News regarding the design of the new UP Legislative Assembly building: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही प्रदेश की लोकतांत्रिक गरिमा और आधुनिकता का एक नया प्रतीक स्थापित होने जा रहा है। प्रस्तावित नए विधानभवन की डिजाइन और मूल संरचना सामने आ गई है, जिसे देखकर यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ एक सीमेंट और ईंटों का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, उत्तर प्रदेश की विरासत और आज की आधुनिक तकनीक का एक अद्भुत संगम होगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नक्शा जमा कर दिया गया है, और अब इसके निर्माण की तैयारियां तेज हो चुकी हैं।
कमल की पंखुड़ियों से प्रेरित अनूठी वास्तुकला
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सहारा शहर कैंपस की जमीन पर विकसित होने जा रहा यह विशाल परिसर लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इस इमारत की सबसे आकर्षक और चर्चित विशेषता इसका डिजाइन है। जैसा कि भारत में कमल को ज्ञान, समृद्धि और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, ठीक उसी तर्ज पर ऊपर से देखने पर यह नया विधानभवन एक खिले हुए कमल के फूल की तरह दिखाई देगा।

इस डिजाइन के केंद्र में विधानसभा और विधान परिषद की मुख्य कार्यवाही स्थल होंगे, जबकि इस केंद्रीय भाग के इर्द-गिर्द कमल की पंखुड़ियों की तरह फैले हुए हिस्सों में प्रशासनिक और सहायक विभागों के दफ्तर बनाए जाएंगे। यह संरचना सिर्फ दृश्यात्मक सुंदरता ही नहीं, बल्कि कार्यक्षमता को भी ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
जिलेवार होंगे अलग-अलग सेक्टर
देश की अन्य विधानसभाओं की तुलना में इस नए भवन की एक ऐसी व्यवस्था होगी, जिसे एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है। नए सदन में जनप्रतिनिधियों की बैठक व्यवस्था जिलों के आधार पर की जाएगी। मतलब कि प्रदेश के किसी भी जिले से आए हुए विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए अलग से एक सेक्टर या हॉल तय किया जाएगा।
इस जिलेवार सेक्टर व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही इलाके के जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय बना रहेगा। सरकारी अधिकारियों और प्रतिनिधियों को आपस में मिलने-जुलने और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करने में अत्यंत सुविधा होगी। इसके लिए परिसर के अंदर अलग-अलग छोटे-छोटे हॉल भी बनाए जाएंगे।
भविष्य को देखते हुए बढ़ाई गई सीटों की क्षमता
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है और आने वाले दशकों में जनप्रतिनिधियों की संख्या में वृद्धि की पूरी संभावना है। इस दूरदर्शिता को ध्यान में रखते हुए नए भवन की क्षमता काफी बढ़ाकर रखी गई है।
वर्तमान में पुराने विधानभवन में विधानसभा के लिए 403 सीटें और विधान परिषद के लिए 100 सीटें हैं। वहीं, नए भवन में विधानसभा कक्ष में 700 सीटों की व्यवस्था की जाएगी। विधान परिषद के लिए 200 सीटों का इंतजाम होगा। इसके अलावा, जब भी दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाएगा, तो उसके लिए एक विशाल 1,000 सीटों वाला सभागार तैयार किया जा रहा है।
35 लाख वर्गफुट में फैला होगा विशाल परिसर
यह परियोजना किसी छोटे स्तर पर नहीं है। इसके तहत कुल लगभग 35 लाख वर्गफुट के निर्मित क्षेत्र (Built-up area) को विकसित करने की योजना है। इस पूरे विशाल क्षेत्र को बेहद सोच-समझकर और वैज्ञानिक तरीके से बांटा गया है:
- 39 प्रतिशत हिस्सा: यह पूरी तरह से विधायी कार्यों, सदन की कार्यवाही और समितियों के काम के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
- 22 प्रतिशत हिस्सा: इसमें सचिवालय और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों को जगह मिलेगी।
- 12 प्रतिशत हिस्सा: इसे जनता के लिए खुले सार्वजनिक केंद्रों और ज्ञान केंद्रों (जैसे लाइब्रेरी या म्यूजियम) के लिए बनाया गया है।
- 11 प्रतिशत हिस्सा: यहां फूड कोर्ट, वेटिंग लाउंज जैसी सहायक सुविधाएं होंगी।
- 16 प्रतिशत हिस्सा: आधुनिक तकनीकी ढांचे और साझा सेवाओं (सर्वर रूम, कंट्रोल रूम आदि) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
पर्यावरण और आधुनिकता पर विशेष फोकस
नई विधानसभा केवल पुरानी विरासत को दर्शाती ही नहीं, बल्कि ‘ग्रीन बिल्डिंग’ (हरित भवन) के मानकों को भी अपनाएगी। इस पूरे 200 एकड़ के परिसर में लगभग 5,000 वाहनों को एक साथ खड़ा करने की क्षमता वाली विशाल पार्किंग बनाई जाएगी।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पार्किंग क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के चार्जिंग स्टेशन लगाने की पूरी योजना है। साथ ही, भवन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सोलर पैनलों (सौर ऊर्जा) पर आधारित ढांचे का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि यह भवन ऊर्जा की दृष्टि से आत्मनिर्भर बन सके।
यूपी का नया विधानभवन किसी सामान्य सरकारी इमारत के रूप में नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक मंदिर के रूप में सामने आ रहा है। इसकी संरचना इस कदर मजबूत और उन्नत तकनीक पर आधारित है कि आने वाले अगले 100 वर्षों तक प्रदेश की हर तरह की विधायी, प्रशासनिक और लोकतांत्रिक जरूरतों को यह भवन बखूबी पूरा करता रहेगा। यह भवन उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर और विकास की नई गति का वैश्विक स्तर पर प्रतीक बनेगा।

























