Iran US War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान संकट को लेकर एक बड़ा बयान दिया है और कहा कि वह ईरान के साथ एक नए समझौते पर अंतिम मोहर लगाने के लिए व्हाइट हाउस की ‘सिचुएशन रूम’ में बैठक करने जा रहे हैं। इस समझौते की सबसे प्रमुख बात यह रहेगा कि अमेरिका ईरान की नौसैनिक घेराबंदी समाप्त करने जा रहा है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे जहाजों को राहत मिलेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका ईरान से उसका ‘न्यूक्लियर डस्ट’ यानी संवर्धित यूरेनियम खोदकर बाहर निकालेगा।
यह विकास ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच चल रहा युद्ध वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए इस युद्ध में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सिचुएशन रूम में अंतिम रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए कहा कि मैं अभी ‘सिचुएशन रूम’ में बैठक करने जा रहा हूं, ताकि कोई अंतिम निर्णय लिया जा सके। व्हाइट हाउस का सिचुएशन रूम वह केंद्र है, जहां से अमेरिका वैश्विक संकटों और युद्धों पर नजर रखता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यहां जाना इस बात का संकेत है कि ईरान मामले में कोई बड़ा राजनयिक या सैन्य फैसला लिया जाने वाला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि इस समझौते के तहत युद्धविराम को आगे बढ़ाया जाएगा। इसकी मुख्य शर्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि ईरान को इस बात पर सहमत होना होगा कि वे कभी भी कोई परमाणु हथियार या बम नहीं रखेंगे।
होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इसे तुरंत खोला जाना चाहिए और यहां किसी भी तरह की ‘टोल वसूली’ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पानी में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटा दी जाएंगी। अमेरिका ने अपने बेहतरीन ‘अंडरवाटर माइन स्वीपर्स’ का इस्तेमाल करके कई सुरंगों को पहले ही नष्ट कर दिया है। अब ईरान को बची हुई सभी सुरंगों को तुरंत हटाना होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमारे जबरदस्त और अभूतपूर्व नौसैनिक घेराबंदी के कारण जो जहाज इस स्ट्रेट में फंस गए थे, वे अब अपने घर की ओर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, क्योंकि ये घेराबंदी हटा ली जाएगी। इस घोषणा से वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर पैदा हुई चिंताओं को कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।
‘न्यूक्लियर डस्ट’ को लेकर बड़ा दावा
सबसे चौंकाने वाला दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किया है। उन्होंने कहा कि जो ‘न्यूक्लियर डस्ट’ (संवर्धित यूरेनियम) जमीन के बहुत नीचे दबी हुई है, उसे अमेरिका खोदकर बाहर निकालेगा। यह काम ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ मिलकर किया जाएगा और सामग्री को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा।
बता दें कि अमेरिका ने हाल के हमलों में ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों—इस्फहान, फोर्डो और नंताज पर बड़ा हमला किया था। माना जाता है कि यहीं ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम दबा पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस उद्देश्य के लिए अमेरिकी जमीनी बलों को कार्यवाही करनी होगी, ताकि ईरान की परमाणु क्षमता को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सके।
आधा सच और आधा झूठ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इन सभी दावों पर ईरान ने तत्काल प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सरकारी मीडिया संस्था ‘फार्स न्यूज एजेंसी’ ने ट्रंप की टिप्पणियों को खारिज करते हुए इसे ‘आधा सच और आधा झूठ’ करार दिया है। ईरानी सूत्रों का कहना है कि अभी समझौता आखिरी स्टेज में है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गलिबाफ ने भी शंका व्यक्त की है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हमें गारंटी और बातों पर भरोसा नहीं है, सिर्फ काम ही कसौटी हैं। जब तक दूसरा पक्ष कोई कदम नहीं उठाता, तब तक हम कोई कदम नहीं उठाएंगे। गलिबाफ ने चेतावनी दी कि किसी भी समझौते का असली विजेता वही होगा, जो अगले दिन होने वाले युद्ध के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो।
युद्ध का भयावह परिणाम
बता दें कि यह पूरा विवाद उस समय सामने आया है जब दोनों पक्षों के बीच जारी जंग ने भयावह रूप ले लिया है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर ईरान और लेबनान के नागरिक शामिल हैं।
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के कारण दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। तेल की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है। ऐसे में अमेरिका द्वारा नौसैनिक घेराबंदी वापस लेने का संकेत एक राहत की खबर हो सकती है, लेकिन ईरान के शक को देखते हुए यह स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
























