बिहार की राजधानी पटना की सड़कें आज को छात्रों के आक्रोश की आगोश में आ गईं। नीट (NEET) पेपर लीक मामले में दोषियों को सजा न मिलने और दिल्ली समेत विभिन्न हिस्सों में छात्रों पर पुलिसिया बर्बरता के विरोध में यहां एक जबरदस्त छात्र आंदोलन देखने को मिला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जमकर भिड़ंत हुई, जिसमें लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल होना तय था।
उच्च शिक्षा विधेयक 2026 और नीट घोटाला बना मुद्दा
इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) ने की थी। दरअसल, संगठन ने प्रस्तावित उच्च शिक्षा विधेयक 2026 के खिलाफ ‘लोकभवन मार्च’ का ऐलान किया था। छात्रों का मानना है कि यह नया बिल शिक्षा के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देगा और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त कर देगा। इसको लेकर AISA ने पहले ही एक व्यापक छात्र संपर्क अभियान चलाया था, लेकिन ताजा नीट पेपर लीक कांड और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की खबरें आने के बाद, आक्रोश का स्तर काफी ऊपर चला गया।
लोकभवन की ओर बढ़ा मार्च, तोड़ी बैरिकेडिंग
बुधवार दोपहर के समय हजारों की संख्या में छात्र पटना विश्वविद्यालय और आसपास के इलाकों से निकलकर सड़कों पर उतर आए। उनका लक्ष्य लोकभवन तक पहुंचकर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रदर्शित करना था। हालांकि, जैसे ही यह मार्च गांधी मैदान के गेट नंबर-12 के पास पहुंचा, पुलिस ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रशासन ने यहां कई स्तरों पर बैरिकेडिंग कर रखी थी।
लेकिन, उग्र छात्रों ने पुलिस की इस रुकावट को स्वीकार नहीं किया। नारेबाजी करते हुए छात्रों ने बैरिकेड्स पर चढ़ाई कर दी और उन्हें ध्वस्त करने लगे। इसी बीच कुछ उग्र तत्वों ने रास्ते में लगे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के होर्डिंग्स और बैनर्स को फाड़ दिया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
पुलिस का बल प्रयोग, चले वाटर कैनन
जब छात्र बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने लगे और पुलिस बल के साथ भिड़ गए, तो स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अधिकारियों ने लाठीचार्ज का आदेश दिया। इससे भी जब बात न बनी, तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल करके भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की। कुछ देर के लिए पूरा इलाका एक युद्धभूमि की तरह दिख रहा था।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारे लगाए। उनका कहना था कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक होना शिक्षा मंत्रालय की विफलता है, और इसके लिए धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपना पद छोड़ना चाहिए। इस मौके पर पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष शांतनु शेखर भी मौजूद रहे, जिन्होंने छात्रों की हड़ताल को समर्थन दिया।
SDM की अपील गिरी पर, दुकानें रहीं बंद
डाकबंगला चौराहे के पास पुलिस ने कड़ा घेरा बंदोबस्त कर रखा था। स्थिति को शांत करने के लिए मौके पर मौजूद एसडीएम (SDM) ने छात्र नेताओं से बातचीत का प्रयास किया। उन्होंने अपील की कि छात्र अपना कोई प्रतिनिधिमंडल आगे भेजें, ताकि उनकी मांगों पर विचार किया जा सके। लेकिन भड़के हुए छात्र किसी तरह के समझौते या बातचीत के लिए तैयार नहीं दिखे।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान डाकबंगला और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बना रहा। भिड़ंत और पुलिस कार्रवाई के डर से चौराहे के पास स्थित अधिकतर दुकानदारों ने अपने शटर गिरा दिए।
सवालों के घेरे में प्रशासन
हालांकि, AISA के शीर्ष नेतृत्व ने लगातार छात्रों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने की अपील की, लेकिन जमीनी स्तर पर भारी पुलिस बल के सामने आक्राश भड़कना स्वाभाविक था। पुलिस की इस ‘ड्रागन फ्लाईंग’ (तुरंत बल प्रयोग) नीति पर भी विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
इस पूरे विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि नीट पेपर लीक का मुद्दा अभी बहुत गरम है। जब तक केंद्र सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजती और छात्रों की नौकरियों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक ऐसे आंदोलन और उग्र प्रदर्शन रुकने वाले नहीं हैं। वहीं, उच्च शिक्षा विधेयक 2026 को लेकर भी देशभर में छात्र संगठनों का विरोध प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सड़कों पर उतरकर अपना रूप लेता जा रहा है।


























