A Future of Trash : जब दुनिया के विकसित देश अपने कचरे का निस्तारण करने में जूझ रहे हैं, वहीं मिस्र की राजधानी काहिरा की चमक-धमक से दूर मुकट्टम पहाड़ियों की तलहटी में बसा एक शहर ऐसा है, जिसने कचरे को गंदगी नहीं, बल्कि ‘सोने’ में बदलने की कला सीख ली है। दुनिया इसे ‘गार्बेज सिटी’ कहती है, लेकिन इसका असली नाम ‘मनशियत नासिर’ है। यह वो जगह है जहां कचरा किसी और चीज की नहीं, बल्कि खुद ‘करेंसी’ (मुद्रा) की तरह काम करता है।
सबसे बड़ा और कुशल ‘रीसाइक्लिंग हब’
यहां आने वाला हर व्यक्ति शुरुआत में खुद को किसी विशाल कचरा डिपो में महसूस करता है, जहां छतें, गलियां और घर के बाहर का हिस्सा प्लास्टिक की बोतलों और टिन के ढेर से भरा होता है। लेकिन यहां की असली कहानी गंदगी के पर्दे के पीछे छिपी है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे कुशल ‘रीसाइक्लिंग हब’ है। जहां दुनिया के बड़े देश मुश्किल से 30% कचरा रीसाइकल कर पाते हैं, वहीं मनशियत नासिर के लोग 80% से 90% कचरे को रीसाइकल कर देते हैं।
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‘जबालिन’ की मेहनत और एमबीए से बेहतर मैनेजमेंट
यहां रहने वाले लगभग 2.5 लाख लोगों में से 70 हजार लोग, जिन्हें ‘जबालिन’ (कचरा उठाने वाले) कहा जाता है, इस उद्योग की रीढ़ हैं। यहां हर घर एक छोटी फैक्ट्री की तरह काम करता है। महिलाएं और बच्चे अपनी पारखी नजरों से कचरे को अलग-अलग करते हैं और उसे फैक्ट्रियों को बेचकर ‘करेंसी’ में बदल देते हैं। ये लोग भले ही अनपढ़ हों, लेकिन उनकी सप्लाई चेन मैनेजमेंट किसी भी एमबीए प्रोफेशनल से बेहतर है। यहां से रीसाइकल होकर कच्चा माल चीन और यूरोप के बाजारों तक पहुंचता है।
सरकारी मशीनें भी कर चुकी हैं हार
इनकी क्षमता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब मिस्र सरकार ने शहर की सफाई के लिए विदेशी कंपनियों और बड़ी मशीनों को लगाया, तो वे इन ‘जबालिन’ जितनी बारीकी से छंटाई नहीं कर पाईं। अंततः सरकार को वापस इन्हीं लोगों का सहारा लेना पड़ा।
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गंदगी के बीच आस्था का दीपक: ‘सेंट सिमन चर्च’
इस शहर में जहां एक तरफ हवा में कचरे की गंध रहती है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ को काटकर बना ‘सेंट सिमन द टैनर चर्च’ रूह को सुकून देता है। मध्य पूर्व का यह सबसे बड़ा चर्च एक प्राकृतिक गुफा में बना है, जहां 20,000 से ज्यादा लोग एक साथ बैठ सकते हैं। यह यहां की ईसाई बहुल आबादी की आस्था का प्रतीक है।
काहिरा की ‘किडनी’ और सस्टेनेबल लिविंग का सबक
इस शहर को ‘काहिरा की किडनी’ कहा जाता है। ये लोग न केवल मिस्र की सफाई कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण बचाने के मिशन में भी जुटे हैं। उनके लिए यह कचरा गंदगी नहीं, बल्कि उनके बच्चों की स्कूल फीस, शादियां और उनका भविष्य है। जब पूरी दुनिया ‘सस्टेनेबल लिविंग’ (टिकाऊ जीवन) की बात कर रही है, मनशियत नासिर के ये गुमनाम योद्धा बिना किसी दिखावे के धरती की सेवा में लगे हैं। अगर यह शहर एक दिन भी काम करना बंद कर दे, तो पूरा मिस्र कचरे के ढेर में दब जाएगा।





















