NEET पर विपक्ष एकजुट, सरकार के रवैये पर भारी हमला

संसद के मॉनसून सत्र में NEET विवाद को लेकर लगातार हंगामा हो रहा है। रामगोपाल यादव ने सदन की कार्यवाही को लेकर जो तथ्य सामने रखे, वह बेहद चौंकाने वाले हैं।

लोकतंत्र का मजाक बना रही भाजपा सरकार, बोले रामगोपाल यादव

HIGHLIGHTS

  • मिनटों में बंद हुई संसद, लोकतंत्र का मजाक: रामगोपाल यादव
  • NEET पर चर्चा से भागी मोदी सरकार, बोले रामगोपाल यादव
  • राहुल अखिलेश एक हैं, संजय सिंह के बयान पर पलटवार
  • एक मिनट में सदन बंद, भाग रही बीजेपी: रामगोपाल यादव
  • आंदोलन के लिए परमिशन नहीं, संजय सिंह को दिया जवाब

NEET paper leak controversy Ram Gopal Yadav: देशभर में चल रहे NEET-UG पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली में कथित धांधली को लेकर मचे घमासान के बीच, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा दिल्ली में किए गए धरने और प्रदर्शन के बाद सियासी तापमान काफी ऊंचा है। वहीं भाजपा ने इस मुद्दे पर विपक्ष द्वारा ‘राजनीति’ करने का आरोप लगाया है, जिसके जवाब में सपा के राज्यसभा सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है।

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने की इच्छुक होती, तो विपक्ष को सड़कों पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ती। रामगोपाल यादव ने मोदी सरकार पर ‘लोकतंत्र का मजाक’ बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

सदन में मात्र एक मिनट में चली बैठक

संसद के मॉनसून सत्र में NEET विवाद को लेकर लगातार हंगामा हो रहा है। रामगोपाल यादव ने सदन की कार्यवाही को लेकर जो तथ्य सामने रखे, वह बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जब विपक्ष के सदस्यों ने सवाल पूछने की कोशिश की, तो सरकार कैसे सदन को बंद करवाने में लगी रही।

प्रो. यादव ने कहा कि अगर ये सरकार संसद में चर्चा करने वाली होती, तो कोई बाधित क्यों करता? सच्चाई यह है कि ये लोग चर्चा करना ही नहीं चाहते। कल (मंगलवार) जब हम 11 बजे अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, तो मात्र 11.01 मिनट पर ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके बाद 12 बजे फिर हम खड़े हुए, तो एक मिनट में सदन को 2 बजे तक के लिए बंद कर दिया गया। जब दोपहर 2 बजे हम उठे, तो आज तक के लिए सदन को भंग कर दिया गया।

उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये तरीका दिखाता है कि सरकार विपक्ष की एक भी लाइन खड़े होकर सुनना नहीं चाहती। जनता के प्रतिनिधियों को बोलने न देना लोकतंत्र का सीधा-सीधा मजाक उड़ाना है।

‘अखिलेश और राहुल एक हैं’

भाजपा के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें कहा गया कि विपक्ष छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर राजनीति कर रहा है, सपा नेता ने कहा कि सरकार ही अपनी गलतियों और व्यवस्था की विफलता को छुपाने के लिए ‘राजनीति’ शब्द का ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

रामगोपाल यादव ने इस बात को स्पष्ट किया कि NEET जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर विपक्ष पूरी तरह से एकजुट है। उन्होंने कहा कि जहां तक विपक्ष की बात है, तो हम हमेशा से इस मुद्दे पर साथ हैं। अखिलेश यादव और राहुल गांधी इस मुद्दे पर एक हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है। छात्रों के हक के लिए हम किसी भी कीमत पर सड़क से लेकर सदन तक लड़ेंगे।

संजय सिंह के बयान पर पलटवार

इस बीच, विपक्ष के भीतर कुछ कलह की खबरें आईं, जब आप पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस के प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाए। दरअसल, जब राहुल गांधी कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठे, तब संजय सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विवादित पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि ‘CJP के धरने को कमजोर करने के लिए मोदी सरकार ने राहुल गांधी को अपने आवास पर धरने पर बिठा दिया।’ संजय सिंह ने यह भी सवाल पूछा था कि क्या कांग्रेस जानबूझकर CJP के आंदोलन को कमजोर कर रही है और इस प्रदर्शन के लिए पुलिस से परमिशन ली गई थी या नहीं?

इस आपसी तालमेल की कमी को लेकर चल रही बहस पर रामगोपाल यादव ने सीधा पलटवार किया। उन्होंने संजय सिंह के ‘परमिशन’ वाले बयान को पूरी तरह से गलत और अज्ञानता भरा बताया। प्रो.यादव ने कहा कि किसी भी आंदोलन या प्रदर्शन के लिए किसी से परमिशन या इजाजत नहीं ली जाती। संजय सिंह का यह बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है। जब कोई जन आंदोलन चलता है, तो उसमें औपचारिकताओं का पालन नहीं होता।

NEET विवाद अब तक का सियासी घमासान

यह पूरा विवाद NEET-UG परीक्षा के परिणामों के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के कोने-कोने से छात्रों ने पेपर लीक और असामान्य रूप से अधिक अंक आने (जिसमें 67 छात्रों को पूरे 720 में से 720 अंक मिले) को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और NTA के खिलाफ आवाज बुलंद की है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की सुनवाई कर रहा है, लेकिन विपक्ष की मांग है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को जवाब देना चाहिए।

हालांकि, सरकार लगातार सदन में विपक्ष की आवाज कुचलने का आरोप झेल रही है। रामगोपाल यादव के ये बयान साफ तौर पर इंगित करते हैं कि अगर सरकार संसद में अपना पक्ष रखती और विपक्ष को बोलने देती, तो शायद दिल्ली की सड़कों पर ये सियासी टकराव न हो रहा होता। अब देखना यह होगा कि इस मुद्दे पर आगे के दिनों में संसद की कार्यवाही कैसे चलती है और क्या सरकार विपक्ष को सदन में बोलने का मौका देती है या फिर यह ‘बहिष्कार’ का दौर जारी रहेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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