भारतीय बाजार आज तेजी के साथ खुले, क्या आगे और बढ़त होगी?

बृहस्पतिवार को भारतीय बाजारों की शुरुआत शानदार रही। बीएसई का सेंसेक्स 558 अंकों की बढ़त के साथ 77,468 के स्तर पर खुला। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों ने रातोंरात सकारात्मक प्रदर्शन किया था, जो भारतीय बाजार के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।

वॉल स्ट्रीट रिकवरी के बाद भारतीय बाजार में उम्मीदें बढ़ीं

HIGHLIGHTS

  • एशियाई बाजारों में तेजी, भारतीय शेयरों को मिले सकारात्मक संकेत
  • कच्चे तेल की कीमतें स्थिर, क्या इससे बाजार को फायदा मिलेगा?
  • गुरुवार को बाजार की शुरुआत: गिरावट या तेजी की संभावना?
  • अमेरिकी बाजार की रिकवरी से भारतीय बाजार में नई उम्मीदें

गुजरते सप्ताह में बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की आशंकाएं थी कि कहीं गिरावट का सिलसिला शुरु न हो जाए। हालांकि, वैश्विक संकेतों और आर्थिक आंकड़ों में सकारात्मक रुख के चलते भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने ही शुरुआती कारोबार में अच्छी तेजी का प्रदर्शन किया, जिससे निवेशकों में उम्मीदें फिर से जागरूक हुईं। इस लेख में हम आपको बाजार की वर्तमान स्थिति, ग्लोबल संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और प्रमुख सूचकांकों के संकेतों का विश्लेषण विस्तार से प्रस्तुत कर रहे हैं।

भारतीय बाजार की शुरूआत

बृहस्पतिवार को भारतीय बाजारों की शुरुआत शानदार रही। बीएसई का सेंसेक्स 558 अंकों की बढ़त के साथ 77,468 के स्तर पर खुला। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों ने रातोंरात सकारात्मक प्रदर्शन किया था, जो भारतीय बाजार के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। वहीं, एनएसई का निफ्टी 147 अंक ऊपर चढ़कर 24,225 के स्तर पर खुला। ये आंकड़े दिखाते हैं कि वैश्विक सकारात्मकता भारतीय बाजार में भी साकार हो रही है, और निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रभाव

ग्लोबल संकेतों का भारतीय बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ा है। वॉल स्ट्रीट पर बुधवार को रातोंरात राहत की खबरें आईं, जिससे अमेरिकी बाजारों में तेजी देखने को मिली। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में लगभग 0.1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई। डॉऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज भी 19 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। यह सूचनाएं दर्शाती हैं कि अमेरिकी बाजार में रिकवरी का संकेत है, जो भारतीय बाजार के लिए भी सकारात्मक संकेत है।

एशियाई बाजारों का प्रदर्शन

एशियाई बाजारों की बात करें तो गुरुवार को अधिकांश बाजारों में बढ़त देखी गई। MSCI का एशिया-प्रशांत इंडेक्स 0.8% तक चढ़ गया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.95% तक ऊपर गया, जबकि टॉपिक्स सूचकांक 0.80% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। हांगकांग का हैंग सेंग फ्यूचर्स भी लगभग 0.9% की वृद्धि का संकेत दे रहा है। इन संकेतकों से पता चलता है कि एशियाई बाजार भी वैश्विक सुधार के साथ आगे बढ़ रहे हैं, और निवेशकों का भरोसा मजबूत हो रहा है।

निफ्टी फ्यूचर्स और घरेलू संकेत

हालांकि, गुरुवार को निफ्टी फ्यूचर्स 24,202.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले व्यापार बंद भाव से लगभग 84 अंक नीचे था। यह संकेत घरेलू बाजार की शुरुआत नकारात्मक हो सकती है, लेकिन वैश्विक संकेतों के मद्देनजर यह उतार-चढ़ाव तय माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत मजबूत रहते हैं, तो भारतीय बाजार भी जल्दी ही रिकवरी की ओर बढ़ सकते हैं।

वॉल स्ट्रीट का प्रदर्शन और भारतीय बाजार

वॉल स्ट्रीट पर बुधवार को रातोंरात राहत की खबरें आईं, जिससे अमेरिकी सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.1% की मामूली बढ़त, नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.3% और डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में 19 अंक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। यह संकेत है कि अमेरिकी बाजार में स्थिरता और रिकवरी की उम्मीदें मजबूत हैं, जो भारतीय निवेशकों के लिए भी उत्साहवर्धक हैं।

कच्चे तेल की कीमतें: स्थिरता और बढ़त

तेल की कीमतों में गुरुवार को स्थिरता बनी रही। शुरुआती एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा 0.3% की बढ़ोतरी के साथ 91.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.2% की बढ़त के साथ 85.81 डॉलर पर रहा। अक्टूबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 14 सेंट बढ़कर 84.53 डॉलर पर पहुंच गया। इस महीने तेल की कीमतें लगातार चौथे सत्र में बढ़ रही हैं, जो 24 जुलाई के बाद अपने उच्चतम स्तर पर बंद हुई हैं। तेल की कीमतों में स्थिरता और बढ़त से वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का संकेत मिलता है, जो बाजार के लिए सकारात्मक है।

समापन की उम्मीदें और निवेशकों के लिए सुझाव

गुरुवार को बाजार की शुरुआत उम्मीद के अनुरूप हो सकती है, लेकिन वैश्विक संकेतों और अमेरिकी बाजार की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। यदि वैश्विक स्तर पर सकारात्मक रुख बना रहता है, तो भारतीय बाजार भी जल्द ही मजबूत रिकवरी की दिशा में बढ़ सकते हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं और बाजार में उतार-चढ़ाव को समझदारी से देखें। साथ ही, तेल और डॉलर जैसी प्रमुख वस्तुओं पर भी नजर रखना जरूरी है, क्योंकि ये भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Sandhya Samay News

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