अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक ऐसा ऐतिहासिक संबोधन दिया, जिसमें देशभक्ति की भावना और दलगत राजनीति का एक अनूठा मिश्रण देखने को मिला। वाशिंगटन डीसी स्थित प्रतिष्ठित ‘नेशनल मॉल’ से दिए गए इस भाषण ने अमेरिकी राजनीति में एक नए बहस का दरवाजा खोल दिया है, क्योंकि एक ऐसे मौके पर जहां आमतौर पर देश को एक सूत्र में बांधने की अपील की जाती है, वहीं ट्रंप ने अपनी राजनीतिक मंशाओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
तूफान की चुनौती और नेशनल मॉल पर ट्रंप का डटे रहना
इस साल का स्वतंत्रता दिवस समारोह प्रकृति की प्रचंड चुनौतियों से घिरा रहा। खराब मौसम और तूफान की आशंका के मद्देनजर प्रशासन ने शनिवार शाम को नेशनल मॉल को खाली कराने का आदेश दिया था। हालांकि, ट्रंप ने साबित किया कि प्राकृतिक बाधाएं उनके इरादों को नहीं रोक सकतीं। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह चाहे मौसम कैसा भी हो, निर्धारित स्थान से ही अपना संबोधन देंगे। इस निर्णय ने उनके समर्थकों में एक अलग ही जोश भर दिया और उन्हें एक मजबूत और अड़िग नेता के रूप में पेश किया।

अपने संबोधन की शुरुआत में ट्रंप ने इस अवसर को “अब तक के सबसे उल्लासपूर्ण और गौरवशाली पड़ावों में से एक” करार दिया। अमेरिकी इतिहास में 250 साल का सफर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रंप ने इस मौके पर द्वितीय विश्व युद्ध के कई पूर्व सैनिकों सहित अन्य पूर्व सैन्यकर्मियों को सम्मानित किया। उनके हाथों सम्मान पत्र दिलाने का यह दृश्य काफी भावुक रहा और इसने अमेरिकी सशस्त्र बलों के प्रति ट्रंप प्रशासन के प्रतिबद्धता को दर्शाया।
देशभक्ति के नाम पर दलगत राजनीति
हालांकि, इस समारोह की सबसे बड़ी बात यह रही कि ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की परंपरा को तोड़ते हुए स्वतंत्रता दिवस के मंच का इस्तेमाल दलगत राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए किया। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति 4 जुलाई के अवसर पर देशवासियों से एकजुट होने और भेदभाव भूलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील करते हैं। लेकिन ट्रंप ने इस परंपरा को एक तरह से दरकिनार कर दिया।
उन्होंने अपने भाषण में चुनाव संबंधी विवादित विधेयक ‘सेव अमेरिका अधिनियम’ के प्रति एक बार फिर से अपना पूर्ण समर्थन दोहराया। यह विधेयक अमेरिकी राजनीति में काफी चर्चित रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस विधेयक को संसद (कांग्रेस) में ट्रंप की ही पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी के कई बड़े नेताओं और सदस्यों का विरोध सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मंच से इस विधेयक को लेकर बोलना, अपनी ही पार्टी के विरोधियों को एक सीधा संदेश माना जा रहा है।
दूसरे संशोधन और हथियारों के अधिकार पर जोर
ट्रंप के संबोधन का एक और प्रमुख पहलू अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन पर उनका जोरदार पक्ष रखना था। यह संशोधन अमेरिकी नागरिकों को हथियार रखने के अधिकार की गारंटी देता है। अमेरिका में बंदूकवाद (Gun Rights) को लेकर लंबे समय से एक गहरा राजनीतिक और सामाजिक विभाजन है।
डेमोक्रेटिक पार्टी इसमें संशोधन और सख्त कानून चाहती है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी और विशेषकर ट्रंप इस अधिकार को किसी भी कीमत पर बरकरार रखने के पक्षधर हैं। स्वतंत्रता दिवस पर इस मुद्दे को उठाकर ट्रंप ने अपने पारंपरिक और रूढ़िवादी मतदाताओं को एक बार फिर साधने की कोशिश की।
अपने भाषण के अंत में ट्रंप ने अपने अहंकारी और आत्मविश्वास से भरपूर अंदाज में कहा, “हम हमेशा शीर्ष पर रहेंगे। हम अपने देश को कभी गिरने नहीं देंगे। हम हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहेंगे।” यह वाक्य उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) के दर्शन को पूरी तरह से दर्शाता है।






















