ट्रेड डील की चर्चाओं के पीछे छिपा यह बड़ा आंकड़ा

अमेरिका से मजबूत रिश्ता, चीन के साथ व्यापार में कमज़ोरी (फाइल फोटो)

संध्या समय न्यूज


इस समय दुनिया भर में भारत और अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड डील की चर्चा जोरों पर है। लेकिन, इन सबके बीच एक ऐसा आर्थिक सच सामने आया है जो शायद ही किसी की समझ में आए। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ भारत का व्यापार फायदे में (ट्रेड सरपल्स) रहा है, जबकि चीन के साथ देश का व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) 100 अरब डॉलर पार कर चुका है। फिर भी, इस घाटे को लेकर देश में कोई खास हाय-तौबा क्यों नहीं मच रहा है?
दरअसल, आंकड़ों की परत के नीचे छिपा है भारत की आर्थिक मजबूती का एक बड़ा राज। हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ड्रैगन (चीन) से होने वाला आयात भारत की मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीति का हिस्सा बन चुका है। चीन से सामान आयात करना आज भारत की ‘कमाई’ का जरिया बन चुका है।

बदल रहा है व्यापार का ‘नेचर’

पिछले 10 सालों में भारत-चीन व्यापार का ग्राफ बदल चुका है। एक दशक पहले भारतीय बाजार में सस्ते चीनी फिनिश्ड गुड्स (तैयार माल) की बाढ़ थी, लेकिन अब सरकार की सख्त नीतियों ने डंपिंग पर लगाम लगा दी है। अब जो सामान चीन से आता है, उसमें 80 फीसदी हिस्सा ‘रॉ मैटेरियल’ (कच्चा माल) का है, न कि तैयार सामान का। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल्स जैसे उद्योगों के लिए यह कच्चा माल जीवनदायक है।

यह भी पढ़ें :अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने सालगिरह पर पत्नी को दिया ये खास संदेश

स्मार्टफोन सेक्टर: आयात से निर्यात का खेल

इस ‘इंपोर्ट टू एक्सपोर्ट’ मॉडल का सबसे बड़ा उदाहरण भारत का स्मार्टफोन क्षेत्र है। साल 2025 में भारत ने अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में चीन को पीछे छोड़ दिया। लेकिन, यह कमाल तभी संभव हो पाया है, जब भारतीय कंपनियों ने चीन से डिस्प्ले स्क्रीन, बैटरी और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) जैसे कंपोनेंट्स का भारी आयात किया। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-अक्तूबर 2025 के दौरान भारत ने अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स में 38 बिलियन डॉलर का आयात किया। इसमें मोबाइल कंपोनेंट्स (8.6 अरब डॉलर) और आईसी चिप्स की बड़ी हिस्सेदारी है। इस कच्चे माल को भारत में असेंबल करके दुनिया में बेचा गया, जिससे इस साल 35 बिलियन डॉलर के निर्यात की उम्मीद है। यदि चीन से आयात रुका तो यह पूरी इंडस्ट्री ढह सकती है।

फार्मा सेक्टर: दवाओं का भी चीन पर निर्भरता

भारत को ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है, लेकिन इस उपाधि के पीछे भी चीन का साथ है। भारत अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप को सस्ती दवाइयां निर्यात करता है, लेकिन पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक्स बनाने के लिए उसे 70 फीसदी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) चीन से आयात करना पड़ता है। खास बात यह है कि एंटीबायोटिक्स के लिए 97-98 फीसदी कच्चा माल सिर्फ चीन से आता है। पिछले साल भारत ने चीन से 12 अरब डॉलर का फार्मा रॉ मैटेरियल खरीदा और उससे बनी दवाइयों का 30 अरब डॉलर का निर्यात किया। यानी, चीन का सामान बिना आए भारत का 30 अरब डॉलर का निर्यात खतरे में पड़ जाता।

टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग का भी समीकरण

टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। भारतीय टेक्सटाइल उद्योग बटन, जीप और सिंथेटिक डाइ चीन से मंगाता है। छोटी इंजीनियरिंग कंपनियां स्टील और मशीनी कलपुर्जे चीन से आयात करके अफ्रीका और मध्य-पूर्व के देशों में मशीनें बेचती हैं।

Sandhya Samay News

संध्या समय न्यूज़ – आपके विश्वास की आवाज़ संध्या समय न्यूज़ की स्थापना वर्ष 2018 में की गई, जो कि MSME में विधिवत रूप से पंजीकृत है। हमारा उद्देश्य समाज तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है। हम देश-प्रदेश की ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों, और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आपके सामने सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम अपने सभी दर्शकों और पाठकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें लगातार देखा, समझा और अपना विश्वास बनाए रखा। आपकी यही सराहना और समर्थन हमें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। संध्या समय न्यूज़ हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा के मूल्यों पर कार्य करता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now