मीरा-भाईंदर में पांच सोसायटियों से शुरू होगी नई पहल

Mira-Bhayandar News: प्रवीण दरेकर ने मीरा-भाईंदर में स्वयं पुनर्विकास को शहर के विकास के लिए अहम बताया। जानें पांच इमारतों से शुरुआत, फंडिंग और सोसायटियों के लिए प्रस्तावित मदद की जानकारी।

पांच इमारतों से बदलेगी मीरा-भाईंदर की तस्वीर

HIGHLIGHTS

  • पुनर्विकास के लिए मीरा-भाईंदर को मिलेंगी विशेष रियायतें
  • मुख्यमंत्री का संदेश: मीरा-भाईंदर के लिए करेंगे सब
  • 25 हजार करोड़ की मांग, पुनर्विकास को मिलेगी रफ्तार
  • स्वयं पुनर्विकास से रुकी इमारतों को मिलेगा नया जीवन

Mira-Bhayandar News: मीरा-भाईंदर में हाउसिंग सोसायटियों के स्वयं पुनर्विकास को बढ़ावा देने के लिए आयोजित शिविर में महाराष्ट्र गृहनिर्माण स्वयं/समूह पुनर्विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने इसे शहर के विकास के लिए दिशादर्शक पहल बताया। उन्होंने सोसायटियों से खुद अपनी इमारतें विकसित करने की अपील की और शुरुआती चरण में पांच इमारतों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनने का सुझाव दिया।

विधायक नरेंद्र मेहता की ओर से आयोजित शिविर में महापौर डिंपल मेहता, उपमहापौर ध्रुवकिशोर पाटील, जिला अध्यक्ष दिलीप जैन, नगररचना विभाग के सहायक संचालक पुरुषोत्तम शिंदे, अपर तहसीलदार निलेश गौड, मुंबई बैंक के वरिष्ठ अधिकारी कृष्णा पोटे और स्वयं पुनर्विकास प्राधिकरण के अधिकारी सुदेश रोझेकर सहित जनप्रतिनिधि और हाउसिंग सोसायटियों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

पुनर्विकास में सोसायटी के पास रहेंगे फैसले

दरेकर ने कहा कि घर आम लोगों की जिंदगी की सबसे बड़ी कमाई और सपना होता है। कई बार डेवलपर के जरिए होने वाला पुनर्विकास वर्षों तक अटका रहता है। स्वयं पुनर्विकास में सोसायटी के सदस्य खुद निर्णय लेते हैं—आर्किटेक्ट कौन होगा, इमारत का डिजाइन कैसा होगा और ठेकेदार किसे नियुक्त किया जाएगा। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में सदस्य अपनी संपत्ति के मालिक बने रहते हैं और परियोजना पर उनका सीधा नियंत्रण होता है।

दरेकर ने कहा कि स्वयं पुनर्विकास को आगे बढ़ाने के लिए दो बड़ी जरूरतें हैं—वित्तीय सहायता और मंजूरियों की प्रक्रिया में सहयोग। मुंबई जिला बैंक ने हाउसिंग सोसायटियों को कर्ज देने की नीति शुरू की थी। उन्होंने बताया कि इस पहल के शुरुआती अनुभवों के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर स्वयं पुनर्विकास के लिए रियायतों की मांग की गई। गोरेगांव के नेस्को में हाउसिंग सोसायटियों की परिषद के दौरान रखी गई 20 मांगों में से 18 को मंजूरी मिली और इस संबंध में शासनादेश भी जारी हुए।

मुंबई में 21 इमारतें पूरी होने का दावा

दरेकर के अनुसार, मुंबई में करीब 1,600 इमारतें स्वयं पुनर्विकास की प्रक्रिया में हैं और 46 इमारतों को कर्ज दिया गया है। इनमें से 21 इमारतों का निर्माण पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में लोगों को पहले से बड़े घर मिले और काम लगभग ढाई से तीन साल में पूरा हुआ। सरकार के फैसले के मुताबिक, स्वयं पुनर्विकास की इमारत तीन साल में तैयार की जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वयं पुनर्विकास की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए उनके नेतृत्व में एक समिति बनाई थी। समिति ने तीन महीने तक राज्य का दौरा कर रिपोर्ट तैयार की, जिसे सरकार ने स्वीकार किया। दरेकर के मुताबिक, पुणे, ठाणे और नवी मुंबई में भी ऐसी परियोजनाएं शुरू हुई हैं और यह पहल धीरे-धीरे मुंबई महानगर क्षेत्र के दूसरे हिस्सों तक पहुंच रही है।

फंडिंग और रियायतों पर सरकार से चर्चा

दरेकर ने कहा कि स्वयं पुनर्विकास में सोसायटियों को वित्तीय मदद उपलब्ध कराना अहम है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्य सहकारी बैंक को इस उद्देश्य के लिए 10,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने को कहा है, जबकि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एनसीडीसी के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। दरेकर ने यह भी कहा कि बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त 25,000 करोड़ रुपये की जरूरत हो सकती है और इस संबंध में सरकार से कार्ययोजना बनाने का अनुरोध किया गया है।

स्वयं पुनर्विकास में चार प्रतिशत ब्याज प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव सरकार के पास लंबित है। दरेकर ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यमवर्गीय परिवार नियमित रूप से कर देते हैं, इसलिए पुनर्विकास के दौरान उन्हें उचित रियायतें और राहत मिलनी चाहिए।

पांच इमारतों से शुरुआत का प्रस्ताव

मीरा-भाईंदर में इस पहल को जमीन पर उतारने के लिए दरेकर ने नरेंद्र मेहता से शुरुआती तौर पर पांच इमारतें चुनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए बैठक कर कार्ययोजना बनाई जा सकती है। सफल उदाहरण सामने आने पर अधिक सोसायटियों का भरोसा बढ़ेगा और वे भी स्वयं पुनर्विकास के लिए आगे आएंगी।

दरेकर ने कहा कि शहर की स्थानीय जरूरतों और मंजूरियों से जुड़ी दिक्कतों की जानकारी प्राधिकरण को दी जाए। जरूरत पड़ने पर मीरा-भाईंदर के लिए विशेष रियायतों की मांग सरकार के सामने रखी जाएगी। उन्होंने सोसायटियों, बैंकों और सरकार से मिलकर इस पहल को आगे बढ़ाने की अपील की।

शिविर में दरेकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का संदेश भी साझा किया। उनके मुताबिक, शिविर में लोगों की मौजूदगी की तस्वीर मुख्यमंत्री को भेजने के बाद उनका जवाब आया—“ओके, आगे बढ़िए… मीरा-भाईंदरवासियों के लिए हम सब करेंगे।”

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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