दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर मैदान से आज शनिवार सुबह एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे देश की राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। लद्दाख के प्रख्यात पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने उनके धरना स्थल से जबरदस्ती उठाया और उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प होने की खबरें भी सामने आईं। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया सबसे सुर्खियों में रही है।
आदित्य ठाकरे ने उठाए सवाल
बता दें कि सोनम वांगचुक के समर्थन में सोशल मीडिया पर अभियान चलाने वाले और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा गिरफ्तारी की जानकारी ट्वीट करने के बाद, आदित्य ठाकरे ने तत्काल उस पोस्ट को री-शेयर किया। आदित्य ठाकरे ने अपनी प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर जमकर निशाना साधा है।
आदित्य ठाकरे ने लिखा है कि यह कितनी शर्मनाक बात है! पूरी दुनिया यह देख रही है कि भारत में लोकतंत्र को बेशर्मी के साथ कैसे बलपूर्वक कुचला जा रहा है। आज के भारत में एक अयोग्य मंत्री के खिलाफ युवाओं और छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध भी सत्ता को बर्दाश्त नहीं हो रहा। जिस तरह से अनशनकारियों को जबरदस्ती हटाया गया, वह लोकतांत्रिक अधिकारों का घोर अपमान है।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ?
दरअसल, पिछले 20 दिनों से सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे और आज शनिवार की सुबह जब उनका स्वास्थ्य बिगड़ता दिखा, तब दिल्ली पुलिस का एक बड़ा दल वहां पहुंचा। पुलिस ने वांगचुक को उनके टेंट से बाहर निकाला और एम्बुलेंस में भरकर एक निजी अस्पताल ले जाना शुरू किया। इस दौरान वहां मौजूद अन्य समर्थकों और कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रोकने की कोशिश की, जिसके बाद मौके पर भगदड़ मच गई और पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
What a shame!
The world watches democracy in India being broken by force, shamelessly.
Even peaceful protests for students against an incompetent minister are not tolerated anymore. https://t.co/jL4WSuhsLK
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) July 18, 2026
अभिजीत दिपके हिरासत और लाठीचार्ज के आरोप
बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दिपके ने खुद सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी और पुलिस पर जमकर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और बिना किसी नोटिस के उन्हें हिरासत में ले लिया।
वहीं, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाते समय पुलिस ने बिना उकसावे के छात्रों पर लाठीचार्ज किया। उन्होंने बताया कि कई छात्र इस दौरान चोटिल भी हुए हैं, हालांकि इन दावों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
दिल्ली पुलिस का पक्ष – हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
विपक्ष के आरोपों के बाद जब दिल्ली पुलिस बैकफुट पर आ गई, तो उसने अपना पक्ष रखा। दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) सचिन शर्मा ने मीडिया को बताया कि सोनम वांगचुक की जान खतरे में है और दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त निर्देशानुसार उन्हें मेडिकल सुपरविजन के तहत अस्पताल शिफ्ट किया गया है।
डीसीपी ने बताया कि जब पुलिस टीम हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए वांगचुक को ले जा रही थी, तब कुछ कार्यकर्ताओं ने एम्बुलेंस का रास्ता रोक दिया और बाधा डालने लगे। उन्होंने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया, ताकि एक गंभीर मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके।
संसद मार्च से पहले साजिश के सवाल?
राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई का समय बेहद संदेहास्पद है। दरअसल, 20 जुलाई को यानी सोमवार को संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इसी दिन CJP और सोनम वांगचुक के समर्थकों ने दिल्ली में एक विशाल ‘संसद मार्च’ निकालने की योजना बनाई थी।
सोनम वांगचुक ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर लोगों से इस मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार संसद मार्च को सफल नहीं होने देना चाहती थी? क्या मार्च से exactly 48 घंटे पहले आंदोलन के चेहरे को हटाकर पीछे हटने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की कोशिश की गई?
लगातार 20 दिनों के अनिश्चितकालीन अनशन ने सोनम वांगचुक के शरीर को काफी कमजोर कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, इस भूख हड़ताल के चलते उनका वजन 9 किलोग्राम से भी ज्यादा कम हो चुका है और उनके आंतरिक अंगों पर भी इसका गंभीर असर पड़ने लगा था।
अब सवाल यह है कि अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक के बिना क्या 20 जुलाई को संसद मार्च की ताकत वही रहेगी? और क्या विपक्ष इस मुद्दे को मानसून सत्र में सरकार के खिलाफ एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर पाएगा? ये सवाल अगले कुछ दिनों में दिल्ली की सियासत को गरमा देंगे।

























