Mira Bhayandar News: शिक्षा का मंदिर माने जाने वाले स्कूलों का आस-पास का वातावरण हमेशा से सुरक्षित, स्वच्छ और आवागमन के लिहाज से सुगम होना चाहिए। लेकिन, जब इसी स्कूल के सामने की सड़क अपने हाल पर बिलकुल उल्टा नजारा पेश करे, तो समझना कठिन नहीं होता कि नगर निगम की व्यवस्थाओं में कहां खामियां हैं। प्रभाग क्रमांक 18 के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठित ‘आर.बी.के स्कूल’ के पास की वर्तमान स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि किसी भी बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे रही है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
भीड़-भाड़ और संकरे रास्ते का दोहरा मारा
सुबह और शाम के समय यह रास्ता बेहद व्यस्त रहता है। छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने आने वाले अभिभावकों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों को भी इस मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। लेकिन गटर निर्माण कार्य के बाद छोड़ी गई बेतरतीब सामग्री और मलबे ने इस रास्ते की काया ही पलट दी है। अभिभावकों को अपने बच्चों का हाथ पकड़कर इस खतरनाक रास्ते से गुजरना पड़ रहा है, जहां एक कदम भी गलत उठाने पर चोट लगना तय है। वाहन चालकों को भी जाम से जूझना पड़ता है, जिससे सड़क पर हर दिन तनावपूर्ण माहौल बना रहता है।
ठेकेदार की लापरवाही और अफसरशाही का खेल
सबसे बड़ी नाइंसाफी इस बात की है कि गटर का निर्माण कार्य तो पूरा हो गया, लेकिन उसके बाद निर्माण सामग्री कई दिनों से वैसे ही पड़ा हुआ है। ठेकेदार ने काम खत्म होते ही सामग्री को हटाने की जहमीन नहीं उठाई। जब इस मामले की जानकारी मिली और स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया, तो स्थिति और भी भयावह थी।
निरीक्षण के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। यहां के स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति अपनी दुकान के सामने या गली में रखे इस कचरे या सामग्री को स्वयं हटाने की कोशिश भी करता है, तो उसे ठेकेदार के लोगों द्वारा परेशान किया जाता है।
यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसके बचाव में यह ठेकेदार इतना निर्लज्ज हो गया है? नागरिक स्वच्छता बनाए रखने की कोशिश करे तो उसे धमकी मिले, यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

जनता का दर्द
मजबूर फालक इस लापरवाही को लेकर हमारे पास आए। उनकी आँखों में गुस्सा और एक अजीब सी निराशा थी। उन्होंने बताया कि कैसे हर दिन बच्चे और बुजुर्ग इस मलबे के कारण गिरकर चोटिल हो रहे हैं। उनकी भावुक अपील ने यह साफ कर दिया कि अब स्थिति जमीनी स्तर पर काफी बिगड़ चुकी है और किसी भी बड़ी घटना से पहले इसे रोका जाना अत्यंत आवश्यक है।
गटर के ऊपर पड़ी निर्माण सामग्री और गंदगी केवल आवागमन में बाधा नहीं है, बल्कि यह एक बड़े स्वास्थ्य हानिकारक केंद्र के रूप में भी काम कर रही है। बरसात का मौसम या फिर रोजमर्रा का पानी इस मलबे में रुककर मच्छरों के पनपने का सबब बन रहा है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा हर पल मंडरा रहा है। इसे अनदेखा करना महानगर पालिका के आरोग्य विभाग के लिए चुनौती है।























