संदीप कुमार गर्ग
नोएडा। कैंसर को आमतौर पर बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन बदलती परिस्थितियों में यह धारणा अब पूरी तरह सही नहीं रह गई है। युवाओं में कैंसर के मामले भी चिंता बढ़ा रहे हैं। JAMA Network में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, हाल के वर्षों में युवा वयस्कों में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 50 साल से कम उम्र के लोगों में कैंसर की बढ़ती दर को लेकर विशेषज्ञ लगातार जागरूकता और समय पर जांच की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।
इसी दिशा में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से Fortis Hospital, Noida ने अस्पताल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान डॉक्टरों ने उन युवा मरीजों की कहानियां साझा कीं, जिन्होंने कैंसर के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ी और समय पर कैंसर का निदान और सही उपचार मिलने के बाद अब स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
8 साल के बच्चे को हुआ हॉजकिन्स लिंफोमा
Fortis Noida के डॉक्टरों ने सबसे पहले 8 साल के एक बच्चे का मामला साझा किया। बच्चे को तेज बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान पता चला कि वह हॉजकिन्स लिंफोमा, एक प्रकार के ब्लड कैंसर, से पीड़ित था। इसके साथ ही फंगल सेप्सिस के कारण उसकी स्थिति और जटिल हो गई थी।
डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर उपचार नहीं मिलने की स्थिति में यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती थी। मेडिकल टीम ने आवश्यक देखभाल के साथ बच्चे की कीमोथेरेपी शुरू की। उपचार के बाद अब बच्चा स्वस्थ है और उसने दोबारा स्कूल जाना भी शुरू कर दिया है।
32 साल की महिला को मिला ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी का विकल्प
दूसरा मामला 32 साल की महिला का है, जिन्हें स्तन में गांठ की शिकायत थी। जांच के बाद उनमें ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई। उन्हें एक सरकारी अस्पताल में मैस्टेक्टॉमी यानी स्तन हटाने की सलाह दी गई थी।
इसके बाद मरीज ने सेकेंड ओपिनियन के लिए Fortis Noida के डॉक्टरों से संपर्क किया। यहां उन्हें मैस्टेक्टॉमी के अलावा ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी का विकल्प भी बताया गया। इसके बाद मरीज का उपचार कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से किया गया। उपचार के बाद उनकी सेहत में काफी सुधार हुआ है।
39 साल की महिला के दोनों स्तनों की अलग-अलग सर्जरी
तीसरा मामला 39 साल की महिला का है। उनके स्तन में गांठ मिलने के बाद बायोप्सी की गई, जिसमें काफी आक्रामक प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई।
मरीज को कीमोथेरेपी दी गई। इसके अलावा, दोनों स्तनों का आकार और वजन अधिक होने के कारण उन्हें पीठ में दर्द की शिकायत भी रहती थी। इस स्थिति को देखते हुए कीमोथेरेपी के बाद उनकी टू-फोल्ड सर्जरी की गई।
डॉक्टरों ने बाएं स्तन में ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी और दाएं स्तन में ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी की। दोनों सर्जरी सफल रहीं। इसके बाद मरीज की रेडियोथेरेपी भी पूरी हो गई और फिलहाल वह स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं।
एबॉर्शन के बाद ब्लीडिंग, जांच में सामने आया रेयर कैंसर
चौथा मामला 35 साल की महिला का है, जिन्हें एबॉर्शन के बाद लगातार ब्लीडिंग की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह गंभीर एनीमिया से पीड़ित थीं और उपचार के दौरान कीमोथेरेपी के साथ उन्हें कई बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की भी जरूरत पड़ी।
जांच में पता चला कि महिला कोरियोकार्सिनोमा नामक एक दुर्लभ कैंसर से पीड़ित थीं। यह तेजी से फैलने वाला कैंसर है, जो आमतौर पर गर्भाशय में शुरू होता है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर इसका निदान नहीं हो पाता तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी।
हालांकि, इस मरीज के मामले में बीमारी का समय पर पता चल गया और सफल उपचार किया गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रही हैं।
युवाओं में कैंसर बढ़ने की क्या वजह है?
इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ. शुभम गर्ग, डायरेक्टर, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, Fortis Hospital Noida ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं में ब्रेस्ट और एंडोमेट्रियल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि पुरुषों में सिर और गर्दन के कैंसर के साथ-साथ लंग कैंसर के मामले भी देखे जा रहे हैं।
डॉ. गर्ग ने कहा कि कैंसर के इलाज में समय पर निदान बेहद महत्वपूर्ण है। मरीज के उपचार का परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी का पता किस स्टेज में चलता है। शुरुआती स्टेज में कैंसर की पहचान होने पर सफल उपचार की संभावना काफी बढ़ जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीज बायोप्सी या कीमोथेरेपी के डर से जांच और उपचार में देरी करते हैं। इसके कारण जब बीमारी का निदान होता है, तब तक कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है।
उन्होंने लोगों से नियमित स्क्रीनिंग और हेल्थ चेकअप करवाने की अपील की। साथ ही, शरीर में किसी भी तरह का असामान्य लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करने की सलाह दी।
बदलती लाइफस्टाइल भी बढ़ा रही कैंसर का जोखिम
Fortis Hospital Noida के डायरेक्टर, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. रजत बजाज के अनुसार, युवाओं में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे बदलती जीवनशैली और कुछ हद तक जेनेटिक्स की भूमिका हो सकती है।
उन्होंने बताया कि युवाओं में धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन बढ़ा है। इसके अलावा डाइट में सोडियम की अधिक मात्रा, फाइबर और फलों का कम सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, डायबिटीज, पर्यावरण प्रदूषण, रेड मीट और अधिक शुगर वाली वेस्टर्न डाइट जैसे कई रिस्क फैक्टर भी महत्वपूर्ण हैं। नींद की कमी भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
डॉ. बजाज ने बताया कि Fortis Hospital में पिछले कुछ वर्षों से कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। लंग कैंसर, किडनी कैंसर, हेपेटोसैलुलर कार्सिनोमा और ब्रेस्ट कैंसर समेत कई कैंसर में मरीज की स्थिति के अनुसार इन आधुनिक उपचार विकल्पों पर विचार किया जाता है।

























