भाईंदर विद्यार्थियों में विज्ञान विषय के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें पाठ्यपुस्तकों के साथ प्रयोगों के जरिए सीखने का अवसर देने के उद्देश्य से परोपकार मुंबई सामाजिक संस्था ने भाईंदर सेकंडरी स्कूल को विज्ञान प्रयोगशाला की सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराए। इस पहल से कक्षा 5वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों को विज्ञान के सिद्धांतों को समझने और उन्हें प्रयोगों के माध्यम से परखने में मदद मिलेगी।
स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संस्था के प्रतिनिधियों ने विज्ञान प्रयोगों के लिए आवश्यक सामग्री और उपकरण विद्यालय को सौंपे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह सामग्री सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को स्कूल को दी गई। इस सहयोग से विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से समझने का मौका मिलेगा।
विज्ञान सीखने में प्रयोगों की अहम भूमिका
विज्ञान की पढ़ाई में सिद्धांतों के साथ प्रायोगिक अनुभव भी महत्वपूर्ण होता है। जब विद्यार्थी किसी अवधारणा को स्वयं प्रयोग करके देखते हैं, तो उसे समझना और लंबे समय तक याद रखना आसान हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्कूल के विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशाला सामग्री की आवश्यकता रखी गई थी।
संस्था के अध्यक्ष श्री अजित पाटील ने कक्षा 5वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान प्रयोगों में उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध परोपकार संस्था के ट्रस्टी श्री मदनलाल भुतडा से किया था। अनुरोध पर संस्था की ओर से स्कूल को आवश्यक सामग्री और उपकरण दिए गए।
विद्यालय में विज्ञान प्रयोगशाला के लिए उपलब्ध यह सहयोग विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में शामिल विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने में सहायक होगा। प्रयोग करते समय विद्यार्थी सवाल पूछने, अवलोकन करने और परिणामों पर विचार करने की आदत विकसित कर सकते हैं। इससे विज्ञान विषय के प्रति उनकी जिज्ञासा और आत्मविश्वास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
विद्यार्थियों को मिलेगा सीखने का व्यावहारिक अवसर
स्कूल में दी गई सामग्री का उपयोग विद्यार्थियों को विभिन्न विज्ञान प्रयोगों से परिचित कराने के लिए किया जाएगा। शिक्षक कक्षा में पढ़ाए गए सिद्धांतों को प्रयोगों से जोड़कर समझा सकेंगे। इस तरह विद्यार्थियों को यह देखने का अवसर मिलेगा कि किताबों में दिए गए वैज्ञानिक विचार वास्तविक गतिविधियों में किस प्रकार लागू होते हैं।
प्रायोगिक शिक्षा से विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। प्रयोगों के दौरान वे उपकरणों का उपयोग करना, निर्देशों का पालन करना और परिणामों का निरीक्षण करना सीखते हैं। ये अनुभव विज्ञान की बुनियादी समझ को मजबूत करने के साथ-साथ आगे की पढ़ाई के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों के लिए विज्ञान शिक्षा को अधिक अनुभव-आधारित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि विज्ञान को केवल याद करने के बजाय प्रयोगों के माध्यम से समझना जरूरी है। उपलब्ध कराई गई सामग्री विद्यार्थियों को कक्षा में सीखे गए सिद्धांतों को स्वयं करके देखने का अवसर देगी।
कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित
सामग्री सौंपने के अवसर पर परोपकार मुंबई के अध्यक्ष श्री अजित पाटील, संस्था के ट्रस्टी श्री मदनलाल भुतडा, श्री बाबूलाल तोषणीवाल, श्री रमेश भुतडा और मोदी स्टील के मालिक श्री मोदी उपस्थित थे। इसके अलावा स्कूल के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
विद्यालय समुदाय ने इस सहयोग का स्वागत किया। विज्ञान प्रयोगशाला की सामग्री मिलने से विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल रहा। अभिभावकों ने भी इस पहल पर संतोष व्यक्त करते हुए परोपकार संस्था के प्रति आभार जताया।
शिक्षा में सामाजिक संस्थाओं का सहयोग
स्कूलों में प्रयोगशाला सामग्री और शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता विद्यार्थियों को सीखने के अधिक अवसर दे सकती है। भाईंदर सेकंडरी स्कूल के लिए परोपकार मुंबई की यह पहल इसी दिशा में एक सहयोग के रूप में देखी जा रही है। इससे विद्यार्थियों को विज्ञान विषय में सक्रिय रूप से भाग लेने और प्रयोगों के जरिए अवधारणाएं समझने में मदद मिलेगी।
स्कूल और अभिभावकों को उम्मीद है कि इस सामग्री का उपयोग नियमित रूप से शिक्षण प्रक्रिया में किया जाएगा। विद्यार्थियों को विज्ञान के सिद्धांतों का प्रायोगिक अनुभव मिलने से उनकी विषयगत समझ बेहतर हो सकती है। साथ ही, विज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासा को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
भाईंदर सेकंडरी स्कूल को विज्ञान प्रयोगशाला सामग्री उपलब्ध कराने के लिए विद्यार्थियों और अभिभावकों ने परोपकार मुंबई संस्था का धन्यवाद किया। इस सहयोग से स्कूल में विज्ञान की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और सहभागितापूर्ण बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

























