Noida News: पुलिस आयुक्त गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह के कुशल नेतृत्व और कड़े निर्देशों के अंतर्गत, जनपद में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व जन-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, उप पुलिस आयुक्त (डीसीपी) एवं सहायक पुलिस आयुक्त (एडीसीपी) सेंट्रल नोएडा के पर्यवेक्षण में, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी)-1 सेंट्रल नोएडा दीक्षा सिंह द्वारा थाना फेस-3 का व्यापक एवं विस्तृत त्रैमासिक निरीक्षण किया गया।
यह निरीक्षण केवल औपचारिकता भर नहीं, बल्कि थाने की कार्यप्रणाली में यदि कोई कमी रह गई हो तो उसे दूर करने और पुलिसकर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाने का एक माध्यम था। एसीपी दीक्षा सिंह ने थाने के हर कोने का मुआयना किया और वहां व्याप्त व्यवस्था का बारीकी से आकलन किया।
थाना परिसर का विस्तृत निरीक्षण
एसीपी दीक्षा सिंह ने अपने निरीक्षण अभियान की शुरुआत थाना कार्यालय से की। उन्होंने कार्यालय में बैठे कर्मचारियों की कार्यप्रणाली देखी और आगंतुकों के साथ उनके व्यवहार पर भी नजर रखी। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर कक्ष का निरीक्षण किया, जहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपराध रिकॉर्ड और आपराधिक सूचनाओं को संधारित किया जाता है। उन्होंने कंप्यूटर ऑपरेटरों को निर्देश दिए कि डेटा एंट्री में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए साइबर हेल्प डेस्क का निरीक्षण काफी महत्वपूर्ण माना गया। एसीपी ने वहां मौजूद कर्मियों से बातचीत कर यह जाना कि क्या पीड़ितों को सही समय पर सहायता मिल रही है या नहीं। इसके अलावा डाक कार्यशाला (मेल रूम) का भी जायजा लिया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विभागीय पत्राचार में कोई देरी न हो और कोई भी महत्वपूर्ण संदेश या शिकायत अनदेखी न हो।
सुरक्षा व्यवस्था और संसाधनों की समीक्षा
थाने की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसीपी ने हवालात का गहन निरीक्षण किया और उन्होंने हवालात की साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और वहां निरुद्ध बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था को चेक किया। उन्होंने हवालात में बंदियों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, साथ ही यह भी पुष्टि की कि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से हवालात में न रखा गया हो।
पुलिसकर्मियों के रहन-सहन की व्यवस्था को देखते हुए उन्होंने थाना मेस का निरीक्षण किया। उन्होंने मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को चेक किया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी जब तंदुरुस्त रहेंगे, तभी वे बेहतर ढंग से अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर पाएंगे। इसके अलावा थाना बैरक का भी निरीक्षण किया गया, जहां पुलिसकर्मी आराम करते हैं। बैरक में साफ-सफाई और बिस्तरों की व्यवस्था पर जोर दिया गया।
दस्तावेजीकरण और रजिस्टरों की जांच
किसी भी थाने की कार्यप्रणाली की सबसे अहम कड़ी रजिस्टरों का रख-रखाव होता है। एसीपी दीक्षा सिंह ने थाना कार्यालय में उपलब्ध सभी रजिस्टरों की गहनता से जांच की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी रजिस्टर पूर्ण, सही और नवीनतम सूचनाओं के साथ अद्यतन होने चाहिए। आपराधिक मामलों, गिरफ्तारियों, वसूली और अन्य आंकड़ों की एंट्री में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं होनी चाहिए। उन्होंने रिकॉर्ड कीपिंग में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
निरीक्षण के दौरान एसीपी ने मालखाना की स्थिति की समीक्षा की। मालखाने में लंबित पड़े माल (बरामदगी) का निस्तारण एक महत्वपूर्ण मुद्दा था। उन्होंने थाना प्रभारी और हेड मोहर्रिर को स्पष्ट निर्देश दिए कि मालखाने में पड़े उन मामलों के माल का शीघ्र ही निस्तारण कराया जाए, जिनकी कानूनी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। अनावश्यक रूप से माल लंबित रखना विभागीय कार्यप्रणाली के लिए उचित नहीं है।

विवेचना की गुणवत्ता आम जनता के विश्वास पर आधारित होती है। एसीपी ने सभी विवेचकों को निर्देशित किया कि वे अपने हाथ में लंबित पड़ी विवेचनाओं को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों का जल्द से जल्द समापन किया जाए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों में भय बना रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आईजीआरएस और जन शिकायतों की गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था
आईजीआरएस (IGRS) और अन्य ऑनलाइन शिकायत पोर्टल्स आम जनता की समस्याओं को लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। एसीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईजीआरएस पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का न केवल शीघ्र निस्तारण किया जाए, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी उत्कृष्ट हो। शिकायतों का समयबद्ध और संतोषजनक समाधान ही पुलिस की जवाबदेही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जानी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान महिला हेल्प डेस्क का मुआयना विशेष रूप से किया गया। महिला सुरक्षा और सम्मान पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। एसीपी दीक्षा सिंह ने महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि थाने में आने वाली किसी भी पीड़ित महिला के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।
उन्होंने हेल्प डेस्क पर नियुक्त पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि पीड़ित को अविलंब सहायता प्रदान की जाए। किसी भी महिला को थाने के चक्कर नहीं काटने पड़ने चाहिए। प्रतिदिन प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों को तत्काल रजिस्टर में अंकित किया जाए और उनका गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से संबंधित अपराधों में किसी भी प्रकार की संवेदनहीनता दिखाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।






















