Delhi News: दिल्ली जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना-प्रदर्शन शुक्रवार को 14वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन में शामिल छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल भी पांचवें दिन में पहुंच गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
जंतर-मंतर पर बढ़ी पुलिस की मौजूदगी
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि गुरुवार देर रात जंतर-मंतर और उसके आसपास पुलिस बल की संख्या अचानक बढ़ा दी गई। उनके अनुसार, अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती से यह संदेश मिल रहा है कि प्रशासन आंदोलन को नियंत्रित करने या उस पर सख्ती बरतने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि, इस संबंध में प्रशासन या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस बल बढ़ाने के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती से उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
आंदोलनकारियों ने सरकार से बातचीत की मांग दोहराई
धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को आंदोलन को नजर अंदाज करने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकार छात्रों और युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुने तो विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप है कि उनकी मांगों पर अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। उनका मानना है कि प्रशासनिक दबाव बनाकर आंदोलन को खत्म करने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
पांचवें दिन भी जारी रही सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार पांचवें दिन भी भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भी धरना स्थल पर मौजूद हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार, वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित मेडिकल जांच की जा रही है और डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
समर्थकों का कहना है कि भूख हड़ताल का उद्देश्य सरकार का ध्यान छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने अपील की है कि सरकार आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय जल्द से जल्द बातचीत शुरू करे।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बनी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा
धरना प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग एक बार फिर जोर-शोर से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार ने अपेक्षित कदम नहीं उठाए हैं।
आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि शिक्षा से जुड़े कई सवाल लंबे समय से अनसुलझे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय आंदोलन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कई छात्रों की तबीयत बिगड़ी
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के पांचवें दिन कुछ छात्रों की तबीयत खराब होने की भी जानकारी सामने आई है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, कई छात्रों का ब्लड शुगर स्तर सामान्य से काफी कम दर्ज किया गया है। इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि उनका हौसला कमजोर नहीं हुआ है और वे अपनी मांगों को लेकर डटे रहेंगे।
धरना स्थल पर मौजूद स्वयंसेवक और मेडिकल टीम लगातार प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं। बारिश और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद प्रदर्शन जारी रखा गया।
सीपीआई(एमएल) महासचिव ने जताया समर्थन
शुक्रवार को सीपीआई (एमएल) के महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य भी जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने सोनम वांगचुक और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात की तथा आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने सरकार से भी अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुने और समाधान की दिशा में पहल करे।
प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट संदेश
आंदोलन में शामिल छात्रों और समर्थकों ने दोहराया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित अन्य मुद्दों पर सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।






















