आज का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खास रहा है। वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर सकारात्मक संकेतों के चलते देश के प्रमुख सूचकांक ने रिकॉर्ड तेजी का अनुभव किया है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की खबरों, वैश्विक तेल कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिका-चीन के बीच सकारात्मक संकेतों की वजह से घरेलू बाजार में उत्साह का माहौल बन गया है।
सेंसेक्स ने मचाई धमाल: 1197 अंकों की तेज़ी
आज के कारोबार की शुरुआत बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स ने 1197 अंकों की तूफानी तेजी के साथ की। सेंसेक्स 76,725 के स्तर पर खुले, जो पिछले दिन की तुलना में मजबूत शुरुआत है। इस तेजी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर सकारात्मक खबरें और निवेशकों का भरोसा है।
सेंसेक्स के सभी शेयर हरे रंग में खुले, जिससे यह दर्शाता है कि निवेशक हर सेक्टर में उत्साह दिखा रहे हैं। इसके अलावा, निफ्टी ने भी 361 अंकों की छलांग लगाई और 23,985 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की। यह संकेत है कि आज का दिन भी मजबूत बढ़त के साथ बीतने की संभावना है।
घरेलू बाजार का प्रमुख ट्रेंड
शुक्रवार को भी भारतीय बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया था। बीएसई का सेंसेक्स 1,695 अंकों की बढ़त के साथ 75,527.95 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 ने 461 अंकों की बढ़त के साथ 23,622.90 का स्तर छुआ था। इन लगातार तेजी के पीछे वैश्विक सकारात्मक संकेत और घरेलू निवेशकों का भरोसा प्रमुख कारण हैं।
दुनिया के बड़े बाजारों में इस समय शांति और स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। इस खबर के बाद से ही तेल कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है।
अमेरिका ने यह भी कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। युद्ध के दौरान यहां आवाजाही बाधित होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना था, लेकिन अब स्थिति बेहतर हो रही है।
तेल कीमतों में भारी गिरावट
शांति समझौते की खबर आते ही ब्रेंट क्रूड 3% से ज्यादा गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। अमेरिकी WTI क्रूड भी 3.4% गिरकर 81.99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इस गिरावट का फायदा भारत जैसे तेल आयातक देशों को होगा, क्योंकि तेल की कीमतें कम होने से महंगाई पर नियंत्रण और चालू खाते के घाटे में राहत मिल सकती है।
जापान का प्रमुख शेयर सूचकांक निक्केई-225 शुरुआती कारोबार में करीब 4% तक चढ़ गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, बैंकिंग, और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के शेयरों में भारी खरीदारी देखी गई। जापान में इस तेजी का कारण तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक आर्थिक सुधार की उम्मीद है।

वहीं, दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी 5.2% तक उछल गया है। यहां भी टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इन बाजारों में आई तेजी का असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है।
तकनीक और एआई सेक्टर में निवेश का आकर्षण
दुनिया के सबसे बड़े IPO, SpaceX की शानदार लिस्टिंग के बाद से ही स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इन सेक्टरों में आगे भी तेजी बनी रहेगी।
SpaceX की सफलता और इसकी बढ़ती लोकप्रियता से जुड़े कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक, जापान के मौद्रिक नीति फैसले, ब्याज दरों में बदलाव, और अमेरिका-ईरान समझौते पर भी नजरें बनाए हुए हैं।
अगर अमेरिका-ईरान समझौता औपचारिक रूप से लागू होता है और तेल कीमतें स्थिर रहती हैं, तो भारतीय बाजार को भी मजबूत समर्थन मिल सकता है। कम तेल कीमतें भारत के महंगाई और चालू खाते के घाटे दोनों पर सकारात्मक असर डालेंगी।
इसके अलावा, यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता रहती है और निवेशक जोखिम लेने को तैयार होते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे सतर्कता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निवेश करें।






















