Delhi ‘INDIA’ alliance meeting: विपक्षी दलों का महागठबंधन ‘INDIA’ एक बार फिर एकजुट होकर सामने आया है। दो वर्षों के बाद आज सोमवार को हुई इस बैठक में 23 पार्टियों ने भाग लिया, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस समय पार्टी के भीतर ही मतभेद और असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। इस लेख में हम इस बैठक के मुख्य घटनाक्रम, नेताओं के बयान, राजनीतिक समीकरण, और इसके संभावित प्रभाव को विस्तार से समझेंगे।
‘INDIA’ गठबंधन की पुनः बैठक: क्यों और कब?
‘INDIA’ यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इनक्लूसिव अलायंस का गठन 2023 में हुआ था। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाना था, जिसमें विपक्षी दल अपने-अपने क्षेत्रीय हितों को समेटते हुए एक मंच पर आएं। हालांकि, शुरुआती दिनों में इस गठबंधन में असमंजस और मतभेद देखने को मिल रहे थे।
दो साल के अंतराल के बाद, आज सोमवार को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में यह बैठक आयोजित की गई। यह बैठक खास इसलिए भी थी क्योंकि अभी हाल ही में प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी की हार के बाद विपक्षी नेताओं का ध्यान इस बात पर था कि गठबंधन को मजबूत बनाने के साथ ही, आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति तय की जाए।
जाने किन पार्टियों ने हिस्सा लिया, किन्होंने नहीं?
बैठक में कुल 23 पार्टियों के नेता शामिल हुए। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), लेफ्ट दलों (CPI, CPI(M), CPI(ML)), शिवसेना (यूबीटी), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, और कई क्षेत्रीय पार्टियों के नेता शामिल थे।
हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रमुक (DMK) इस बैठक में भाग नहीं ले सके। आप पार्टी ने रविवार को ही औपचारिक तौर पर ‘INDIA’ से अलग होने का ऐलान कर दिया था। वहीं, DMK ने कांग्रेस पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाते हुए बायकॉट कर दिया। CPI(M) भी कांग्रेस के साथ अपने मतभेदों के कारण बैठक में मौजूद रहा।
उधर, शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में जुड़े। इसके अतिरिक्त, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सरफराज अहमद, और कई अन्य दलों के नेता भी ऑनलाइन भागीदारी में शामिल रहे। यह विविधता इस बात का संकेत है कि विपक्षी दल अपनी अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमियों के बावजूद एक मंच पर आए हैं।
बैठक की मुख्य बातें और सहमति
इस बैठक में विपक्षी दलों ने पाँच प्रमुख बिंदुओं पर सहमति व्यक्त की:
- सुप्रीम कोर्ट में शिकायत: ‘SIR’ (संपूर्ण नागरिकता रजिस्टर) और वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर के मुद्दे पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखा जाएगा। विपक्ष का मानना है कि इन मुद्दों में सेंध लगी है और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठता है।
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले गंभीर मामलों को देखते हुए, यह सुझाव दिया गया कि शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। यह निर्णय छात्रों के हित में माना गया है।
- सर्वदलीय बैठक बुलाना: आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महंगाई, और कृषि से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए, एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का प्रस्ताव पारित किया गया। विपक्ष का मानना है कि इन मुद्दों पर राष्ट्रीय सहमति जरूरी है।
- हर दो महीने में बैठक: गठबंधन ने सहमति दी कि ‘INDIA’ पार्टियां नियमित रूप से हर दो महीने में बैठक करेंगी। अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। इससे रणनीति बनाने और साथ-साथ चलने की दिशा में कदम बढ़ाई गई है।
- संसदीय समन्वय जारी रखना: मानसून सत्र के दौरान संसद में विपक्ष अपनी आवाज को मजबूती से उठाने के लिए संसदीय समन्वय जारी रखने पर भी सहमत हुए। मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हर दिन सुबह एक बैठक का आयोजन किया जाएगा।
नेताओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक समीकरण
ममता बनर्जी का कद, इस बैठक में विशेष रूप से देखा गया। बंगाल में हार के बाद ममता विपक्ष के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश में हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं को बंगाल आकर चुनाव बाद हो रही कथित हिंसा का जायजा लेने का आग्रह किया। ममता ने यह भी कहा कि बीजेपी उनके सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह कामयाब नहीं होगी।
लेफ्ट का साथ भी इस संकट की घड़ी में ममता के साथ दिखाई दिया। CPI(M-L) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि इस समय ‘INDIA’ ब्लॉक ममता बनर्जी के साथ है। हालांकि, CPI महासचिव डी. राजा ने इस समर्थन की पुष्टि नहीं की, लेकिन यह संकेत है कि विपक्षी दल एकजुट होकर बंगाल की राजनीति में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
अखिलेश यादव का मुद्दा समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बैठक में AAP और DMK का मुद्दा उठाया। AAP ने ‘INDIA’ से अलग होने की घोषणा कर दी है, जबकि DMK ने कांग्रेस पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि गठबंधन में फिलहाल मतभेद मौजूद हैं, जिनके कारण भविष्य की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी का बयान और CPI(M) का सवाल
राहुल गांधी और कांग्रेस के बीच हाल ही में चुनावी बयानों को लेकर मतभेद उभरे हैं। CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने राहुल गांधी के बयानों पर सवाल उठाते हुए पत्र लिखा था। चुनाव के दौरान राहुल और कांग्रेस नेताओं ने CPI(M) और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर बीजेपी से मिलीभगत के आरोप लगाए थे। CPI(M) ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया।
एक दिन पहले ही CPI(M) नेता हन्नान मोल्लाह ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा था कि यदि आप नेतृत्व करना चाहते हैं, तो सभी को साथ लेकर चलना होगा। इस विवाद में राहुल गांधी ने सफाई दी कि उनका बयान राजनीतिक था, और उनका मकसद किसी व्यक्ति या विचारधारा पर हमला करना नहीं था।
राजनीति में आने वाले कदम और भविष्य की राह
इस बैठक के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पाँच मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनी है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है:
- सुप्रीम कोर्ट में शिकायत
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
- केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वदलीय बैठक
- हर दो महीने में बैठक
- संसदीय समन्वय का जारी रहना
यह सहमति विपक्षी दलों के बीच की एकता को दर्शाती है, लेकिन साथ ही साथ इस गठबंधन में मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं। AAP और DMK का बायकॉट, और कांग्रेस-लेफ्ट के बीच चल रही तनातनी, आने वाले दिनों में इस गठबंधन की स्थिरता और उसकी रणनीति पर सवाल खड़े कर सकते हैं।





















