संध्या समय न्यूज
बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक उबाल लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले को लेकर जहां एक तरफ महिला मतदाता संतुष्ट दिख रहे हैं, वहीं विपक्ष और गठबंधन के भीतर से भी इसकी समीक्षा की मांग उठती रही है। इस बीच भाजपा के एक विधायक के बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।
बंदी का मतलब हो बंदी: विनय बिहारी
भाजपा विधायक विनय बिहारी ने बेतिया में मीडिया से बातचीत के दौरान शराबबंदी पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह सही तरीके से लागू नहीं हो पा रही है। भोजपुरी में एक कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मिलता तबे नु आदमी हिलता, ना मिलित त ना हिलित…” विनय बिहारी ने आरोप लगाया कि शादी-ब्याह जैसे समारोहों में आधे से अधिक लोग शराब पीते नजर आते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “या तो इसे सही तरीके से बंद कर दिया जाए, या फिर जैसा पहले था, वैसा कर दिया जाए। बंदी का मतलब बंदी होना चाहिए, ऐसा नहीं होना चाहिए कि उसका कोई प्रभाव न हो।
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सत्ता और विपक्ष में भी खलबली
इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा’ के एक विधायक ने भी विधानसभा में शरायी कानून की समीक्षा की मांग की थी। इसका समर्थन केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी किया था। मांझी ने कहा था कि कानून की मार छोटे और गरीब लोगों को झेलनी पड़ रही है, जबकि बड़े तस्कर और अमीर लोग छूट रहे हैं।वहीं, जेडीयू (JDU) ने इन मांगों पर रोक लगाते हुए साफ कर दिया है कि शराबबंदी कानून में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बर्दाश्त की जाएगी। कांग्रेस के एक विधायक ने तो स्थिति का मजाक उड़ाते हुए दावा तक किया कि विधानसभा तक शराब की डिलीवरी हो रही है।
























