पंगुनी उथिरम 2026: 1 अप्रैल को दिव्य विवाहों का पावन पर्व, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

भगवान शिव-पार्वती और राम-सीता के दिव्य विवाह का संयोग

Panguni Uthiram 2026 : दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में भक्ति और आस्था का अनूठा प्रतीक ‘पंगुनी उथिरम’ (Panguni Uthiram 2026) पर्व बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। तमिल कैलेंडर के महीने ‘पंगुनी’ में उत्तराफाल्गुनी (उथिरम) नक्षत्र पर पड़ने वाला यह दिन कई दिव्य विवाहों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव-पार्वती, भगवान मुरुगन-देवसेना और भगवान राम-सीता के दिव्य विवाह हुए थे।

क्यों है यह दिन इतना खास? (धार्मिक मान्यताएं)

पंगुनी उथिरम को लेकर हिंदू धर्मग्रंथों में कई पौराणिक मान्यताएं हैं। माना जाता है कि इस पवित्र नक्षत्र पर देवताओं के कई विवाह संपन्न हुए थे:

  • शिव-पार्वती विवाह: भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह इसी दिन हुआ था।
  • मुरुगन-देवसेना विवाह: भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) और देवी देवसेना का पवित्र बंधन भी इसी दिन बंधा।
  • राम-सीता विवाह: कुछ विद्वानों के अनुसार भगवान राम और माता सीता का विवाह भी इसी दिन हुआ था।
  • महालक्ष्मी का प्राकट्य: समुद्र मंथन के दौरान देवी महालक्ष्मी के प्रकट होने की घटना भी इसी दिन से जुड़ी है।

आइए जानते हैं कब है पंगुनी उथिरम 2026 और इस दिन के विशेष शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है:

  • पंगुनी उथिरम 2026: तारीख और नक्षत्र समय
  • साल 2026 में यह पावन पर्व 01 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा।
  • उथिरम नक्षत्र प्रारंभ: 31 मार्च 2026, दोपहर 3:20 बजे
  • उथिरम नक्षत्र समाप्त: 01 अप्रैल 2026, शाम 4:17 बजे

पंगुनी उथिरम के शुभ मुहूर्त

  • पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के लिए इस दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 बजे से 05:25 बजे
  • अमृत काल: सुबह 08:48 बजे से 10:28 बजे
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:20 बजे
  • रवि योग: सुबह 06:11 बजे से शाम 04:17 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 04:17 बजे से अगले दिन सुबह 06:10 बजे तक

क्यों है इस दिन का धार्मिक महत्व?

पंगुनी उथिरम को ‘कल्याण महोत्सव’ का दिन माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन देवी महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। कई दिव्य जोड़ों के विवाह का संयोग इस दिन होने के कारण यह पर्व दांपत्य सुख, प्रेम और पारिवारिक समृद्धि का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए भक्त इस दिन विशेष उपाय करते हैं।

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कैसे मनाया जाता है पंगुनी उथिरम? (पूजा विधि)

  • स्नान और तैयारी: इस दिन भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करते हैं।
  • पूजा-अर्चना: घर के मंदिर या शिव-मुरुगन मंदिर में भगवान को फूल, फल, नारियल और विशेष प्रसाद अर्पित किया जाता है।
  • मंत्र जप: ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ सरवनभवाय नमः’ मंत्रों का जप किया जाता है।
  • व्रत: अनेक भक्त इस दिन निराहार या फलाहार व्रत रखते हैं, जिसे शाम को पूजा के बाद ही खोला जाता है।

कैसे मनाया जाता है पंगुनी उथिरम?

तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में इसका उत्सव करीब 10 दिनों तक चलता है। मंदिरों को रोशनी और फूलों से सजाया जाता है। अंतिम दिन ‘थिरुकल्याणम’ (दिव्य विवाह समारोह) का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान और देवी के विवाह का प्रतीकात्मक अनुष्ठान होता है। इस दौरान भव्य रथ यात्राएं और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।

कावड़ी यात्रा: भगवान मुरुगन के भक्त कंधों पर सजी हुई कावड़ी लेकर पैदल यात्रा करते हैं और मंदिर में दूध या जल अर्पित करते हैं। यह भक्ति और समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है।

प्रमुख मंदिर जहां होता है भव्य आयोजन

  • पलानी मुरुगन मंदिर (Palani Murugan Temple)
  • तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर (Tiruchendur Murugan Temple)
  • मीनाक्षी अम्मन मंदिर (Meenakshi Amman Temple)

इन मंदिरों में इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं और दिव्य विवाह का दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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