श्रद्धा तिवारी
पेट्स के मालिक अक्सर यह मान लेते हैं कि खाना बदलना बस एक कटोरे की जगह दूसरा कटोरा रखने जितना आसान है। पर ऐसा नहीं है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के ‘कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन’ के विशेषज्ञों के अनुसार, पालतू जानवरों के पेट में उनकी मौजूदा डाइट के अनुसार बैक्टीरिया का एक संतुलित माहौल होता है। अचानक खाना बदलने से यह संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे उल्टी, दस्त या अचानक खाना न खाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
घर के खाने से ड्राई पेट फूड पर बदलाव
दो अलग-अलग पैकेट वाले ब्रांड्स के बीच बदलाव करना आम तौर पर सबसे आसान होता है, क्योंकि उनका स्वरूप (टेक्सचर) एक जैसा होता है। असली मुश्किल घर के बने खाने से पैकेट वाले (ड्राई) खाने पर शिफ्ट करने में आती है। घर का खाना मुलायम और गीला होता है, जबकि सूखे पेट फूड (किबल) में 10% से भी कम नमी होती है। इसलिए, मुलायम खाने के आदी पेट्स सूखे खाने को भी चबाने के बजाय सीधे निगलने की कोशिश करते हैं, जिससे एसिड रिफ्लक्स और उल्टी हो सकती है। इसके अलावा, दोनों प्रकार के भोजन के पोषक तत्वों (न्यूट्रिएंट्स) में काफी अंतर होता है, जिसके अनुसार पाचन तंत्र को ढलने में समय लगता है। इन समस्याओं से बचने के लिए नए खाने को अचानक देने के बजाय धीरे-धीरे मौजूदा डाइट में मिलाकर बढ़ाना चाहिए।
धीरे-धीरे करें फूड ट्रांज़िशन
घर के बने और पैकेज्ड फूड में पोषक तत्वों का पूरा प्रोफाइल अलग हो सकता है। पालतू जानवर के पाचन तंत्र को इस बदलाव के अनुकूल होने में भी समय लगता है। यही कारण है कि घर के बने खाने से पैकेज्ड फूड पर जाने की प्रक्रिया दो पैकेज्ड फूड के बीच बदलाव की तुलना में अधिक धीरे करनी चाहिए। इन दोनों समस्याओं से बचने के लिए नया खाना अचानक पूरी तरह शुरू करने के बजाय धीरे-धीरे देना चाहिए। शुरुआत में मौजूदा खाने में नए खाने की थोड़ी मात्रा मिलाएं और समय के साथ उसकी मात्रा बढ़ाते जाएं।
पालतू जानवरों का खाना बदलने का सही तरीका
सामान्य तौर पर अधिकांश पालतू जानवरों के लिए खाना बदलने का सबसे सुरक्षित तरीका 7 से 10 दिनों में धीरे-धीरे बदलाव करना है। शुरुआत में पुराने खाने में नए खाने की करीब 10 से 25 प्रतिशत मात्रा मिलाएं। इसके बाद हर दो से तीन दिन में नए खाने की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं और उसी अनुपात में पुराने खाने की मात्रा कम करते जाएं। इस अवधि के अंत तक नया खाना पूरी तरह पुराने खाने की जगह ले लेना चाहिए। खास तौर पर बिल्लियों को नए खाने के साथ पूरी तरह तालमेल बैठाने में कुत्तों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। इसलिए उनके मामले में धैर्य रखना और बदलाव की प्रक्रिया को और धीमा करना बेहतर होता है।
गीला, सूखा या दोनों? खाने का स्वरूप भी महत्वपूर्ण है
खाना बदलते समय सिर्फ ब्रांड ही नहीं, बल्कि खाने का स्वरूप भी महत्वपूर्ण होता है। सूखे खाने से गीले खाने पर जाने पर मात्रा में बदलाव करना जरूरी है, क्योंकि गीले खाने में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है और कई मामलों में यह 80 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा हो सकती है। इसलिए उतनी ही कैलोरी पाने के लिए पालतू जानवर को गीले खाने की अधिक मात्रा देनी पड़ सकती है।
























