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मुंबई में एयरलाइन नौकरी के नाम पर बड़ा फ्रॉड, 4 गिरफ्तार

Mumbai News: पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा गिरोह एक संगठित तरीके से काम कर रहा था और उत्तराखंड के देहरादून में एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। यहीं से देशभर में बेरोजगार युवाओं को कॉल कर उन्हें एयरलाइन में आकर्षक नौकरी का लालच दिया जाता था।

मुंबई में नौकरी घोटाला, विदेशी तक पहुंच रहा था ठगों का जाल

HIGHLIGHTS

  • एयरलाइन नौकरी के नाम पर बड़ा फ्रॉड, देहरादून कॉल सेंटर ध्वस्त
  • मुंबई पुलिस का बड़ा एक्शन, फर्जी कॉल सेंटर से 4 गिरफ्तार
  • नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, पूरा रैकेट खुला
  • एयर इंडिया जॉब स्कैम का पर्दाफाश, हाईटेक कॉल सेंटर पकड़ा गया
  • बेरोजगार युवाओं से ठगी, देहरादून से चल रहा था बड़ा नेटवर्क

Mumbai News: मुंबई पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को एयरलाइन में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह उत्तराखंड के देहरादून में एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर चलाकर देशभर के युवाओं को निशाना बना रहा था। पुलिस की कार्रवाई में इस रैकेट से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मामले की गहराई से जांच जारी है। इसी बीच मुंबई के बोरीवली इलाके से जुड़ा 48 लाख रुपये की ठगी का एक अलग मामला भी सामने आया है, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और दो अभी फरार हैं।

फर्जी एयरलाइन नौकरी का झांसा देकर करोड़ों की ठगी

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब मुंबई के मानखुर्द पुलिस स्टेशन में एक पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उसे ‘एयर इंडिया’ जैसी प्रतिष्ठित एयरलाइन में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर करीब 2.6 लाख रुपये की ठगी की गई है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपियों के नेटवर्क का पता लगाना शुरू किया।

पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा गिरोह एक संगठित तरीके से काम कर रहा था और उत्तराखंड के देहरादून में एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। यहीं से देशभर में बेरोजगार युवाओं को कॉल कर उन्हें एयरलाइन में आकर्षक नौकरी का लालच दिया जाता था। कॉल सेंटर में काम करने वाले आरोपी खुद को भर्ती एजेंसी या एयरलाइन का अधिकारी बताकर लोगों से पैसे वसूलते थे।

देहरादून में छापेमारी, हाईटेक कॉल सेंटर का खुलासा

पुलिस उपायुक्त समीर शेख के नेतृत्व और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बिलाल शेख के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम ने देहरादून में छापेमारी की। इस कार्रवाई में एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ, जहां से पूरे देश में ठगी का नेटवर्क चलाया जा रहा था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश और नागालैंड के निवासी शामिल हैं। इनमें एक महिला आरोपी भी है। पुलिस ने मौके से कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि ठगी का नेटवर्क काफी संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम था।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने नागालैंड के कुछ शिक्षित युवाओं को भी काम पर रखा था, जिनकी अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ थी। इनका उपयोग विदेशी नागरिकों को भी टारगेट करने के लिए किया जाता था। सभी को मासिक वेतन पर रखा गया था और यह पूरा सिस्टम एक प्रोफेशनल कॉल सेंटर की तरह काम कर रहा था, लेकिन असल में यह एक ठगी का अड्डा था।

पूरे देश में फैला हो सकता है नेटवर्क

पुलिस को शक है कि इस गिरोह ने अब तक देश के कई राज्यों में सैकड़ों युवाओं को ठगी का शिकार बनाया है। फिलहाल जांच का फोकस इस बात पर है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड कौन है और कुल कितनी रकम लोगों से वसूली गई है।

अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पैसे किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए और इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

मुंबई पुलिस ने अपील की है कि जो भी लोग इस तरह की ठगी के शिकार हुए हैं, वे बिना डर के आगे आएं और शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का दावा है कि पीड़ितों की पहचान कर उन्हें न्याय दिलाने और उनकी राशि वापस दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बोरीवली में 48 लाख की दूसरी ठगी का मामला

इसी बीच मुंबई के बोरीवली क्षेत्र में एक और बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक 52 वर्षीय व्यवसायी को अस्पताल प्रोजेक्ट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर 48 लाख रुपये की ठगी की गई।

इस मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अब्दुल हामिद अख्तर हुसैन पेपरवाला और हुसैन अहमद सिद्दीकी के रूप में हुई है। अदालत ने दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है। वहीं इस केस में दो अन्य आरोपी नफीस मसूर सिद्दीकी और नजमा सिद्दीकी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

रिश्तेदार ने ही रचा ठगी का जाल

जांच में सामने आया कि इस धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी अब्दुल हामिद, पीड़ित व्यवसायी का चचेरा भाई है। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर पीड़ित को एक कथित अस्पताल निर्माण परियोजना में निवेश का लालच दिया। भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने एक निजी बैंक का फर्जी 3 करोड़ रुपये का लोन सैंक्शन लेटर भी दिखाया।

रिश्तेदार होने और मुनाफे के लालच में आकर व्यवसायी ने आरोपियों पर भरोसा कर लिया। इसके बाद जून 2025 से जून 2026 के बीच अलग-अलग ट्रांजेक्शन और नकद भुगतान के जरिए कुल 48 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए गए। शुरुआत में समझौते के अनुसार मुनाफा देने का वादा किया गया था, लेकिन समय बीतने के बाद न तो कोई रिटर्न दिया गया और न ही मूल रकम वापस की गई। बाद में आरोपियों ने पीड़ित से दूरी बनानी शुरू कर दी।

Sandhya Samay News

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