एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की अंबाला रेंज इकाई ने कैथल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और सटीक कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह कार्रवाई उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) के एक कर्मचारी के खिलाफ की गई है, जिस पर आम जनता से जुड़ी एक सरकारी योजना को पूरा करवाने के एवज में अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। एसीबी टीम ने सीवन कार्यालय में तैनात एलडीसी (लोअर डिवीजन क्लर्क) संदीप कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए उसी वक्त रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया, जब वह रुपये गिन रहा था।
सोलर पैनल योजना में आ रही थी बाधा
दरअसल, मामला सूर्योदय हरियाणा सोलर रूफटॉप सब्सिडी योजना से जुड़ा है। कैथल में ‘उज्ज्वल भारत सोलर पावर’ नाम की एक प्राइवेट फर्म के प्रोपराइटर ने एसीबी अंबाला को एक लिखित शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके दो ग्राहकों के घरों पर सोलर पैनल सफलतापूर्वक लग भी चुके हैं, लेकिन बिजली निगम के सीवन कार्यालय में बैठे एलडीसी संदीप कुमार उनकी फाइलों पर मुहर लगाने के लिए आनाकानी कर रहा था।
जब फर्म के मालिक ने मीटर जारी करवाने और सब्सिडी की फाइल को फाइनल मंजूरी दिलाने के लिए संपर्क किया, तो आरोपी कर्मचारी ने साफ तौर पर पांच हजार रुपये की रिश्वत मांग ली। आरोपी ने यह भी साफ कर दिया था कि जब तक यह रकम नहीं मिलेगी, तब तक न तो फाइल आगे बढ़ेगी और न ही बिजली का नया मीटर आवंटित किया जाएगा।
एसीबी ने कैसे बुना जाल?
शिकायत मिलने के बाद एसीबी अंबाला की टीम हरकत में आ गई। हालांकि, एसीबी किसी भी शिकायत पर सीधे कार्रवाई नहीं करती, बल्कि पहले उसकी पड़ताल की जाती है। जब विजिलेंस टीम ने अपने स्तर पर जांच की और शिकायत को पूरी तरह सच पाया, तब एक सटीक ‘ट्रैप’ (जाल) तैयार करने की योजना बनाई गई।
शिकायतकर्ता की मदद से पहले ही एसीबी द्वारा नोटों पर एक विशेष केमिकल (ट्रैप केमिकल) का छिड़काव कर दिया गया, ताकि जैसे ही आरोपी इन नोटों को छूएगा, उसके हाथों में रंग आ जाए और कोई भी बचाव का रास्ता बंद हो जाए। इसके बाद शिकायतकर्ता को निर्देश दिया गया कि वह निर्धारित समय पर कार्यालय जाकर रुपये की डिलीवरी करे।

कार्यालय में घुसी विजिलेंस टीम, रंगे हाथों गिरफ्तारी
नियोजित योजना के तहत एसीबी की पूरी टीम सिविल सेक्रेटरिएट (सीवन) कार्यालय पहुंची। शिकायतकर्ता ने जैसे ही एलडीसी संदीप कुमार को पांच हजार रुपये की ब्रीफकेस थमाई, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठे एसीबी अधिकारियों ने वहां धावा बोल दिया।
जब तक आरोपी कर्मचारी समझ पाता, एसीबी टीम ने उसे घेर लिया। नोटों पर लगा केमिकल ने तुरंत असर किया और संदीप कुमार के हाथ पूरी तरह से रंगे हो गए। कोई भी जवाब देने के लिए आरोपी के पास नहीं बचा था। एसीबी ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया और कार्यालय से बाहर ले जाकर पूछताछ शुरू कर दी।
बिजली निगम कार्यालय में फैली दहशत
एसीबी की इस अचानक कार्रवाई की खबर जैसे ही कैथल के यूएचबीवीएन कार्यालय में फैली, तो वहां अफरातफरी मच गई। मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था। लोग एक-दूसरे से चुपचाप इस घटना की जानकारी लेते हुए नजर आए। यह गिरफ्तारी उन अन्य कर्मचारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी बनकर सामने आई है, जो अक्सर छोटे-मोटे कामों के बहाने आम जनता से रिश्वत की मांग करते हैं।
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी संदीप कुमार कैथल के प्रतिष्ठित मॉडल टाउन का निवासी है। अभी तक वह अपने आप को काफी सुरक्षित मानता था, लेकिन एसीबी की इस सटीक कार्रवाई ने उसकी पोल खोल दी।
मामला दर्ज, अन्य आरोपियों की तलाश शुरू
इस पूरे प्रकरण को लेकर एसीबी ने औपचारिक रूप से कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। थाना एसवी (स्पेशल विजिलेंस) एंड एसीबी अंबाला में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। यह धारा उन सरकारी कर्मचारियों पर लागू होती है, जो अपने पद का दुरुपयोग करके किसी भी तरह की अवैध रिश्वत की मांग करते हैं या लेते हैं।
एसीबी के इंस्पेक्टर दलबीर सिंह, जिनकी अगुवाई में यह पूरी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया गया, ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की बातों की जमीनी पुष्टि के बाद ही यह कदम उठाया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी सिर्फ एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन जांच इसी तरह जारी रहेगी।
इंस्पेक्टर ने आगे बताया, “हमारी टीम अभी इस बात की गहन जांच कर रही है कि क्या इस रिश्वतखोरी के गिरोह में कोई और भी कर्मचारी या उच्च अधिकारी शामिल है? यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता या साजिश सामने आती है, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्ततम कार्रवाई की जाएगी।”






















