बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता संजय दत्त ने हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित बसावतारकम इंडो अमेरिकन कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया और कैंसर मरीजों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया। अस्पताल के चेयरमैन और अभिनेता नंदमुरी बालकृष्ण सहित ट्रस्ट बोर्ड के सदस्यों ने संजय दत्त का गर्मजोशी से स्वागत किया।
संजय दत्त के इस दौरे को कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है, क्योंकि अभिनेता खुद भी इस गंभीर बीमारी से लड़ चुके हैं। उन्होंने मरीजों और उनके परिवारों से बातचीत करते हुए सकारात्मक सोच बनाए रखने और समय पर इलाज कराने का संदेश दिया। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
दिवंगत नंदमुरी बसवतारकम और एनटी रामाराव को दी श्रद्धांजलि
अस्पताल पहुंचने के बाद संजय दत्त ने सबसे पहले परिसर में स्थापित दिवंगत नंदमुरी बसवतारकम और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महान अभिनेता एन.टी. रामाराव की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने दोनों महान हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद किया।
बसावतारकम इंडो अमेरिकन कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना नंदमुरी बसवतारकम की स्मृति में की गई थी। यह संस्थान लंबे समय से कैंसर मरीजों को बेहतर और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है।
अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लिया जायजा
अपने दौरे के दौरान संजय दत्त ने अस्पताल के कई महत्वपूर्ण विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने पीईटी-सीटी (PET-CT) स्कैन विभाग, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी यूनिट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर और बच्चों के वार्ड का दौरा किया। अभिनेता ने अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक तकनीकों और इलाज की सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से बातचीत कर मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में भी जाना।
बच्चों के वार्ड में संजय दत्त ने कैंसर से जूझ रहे छोटे मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों का हालचाल पूछा और उन्हें फल व उपहार वितरित किए। अभिनेता के इस व्यवहार से बच्चों और उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी नजर आई।
नंदमुरी बालकृष्ण ने बताया अस्पताल का उद्देश्य
इस अवसर पर अस्पताल के चेयरमैन नंदमुरी बालकृष्ण ने कहा कि यह संस्थान उनकी माता स्वर्गीय नंदमुरी बसवतारकम की याद में स्थापित किया गया था। अस्पताल का उद्देश्य कैंसर मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में लगातार नई चिकित्सा तकनीकों को शामिल किया जा रहा है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कैंसर उपचार एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

बालकृष्ण ने कहा कि अस्पताल का लक्ष्य सिर्फ अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, ताकि पैसों की कमी के कारण किसी मरीज को इलाज से वंचित न होना पड़े।
संजय दत्त ने साझा किया अपना कैंसर अनुभव
संजय दत्त ने अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और प्रबंधन टीम की सराहना करते हुए कहा कि कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए इलाज के साथ-साथ आत्मविश्वास और मजबूत इच्छाशक्ति भी जरूरी होती है।
उन्होंने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वह खुद फेफड़ों के कैंसर से जूझ चुके हैं और सफलतापूर्वक इससे बाहर निकले हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि बीमारी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय रहते डॉक्टरों से सलाह लें।
अभिनेता ने कहा कि कैंसर का नाम सुनकर डरने के बजाय सही जानकारी और समय पर इलाज पर ध्यान देना चाहिए। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।























