Bihar News: बिहार की सियासत एक बार फिर गर्माने लगी है। आने वाले एमएलसी (बिहार विधान परिषद) चुनाव को लेकर सत्ताधारी दल जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगाने के लिए मंगलवार को नीतीश कुमार के सरकारी आवास, 1, अन्ने मार्ग पर एक अहम और करीब 90 मिनट तक चलने वाली ‘सीक्रेट’ बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेताओं और रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया। हालांकि, बैठक के बाद भी उम्मीदवार के नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
नीतीश आवास पर बिगड़ते समीकरणों का मंथन
बिहार विधान परिषद की खाली हुई सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए जेडीयू बिल्कुल संजीदा नजर आ रही है। मंगलवार दोपहर जब सीएम आवास के बाहर पार्टी के बड़े नेताओं के वाहनों का काफिला पहुंचा, तो यह साफ हो गया था कि कुछ महत्वपूर्ण होने वाला है। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस बंद दरवाजे की बैठक में मौजूदा राजनीतिक हालात, पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और सबसे अहम—उम्मीदवार के चयन पर विस्तार से चर्चा की गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में जेडीयू के कद्दावर नेता मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह, जिन्हें पार्टी संगठन का विशेषज्ञ माना जाता है, इस बैठक में खास रूप से मौजूद थे। इसके अलावा पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, जो अपनी बेबाक राय और युवा चेहरे के लिए जाने जाते हैं, भी इस मंथन में शामिल हुए। बिहार सरकार में मंत्री और विधानमंडल कार्य मंत्री विजय चौधरी की मौजूदगी भी इस बात की पुष्टि करती है कि पार्टी इस चुनाव को लेकर कोई कोताही नहीं बरतना चाहती। इन वरिष्ठ नेताओं के अलावा पार्टी के कई अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
नेताओं की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस
बैठक समाप्त होने के बाद जैसे ही नेता एक-एक करके नीतीश कुमार आवास से बाहर निकले, मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेर लिया। हर किसी को एक ही सवाल था कि आखिर उम्मीदवार कौन होगा? लेकिन, राजनीति में ‘चुप्पी’ का भी अपना मतलब होता है। सभी नेताओं ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। न तो किसी ने बैठक के एजेंडे पर कुछ बोला और न ही नामों के बारे में कोई संकेत दिया। इस तरह की ‘नो कमेंट’ वाली स्थिति ने सियासी हलकों में अटकलों का बाजार और गर्म कर दिया है। पार्टी के इस रवैये से साफ प्रतीत होता है कि वह अंतिम फैसले से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू इस बार उम्मीदवार के चयन में बेहद सावधानी बरत रही है। पार्टी सूत्रों की मानें तो, उम्मीदवार के चयन में सामाजिक, क्षेत्रीय और सबसे महत्वपूर्ण जातीय संतुलन को लेकर काफी मंथन हुआ है। बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरणों का बड़ा महत्व होता है और नीतीश कुमार हमेशा से ‘समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने’ की नीति पर चलते आए हैं।
पार्टी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है, जो न केवल जीत सुनिश्चित करे, बल्कि विवादों से भी दूर रहे। उम्मीदवार ऐसा होना चाहिए जो पार्टी संगठन के लिए मजबूती लेकर आए और एनडीए गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के लिए भी राजनीतिक रूप से स्वीकार्य हो। इसीलिए शीर्ष नेतृत्व हर पहलू पर गहराई से विचार कर रहा है।
नीतीश की मंजूरी है आखिरी शब्द
जेडीयू में फैसला लेने की प्रक्रिया हमेशा से व्यवस्थित रही है। चाहे वह कोई छोटा मामला हो या बड़ा राजनीतिक फैसला, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति के बिना कोई भी घोषणा नहीं की जाती। इस बैठक में भी कई नामों पर चर्चा हुई और उनके पेशेवर व राजनीतिक पक्षों को तौला गया, लेकिन अंतिम मुहर सीएम नीतीश कुमार ही लगाएंगे। नेताओं की चुप्पी इस बात का संकेत भी हो सकती है कि नाम तय हो चुका है लेकिन उसे लेकर औपचारिक तौर पर मंत्रिमंडल या पार्टी की कोर कमेटी की मुहर बाकी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतनी लंबी और गंभीर बैठक के बाद उम्मीदवार के नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है। ऐसे में अगले 24 से 48 घंटों के अंदर जेडीयू की ओर से आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। पार्टी नेता जहां एक ओर मीडिया से बचते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गठबंधन धर्म निभाते हुए और अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए यह फैसला जेडीयू के लिए काफी अहम माना जा रहा है।























