के बजाय सरकार को यह समझना चाहिए कि आंदोलन में बैठे युवा अपने भविष्य और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब चाहते हैं।
रोहित पवार के नेतृत्व पर उठे सवालों का जवाब मांगा
आंदोलन में रोहित पवार की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी को रोहित पवार के राजनीतिक नेतृत्व पर आपत्ति है, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों के समर्थन में खड़े होने को राजनीति क्यों कहा जा रहा है।
उन्होंने पहले हुए उस आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसमें एमपीएससी से जुड़ी मांगों के तहत दो साल की अवधि बढ़ाने की बात उठी थी। जरांगे ने सवाल किया कि अगर वह आंदोलन राजनीतिक नहीं था, तो मौजूदा आंदोलन को राजनीतिक क्यों बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अनशन पर बैठे हैं और उनकी सेहत तथा समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है।
अनशन कर रहे छात्रों की स्थिति पर चिंता
जरांगे पाटिल ने अनशन कर रहे विद्यार्थियों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों की जान और उनकी मांगों की जिम्मेदारी कौन लेगा। उनके मुताबिक, सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद करना चाहिए और उनकी बात सुननी चाहिए, न कि हर विरोध प्रदर्शन को राजनीति से जोड़ देना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस मामले पर जवाब देना चाहिए। जरांगे ने यह भी कहा कि गृह मंत्री के तौर पर फडणवीस को विद्यार्थियों का विश्वास जीतने की कोशिश करनी चाहिए।
‘राजनीतिक दल नहीं, माता-पिता असली हीरो’
छात्रों के आंदोलन में अलग-अलग गुटों के मौजूद होने के सवाल पर जरांगे पाटिल ने विद्यार्थियों से राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना या कोई भी गठबंधन छात्रों का असली सहारा नहीं है। उनके अनुसार, विद्यार्थियों के असली हीरो उनके माता-पिता हैं, जो मेहनत करके उन्हें पढ़ाते हैं।
जरांगे ने कहा कि आंदोलन अलग-अलग जगह हो या एक स्थान पर, विद्यार्थियों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी आंदोलन स्थलों पर चल रही गतिविधियों पर ध्यान देने और छात्रों की मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। साथ ही विद्यार्थियों से एकजुट रहने को कहा।
सरकार से सभी आंदोलन स्थलों पर जाने की अपील
जब उनसे पूछा गया कि सरकार के मंत्री और विधायक एक आंदोलन स्थल पर जा रहे हैं, जबकि दूसरे स्थान पर सरकार का प्रतिनिधिमंडल नहीं पहुंचा, तो जरांगे ने कहा कि सरकार को सभी जगह जाकर छात्रों की राय सुननी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी गुट या आंदोलन स्थल को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल पुणे में एमपीएससी से जुड़ी मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और आयोग अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा शामिल है। जरांगे पाटिल की महाराष्ट्र बंद की चेतावनी के बाद अब सरकार की प्रतिक्रिया और छात्रों के साथ संभावित बातचीत पर नजर रहेगी।

























