Bageshwar Baba Controversial Statement: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते है जो कि एक बार फिर से विवाद में घिर गए है। नागपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में उन्होंने छत्रपती शिवाजी महाराज के बारे में ऐसी टिप्पणी की है, जिसे महाराष्ट्र की जनता और इतिहासकार अत्यंत अपमानजनक और धक्कादायक मान रहे हैं। बागेश्वर बाबा के चर्चा की जानकारी हम आपको विस्तार के साथ बताते हैं।
फडणवीस, भागवत और गडकरी की मौजूदगी में दिया बयान
बता दें कि सबसे बड़ी बात यह है कि बाबा ने यह विवादित बयान ऐसे मंच से दिया, जहां नागपुर के ‘भारतदुर्गा शक्तिपीठ’ के शिलान्यास समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे।

इसी मंच से बागेश्वर बाबा ने शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी के बीच एक कथित संवाद का जिक्र करते हुए कहा कि छत्रपती शिवाजी महाराज युद्ध करते-करते बहुत थक गए थे। उन्हें लगा कि अब बस हो गया। वे समर्थ रामदास स्वामी के पास गए, अपना मुकुट उतारा और उनके चरणों में रख दिया। महाराज ने कहा कि अब मुझ पर कृपा करें, मुझे और युद्ध नहीं लड़ना। यह राजपाठ आप संभालें, अब मुझमें चलने की शक्ति नहीं बची। मुझे अब आराम चाहिए, विश्राम चाहिए।
गुरु-शिष्य परंपरा का किया अपना ढंग से चित्रण
धीरेंद्र शास्त्री ने आगे का किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब महाराज ने आराम की इच्छा जताई, तो समर्थ रामदास स्वामी मुस्कुराए और पूछा कि शिष्य का कर्तव्य क्या है? महाराज ने जवाब दिया कि गुरु की आज्ञा मानना। तब स्वामी ने वही मुकुट दोबारा महाराज के सिर पर रखा और कहा कि ‘राज्य मेरा है, लेकिन शासन तुम्हें करना है।’
इतिहासकारों और जनता में भड़का आक्रोश
बागेश्वर बाबा के इस बयान पर महाराष्ट्र में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इतिहासकारों और जानकारों का स्पष्ट मानना है कि शिवाजी महाराज कभी ‘थकने’ या ‘विश्राम’ की बात करने वाले व्यक्तित्व नहीं थे। उन्होंने मरते दम तक स्वराज्य के लिए संघर्ष किया। बाबा द्वारा एक स्वतंत्रता सेनानी और महान योद्धा को ‘थका हुआ’ और ‘हार मान चुका’ दिखाना उनके अदम्य साहस का अपमान है।
साथ ही, समर्थ रामदास स्वामी और शिवाजी महाराज के गुरु-शिष्य संबंध को लेकर महाराष्ट्र में पहले से ही वैचारिक और ऐतिहासिक मतभेद रहे हैं। ऐसे में बाबा का यह कथित बयान आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है।
भाषण के अंत में की भागवत की प्रशंसा
अपने भाषण के अंत में बागेश्वर बाबा ने इस घटना को वर्तमान संदर्भ से जोड़ते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह महापुरुषों ने इस भूमि पर जन्म लिया, उसी तरह वर्तमान में संघ प्रमुख भारत के गौरव को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में छत्रपती शिवाजी महाराज की जगह सर्वोच्च आराध्य की है। उनके बारे में किसी भी तरह की ‘कमजोरी’ दर्शाने वाली टिप्पणी को यहां की जनता कभी स्वीकार नहीं करती। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस विवादित बयान के बाद क्या बागेश्वर बाबा माफी मांगते हैं या महाराष्ट्र में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और तेज होगा।






















