उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बाढ़ और जलभराव से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। इटौंजा क्षेत्र के लासा गांव में मंगलवार सुबह बाढ़ के पानी में छह दोस्त डूब गए। पांच युवकों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि विमल नाम के युवक की जान नहीं बच सकी। प्रशासन ने घंटों की मशक्कत के बाद उसका शव बरामद किया।
इस हादसे के बीच मड़ियांव, घैला, फैजुल्लागंज, दौलतगंज और गोमती नगर विस्तार के निचले इलाकों में भी जलभराव का संकट बना हुआ है। कई जगह घरों, दुकानों और सड़कों में पानी घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। फैजुल्लागंज और मल्लाही टोला में हालात खास तौर पर चिंताजनक हैं। यहां बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित जगहों की ओर जाना पड़ा है और लोगों की बरसों की कमाई पानी में डूब गई है।

लासा गांव में छह दोस्त बाढ़ के पानी में डूबे
इटौंजा के लासा गांव में मंगलवार सुबह हुए हादसे ने इलाके में दहशत फैला दी। बाढ़ के पानी में छह दोस्त डूब गए। स्थानीय स्तर पर बचाव की कोशिशों के बाद पांच दोस्तों को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन विमल की मौत हो गई। काफी देर तक तलाश अभियान चलने के बाद प्रशासन ने उसका शव बरामद किया।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में तेज बहाव और पानी की गहराई के कारण लोगों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से जलमग्न रास्तों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
फैजुल्लागंज में घर, दुकानें और वाहन पानी में डूबे
गोमती का पानी फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला और आसपास की बस्तियों तक पहुंच गया है। कई गलियों में कारें और दोपहिया वाहन पानी में आधे या पूरी तरह डूबे दिखाई दिए। घरों में रखा फर्नीचर, फ्रिज, टीवी, कपड़े और जरूरी कागजात भी पानी से खराब हुए हैं। दुकानों के बेसमेंट में पानी भरने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
कई परिवार ट्रैक्टरों पर सामान लादकर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते दिखे। कोई जरूरी दस्तावेज और बच्चों की किताबें बचाने की कोशिश कर रहा था, तो कोई घर का सामान निकालने में जुटा था। लेकिन पानी का स्तर और फैलाव इतना अधिक है कि कई लोग अपने घरों में फंसे सामान को बचा नहीं पा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक लाख से अधिक आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा है और कई परिवारों को पलायन करना पड़ा है। प्रभावित लोगों की चिंता सिर्फ संपत्ति के नुकसान तक सीमित नहीं है। उनके सामने अब पीने के पानी, भोजन और सिर पर छत जैसी बुनियादी जरूरतों का सवाल है।
घरों तक पहुंचने के लिए नावों का सहारा
कई इलाकों में सड़कों और गलियों पर पानी भरने के कारण लोग अपने घरों तक पैदल नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्हें नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि, नावों की उपलब्धता जरूरत के मुकाबले कम है। कुछ लोग घंटों इंतजार करते रहे, ताकि नाव से अपने घर तक जाकर उसकी स्थिति देख सकें।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई परिवार सिर्फ यह जानने के लिए नाव तलाश रहे हैं कि घर की दीवारें सुरक्षित हैं या नहीं और अंदर रखा सामान कितना खराब हुआ है। जलभराव ने राहत और बचाव के काम को भी मुश्किल बना दिया है।
राहत कैंप तक पहुंचना भी मुश्किल
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों तक पहुंचने वाले रास्ते भी पानी में डूबे हैं। कैंपों के भीतर पानी न पहुंचा हो, फिर भी मुख्य मार्ग जलमग्न होने से वहां तक जाना कठिन हो गया है। जिन परिवारों को भोजन, साफ पानी और सुरक्षित ठिकाने की सबसे अधिक जरूरत है, उनमें से कुछ राहत केंद्रों तक पहुंचने के लिए नावों पर निर्भर हैं।
स्थानीय लोगों को आशंका है कि पानी का स्तर और बढ़ा तो राहत कैंपों तक पहुंचना और मुश्किल हो सकता है। ऐसे में राहत सामग्री को प्रभावित बस्तियों तक पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पीने के पानी और भोजन की चिंता
बाढ़ के बीच महिलाओं और बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई परिवार साफ पीने के पानी और जरूरी राहत सामग्री की मांग कर रहे हैं। अस्थायी ठिकानों पर रह रहे बच्चों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें जुटाना भी आसान नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ ने उनकी गृहस्थी को भारी नुकसान पहुंचाया है और इसकी भरपाई में लंबा समय लग सकता है।
प्रशासन की निगरानी में राहत और बचाव कार्य
प्रभावित क्षेत्रों में नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह और अन्य प्रशासनिक अधिकारी हालात पर नजर रखे हुए हैं। नगर निगम की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हैं। जनप्रतिनिधि और पार्षद भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से भोजन, पानी और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं।
हालांकि, प्रभावित क्षेत्र का विस्तार और जलभराव की गंभीरता राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना रही है। लखनऊ में बाढ़ का पानी भले ही समय के साथ उतर जाए, लेकिन घरों, दुकानों और जरूरी सामान को हुए नुकसान से उबरने में लोगों को लंबा समय लग सकता है। फिलहाल प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरक्षित जगह, भोजन और साफ पानी की व्यवस्था कैसे हो और वे अपनी जिंदगी फिर से कहां से शुरू करें।























