Barreleye Fish: पृथ्वी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे समुद्र का 80 प्रतिशत से भी ज्यादा हिस्सा अभी तक अनचाहा है? समुद्र की अंधेरी और गहरी चट्टानों में ऐसी-ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनके बारे में जानकर इंसान की रूह कांप जाती है। इन्हीं अनगिनत रहस्यों में से एक अद्भुत और चौंकाने वाली क्रिएचर है ‘बैरेलाइन फिश’।
इसे देखकर पहली बार में तो कोई भी यकीन नहीं करेगा, क्योंकि यह मछली ऐसी दिखती है जैसे इसने सिर पर एक प्लास्टिक की टोपी या हेलमेट पहन रखा हो और उसके अंदर से सीधे इंसान की आंखें झांक रही हों।
सोशल मीडिया पर इस मछली के वीडियोज और तस्वीरें इन दिनों तहलका मचा रही हैं। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
सिर पर लगी ‘शीशे की टोपी’ और अंदर बसी आंखें
बैरेलाइन फिश की सबसे बड़ी पहचान इसका पारदर्शी सिर है। इसके सिर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह से कांच या साफ प्लास्टिक की तरह दिखता है। इस पारदर्शी ढके हुए डोम के अंदर इसकी दो बहुत बड़ी, ट्यूब के आकार की और हरे रंग से चमकती आंखें साफ-साफ नजर आती हैं। जब यह मछली तैरती है, तो लगता है कि किसी अलग दुनिया का रोबोट समुद्र में घूम रहा है। इंटरनेट पर लोग इसके इसी अनोखे लुक को लेकर मजाकिया कमेंट कर रहे हैं कि “लगता है मछली ने कोरोना टाइम का प्लास्टिक का पीपीई किट हेलमेट पहन रखा है।”
वैज्ञानिकों को भी था भरोसा नहीं, माना जाता था ‘फेक’
बहुत ही दिलचस्प बात यह है कि जब इस मछली की पहली तस्वीरें सामने आई थीं, तब मशहूर मरीन बायोलॉजिस्ट्स (समुद्री जीवविज्ञानी) और एक्सपर्ट्स को भी यकीन नहीं हो रहा था। उन्हें लगा कि यह कोई मोर्फ्ड इमेज (संदिग्ध तस्वीर) है या फिर किसी ने इसे फोटोशॉप के जरिए बनाया है। दरअसल, जब इसे जाल में फंसाकर सतह पर लाया जाता है, तो उसका पारदर्शी सिर काफी नाजुक होता है और दबाव में टूट जाता है। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने डीप-सी सबमर्सिबल्स (गहरे समुद्र में जाने वाले विशेष जहाज) के जरिए इसे उसके प्राकृतिक आवास में लाइव देखा, तो सच सामने आ गया।
अंधेरे में शिकार करने का अनोखा ‘टेक्निक’
आप सोच रहे होंगे कि आखिर इसकी आंखें सिर के अंदर क्यों हैं? तो इसके पीछे प्रकृति का एक बेहद स्मार्ट खेल है। यह मछली समुद्र की सतह से लगभग 2600 फीट (लगभग 800 मीटर) नीचे रहती है। इतनी गहराई में सूरज की किरणें बिल्कुल नहीं पहुंच पातीं, यानी वहां कई गुना अंधेरा होता है।
इस अंधेरे में बचने और शिकार करने के लिए इस मछली की आंखें बिल्कुल ऊपर की तरफ (सीधे सिर के ऊपर) देखती हैं। ये आंखें हल्की सी भी रोशनी को पकड़ने में माहिर होती हैं। जब कोई छोटा जीव इसके ऊपर से गुजरता है, तो यह आसानी से उसे देख लेती है। सबसे खास बात यह है कि इसकी ये ट्यूबनुमा आंखें अपनी जगह से हिलकर सामने की तरफ भी देख सकती हैं, ताकि वह अपना शिकार सीधे मुंह में ले सके। पारदर्शी सिर इसलिए है, ताकि आंखों पर कोई रुकावट न आए और मछली को 360 डिग्री का विजन मिल सके।
एक और जबरदस्त फैक्ट यह है कि जो दो छोटी-छोटी बिंदु जैसी चीजें इस मछली के मुंह के बगल में नजर आती हैं, वो उसकी आंखें नहीं हैं! वो उसके नाक के छिद्र (नॉस्ट्रिल्स) हैं, जो शिकारियों को भ्रमित करने का काम करते हैं।
लाखों सालों के इवोल्यूशन का अद्भुत नतीजा
वैज्ञानिकों का मानना है कि बैरेलाइन फिश लाखों सालों के एवोल्यूशन (विकास) का एक अद्भुत उदाहरण है। समुद्र की इतनी गहराई में पानी का दबाव हजारों गुना ज्यादा होता है। ऐसे में जीवित बचने के लिए प्रकृति ने इसे एक ऐसी बॉडी स्ट्रक्चर दी, जो हर तरह से परफेक्ट है। यह मछली ज्यादातर एक जगह बिना हिले तैरती रहती है और जब जेलीफिश या अन्य छोटे जीव उसके पास आते हैं, तो वह अचानक उन पर हमला कर देती है।
बैरेलाइन फिश अकेली ऐसी प्रजाति नहीं है, जिसने अंधेरे में रहने के लिए खुद को बदल लिया हो। इसके अलावा भी समुद्र की गहराई में ‘एंग्लर फिश’ मौजूद है, जिसके सिर पर एक लाइट जैसा अंग लटकता है। फिर ‘गल्पर ईल’ है, जिसका मुंह उसके शरीर से भी बड़ा होता है, और ‘वाइपर फिश’ है, जिसके दांत इतने तेज होते हैं कि वह शिकार को एक ही झटके में नचोड़ देती है। ये सभी जीव ‘बायोलुमिनेसेंस’ की ताकत रखते हैं, यानी ये अंधेरे में खुद से रोशनी पैदा कर सकते हैं।
























