Delhi News: दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला साइबर सेल ने एक बड़े इंटरस्टेट मैरिज फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए इसके मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले पांच वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में फर्जी मैरिज ब्यूरो और कॉल सेंटरों का नेटवर्क चलाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। इस नेटवर्क के जरिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शादी के नाम पर फर्जी विज्ञापन दिए जाते थे और फिर लोगों से रजिस्ट्रेशन फीस तथा अन्य शुल्क के नाम पर रकम वसूली जाती थी।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी 30 वर्षीय प्रदीप सिंह उर्फ प्रदीप साहू को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार किया है। आरोपी मूल रूप से छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का रहने वाला है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।
फेसबुक विज्ञापनों के जरिए फंसाते थे शिकार
शाहदरा जिले के डीसीपी आरपी मीणा के मुताबिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह मुख्य रूप से फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शादी संबंधी आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करता था। इन विज्ञापनों में विवाह योग्य युवकों और युवतियों की प्रोफाइल उपलब्ध होने का दावा किया जाता था। जब कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों के संपर्क में आता था तो उसे मैरिज ब्यूरो के प्रतिनिधि बनकर कॉल की जाती थी और भरोसे में लिया जाता था।
गिरोह के सदस्य खुद को प्रोफेशनल मैरिज कंसल्टेंट बताकर ग्राहकों को विभिन्न पैकेज और सेवाओं का लालच देते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल एक्टिवेशन चार्ज, सदस्यता शुल्क और अन्य काल्पनिक सेवाओं के नाम पर पैसे जमा करवाए जाते थे।
14 शहरों में बनाए गए थे फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी प्रदीप साहू ने पिछले कुछ वर्षों में ग्वालियर, गुना, अयोध्या और आजमगढ़ समेत कई शहरों में कुल 14 फर्जी कॉल सेंटर स्थापित किए थे। इन कॉल सेंटरों में काम करने के लिए युवाओं को विज्ञापन के माध्यम से भर्ती किया जाता था।

कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था कि वे किस तरह ग्राहकों से बातचीत करें, उन्हें भरोसे में लें और भुगतान करवाएं। कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को यह भी सिखाया जाता था कि वे ग्राहकों की भावनाओं का फायदा उठाकर उनसे अधिक से अधिक रकम वसूल सकें।
छोटी रकम मांगकर बचते थे पुलिस कार्रवाई से
गिरोह की कार्यप्रणाली काफी सुनियोजित और चालाकी भरी थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी आमतौर पर 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की छोटी रकम ही मांगते थे। उनका मानना था कि इतनी कम रकम के लिए अधिकांश पीड़ित पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से बचेंगे।
यही वजह थी कि लंबे समय तक यह नेटवर्क बिना किसी बड़ी बाधा के संचालित होता रहा। हालांकि कुछ मामलों में पीड़ितों से कई किस्तों में बड़ी रकम भी वसूली गई।

शिकायत के बाद खुला पूरे नेटवर्क का राज
इस पूरे मामले का खुलासा पूर्वी आजाद नगर निवासी राज की शिकायत के बाद हुआ। राज ने फेसबुक पर एक विवाह संबंधी विज्ञापन देखा था और उसमें दिए गए नंबर पर संपर्क किया था। इसके बाद कथित मैरिज ब्यूरो के प्रतिनिधियों ने उनसे बातचीत शुरू की और कई तरह के शुल्क जमा कराने के लिए कहा।
आरोपियों के झांसे में आकर राज ने क्यूआर कोड के माध्यम से करीब 81 हजार रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई वास्तविक सेवा नहीं मिली और न ही विवाह संबंधी कोई प्रक्रिया आगे बढ़ी, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
इसके बाद उन्होंने 25 अक्टूबर 2025 को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
बैंक खातों से मिली अहम कड़ियां
जांच के दौरान पुलिस ने वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि ठगी की रकम शालिनी शिवरे नामक महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी। इसके बाद पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़ते हुए आगे जांच बढ़ाई।
तफ्तीश के दौरान पुलिस एक अन्य महिला राजकुमारी तक पहुंची, जो ग्वालियर में ‘रिश्ते गाइड सर्विसेज’ नाम से एक कॉल सेंटर संचालित कर रही थी। पूछताछ में राजकुमारी ने खुलासा किया कि वह प्रदीप साहू के निर्देशों पर काम कर रही थी और पूरा नेटवर्क उसी के नियंत्रण में संचालित होता था।
तकनीकी निगरानी से सरगना तक पहुंची पुलिस
राजकुमारी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने तकनीकी निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से प्रदीप साहू की लोकेशन ट्रैक की। इसके बाद एक विशेष टीम ने ग्वालियर में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।
अब तक सामने आए आठ फर्जी ट्रांजेक्शन
पुलिस के अनुसार जांच में अब तक इस गिरोह से जुड़े आठ संदिग्ध और फर्जी वित्तीय लेन-देन सामने आ चुके हैं। अधिकारियों का मानना है कि देशभर में इस गिरोह के शिकार लोगों की संख्या काफी अधिक हो सकती है।
फिलहाल साइबर सेल आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस अन्य सहयोगियों, कॉल सेंटर संचालकों और बैंक खाताधारकों की भूमिका की भी जांच कर रही है। साथ ही उन पीड़ितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्होंने अब तक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले मैरिज ब्यूरो, नौकरी या अन्य सेवाओं से जुड़े विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित संस्था की विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।






















