यूपी चुनाव से पहले मेरठ में जाटों का ‘महाशक्ति प्रदर्शन’

‘जाटों का प्लूटो’ महाराजा सूरजमल की प्रतिमा स्थापना ने दी नई राजनीतिक दिशा

UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के शंखनाद से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गर्मी अब धरातल पर दिखने लगी है। मेरठ में जाट समुदाय के ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन ने पूरे पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरणों को एक झटके से हिला दिया है। महाराजा सूरजमल की भव्य प्रतिमा के अनावरण के नाम पर आयोजित इस कार्यक्रम ने साबित कर दिया कि जाट राजनीति की जड़ें आज भी कमजोर नहीं हुई हैं, बल्कि यह नई रणनीति के साथ फिर से सक्रिय हो गई हैं।

दलीय दीवारें गिरी, साझा मंच ने दिया संदेश

इस भव्य समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें किसी एक राजनीतिक दल का वर्चस्व नहीं दिखा। पार्टी लाइनों को तोड़ते हुए भाजपा के कद्दावर नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान और राजस्थान से सांसद हनुमान बेनीवाल एक ही मंच पर नजर आए। यह तस्वीर सीधा संदेश दे रही थी कि जब बात समाज के गौरव की हो, तो राजनीतिक मतभेद पीछे छोड़ दिए जाते हैं। इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की भी इस कार्यक्रम में शिरकत की प्रबल संभावना है, जिससे इस आयोजन को ‘जाट-सिख’ एकता के व्यापक मंच के रूप में स्थापित किया गया है।

जयंत चौधरी की अनुपस्थिति: सियासी गलियारों में चर्चा का विषय

जहां एक तरफ पार्टी विरोधी नेता एक मंच पर दिख रहे हैं, वहीं जाट समुदाय के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की इस कार्यक्रम से दूरी बनाना सियासी हलचल मचा गया है। आयोजकों का दावा है कि उन्हें आमंत्रण भेजा गया था, लेकिन उनके न आने की संभावना है। चुनाव से पहले जयंत चौधरी के इस अनावरण समारोह से दूर रहने को कई अर्थों में पढ़ा जा रहा है। क्या यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है, या कोई अन्य रणनीति, यह अभी सस्पेंस बना हुआ है।

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‘जाटों का प्लूटो’: इतिहास से जोड़ने की कोशिश

इस शक्ति प्रदर्शन का आधार महाराजा सूरजमल की ऐतिहासिक शख्सियत है। जाट समुदाय के सबसे महान शासक माने जाने वाले सूरजमल को उनकी अद्वितीय युद्ध रणनीति के लिए ‘जाटों का प्लूटो’ कहा जाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में लगभग 80 युद्ध लड़े और मुगलों के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय देते हुए मथुरा और वृंदावन के धार्मिक स्थलों की रक्षा की थी। आयोजकों ने साफ तौर पर इशारा दिया कि यह कार्यक्रम केवल एक प्रतिमा स्थापना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़कर उनमें गौरव और वीरता का संचार करने का एक माध्यम है।

पश्चिमी UP का चुनावी समीकरण और भविष्य

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटें किसी भी पार्टी के लिए सत्ता की कुंजी बनती हैं। हाल के वर्षों में जाट समुदाय के राजनीतिक प्रभाव में आई कथित कमी को दूर करने के लिए यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की मौजूदगी ने सत्ता पक्ष की निगाहें भी इस मंच की ओर खींचीं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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