ईरान का यह एक कदम दुनिया के इंटरनेट को कर सकता है ‘ठप’!

समुद्र में बिछी इंटरनेट केबल्स!

Hormuz Undersea Cables: ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व को जंग के दौर में बदल दिया है, लेकिन इस युद्ध का असर सिर्फ जमीन या हवा तक ही सीमित नहीं है। अब यह खतरा समुद्र की गहराइयों में छिपी दुनिया की “डिजिटल नसों” तक पहुंच गया है। हाल ही में ईरान द्वारा होमुर्ज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने के फैसले ने एक ऐसा संकट खड़ा कर दिया है, जो पूरी दुनिया के इंटरनेट को प्रभावित कर सकता है।

समुद्र के 200 फीट नीचे क्या है खास?

होमुर्ज जलडमरूमध्य को अब तक आमतौर पर तेल की आपूर्ति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह इंटरनेट की दुनिया के लिए भी जीवनरेखा बन चुका है। समुद्र की सतह से करीब 200 फीट नीचे 20 से ज्यादा अहम फाइबर ऑप्टिक केबल्स बिछी हैं। ये केबल्स यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच डेटा ट्रैफिक का आदान-प्रदान करती हैं। चाहे वीडियो कॉल हो, बैंकिंग ट्रांजैक्शन हो या फिर क्लाउड सेवाएं, इन सबके लिए ये केबल्स ही रीढ़ का काम करती हैं। ईरान द्वारा इस क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने का मतलब है कि इन केबल्स को काटने या उन्हें नुकसान पहुंचाने का खतरा बहुत बढ़ गया है।

भारत के लिए क्यों है यह चिंता की बात?

इस संकट का सबसे बड़ा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है। होमुर्ज से गुजरने वाली कुछ अहम केबल्स जैसे AAE-1, FALCON, Gulf Bridge International, और Tata-TGN Gulf, भारत की इंटरनेट कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं।

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अगर ईरान इन केबल्स को नुकसान पहुंचाता है, तो भारत में:

  • इंटरनेट स्पीड अचानक से धीमी हो सकती है।
  • इंटरनेशनल कॉल्स में दिक्कत आ सकती है।
  • ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन फेल हो सकते हैं।
  • क्लाउड सर्विसेज और AI आधारित सेवाएं ठप हो सकती हैं।

क्या ईरान सच में कर सकता है नुकसान?

विशेषज्ञों के मुताबिक, हालांकि ईरान पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद नहीं कर सकता, लेकिन होमुर्ज जलडमरूमध्य में बिछी केबल्स पर हमला करके वैश्विक डेटा ट्रैफिक को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकता है। इससे डेटा ट्रांसफर की गति धीमी हो जाएगी और कई तरह की डिजिटल सेवाएं बाधित होंगी।

मरम्मत क्यों है मुश्किल?

समुद्र के भीतर बिछी इन केबल्स को ठीक करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए विशेष जहाजों और आधुनिक तकनीक की जरूरत होती है। युद्ध के माहौल में इन जहाजों के संचालन में जोखिम बहुत ज्यादा होता है। पिछले साल रेड सी में हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद भी केबल्स की मरम्मत में काफी देरी हुई थी, जिससे एशिया और अफ्रीका में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हुई थीं। अगर ईरान ऐसा कुछ करता है, तो मरम्मत में महीनों लग सकते हैं।

क्या है बैकअप प्लान?

दुनिया के पास इसका कोई ठोस बैकअप प्लान नहीं है। हां, डेटा को अन्य रूट्स से डायवर्ट किया जा सकता है, लेकिन इससे इंटरनेट की रफ्तार बहुत धीमी हो जाएगी। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि अगर होमुर्ज जलडमरूमध्य के साथ-साथ रेड सी का रास्ता भी बंद हो जाए, तो यह स्थिति एक “वैश्विक डिजिटल संकट” का रूप ले लेगी। ऐसे में न सिर्फ तकनीकी क्षेत्र, बल्कि बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा और वैश्विक व्यापार जैसे क्षेत्रों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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