Discover Maharashtra’s delicious sweet rice: सावन माह की पूर्णिमा के दिन महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में नारली पूर्णिमा का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। मराठी भाषा में ‘नारल’ का अर्थ होता है नारियल, इसीलिए इस पर्व को नारली पूर्णिमा कहा जाता है।
यह उत्सव विशेष रूप से समुद्री तट पर बसे मछुआरा समाज के लिए बेहद खास होता है। इस दिन कोली समुदाय के लोग समुद्र में नारियल अर्पित करके वरुण देवता की पूजा करते हैं और मानसून के बाद समुद्र में मछली पकड़ने की अनुमति मांगते हैं। मान्यता है कि इस पर्व के बाद ही मछुआरे समुद्र में नौका चलाना शुरू करते हैं।
हर त्योहार की तरह नारली पूर्णिमा का अपना एक खास व्यंजन भी है, जिसे नारली भात के नाम से जाना जाता है। ताजा नारियल, गुड़ और सुगंधित चावल से बनने वाली यह मीठी डिश न केवल स्वाद में अमृत होती है, बल्कि इसमें त्योहारों की मिठास और परंपरा की खुशबू भी समाई हुई होती है। आइए जानते हैं इस पारंपरिक मिठाई को घर पर आसानी से बनाने की विधि।
नारली भात बनाने के लिए जरूरी सामग्री
- 1 कप बासमती या कोई भी अच्छी क्वालिटी का चावल
- 1 कप ताजा कसा हुआ नारियल
- 3/4 कप घुमाया हुआ या कद्दूकस किया गुड़
- 2-3 चम्मच देसी घी
- 4-5 लौंग
- 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी
- 2-3 हरी इलायची (पीसी हुई)
- 8-10 काजू
- 8-10 किशमिश
- थोड़े से केसर के धागे
- हल्का सा नमक (स्वाद बढ़ाने के लिए)
- पकाने के लिए लगभग 2 कप पानी
नारली भात की विधि: स्टेप-बाय-स्टेप
- चावल तैयार करें: सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर 20 मिनट के लिए पानी में भिगो दें। इससे चावल के दाने लंबे और फूले हुए बनते हैं। निश्चित समय बाद पानी निथारकर चावल को अलग रख लें।
- सूखे मसालों का तड़का लगाएं: एक गहरी कड़ाही या पैन में घी गर्म करें। घी गर्म होने पर उसमें लौंग, दालचीनी और पीसी हुई इलायची डालकर कुछ सेकंड तक भूनें, जब तक मसालों की सुगंध निकलने लगे। अब भीगे हुए चावल डालकर 1-2 मिनट हल्के हाथ से भून लें। इसके बाद पानी, केसर के धागे और चुटकी भर नमक मिलाकर ढक दें। धीमी आंच पर चावल को 80 प्रतिशत तक पकने दें, ताकि दाने एक-एक करके खिले रहें।
- नारियल-गुड़ का मिश्रण बनाएं: दूसरी तरफ एक कड़ाही में थोड़ा घी गर्म करें और उसमें काजू व किशमिश डालकर सुनहरा होने तक भून लें। अब कड़ाही में ताजा कसा हुआ नारियल डालें और धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद गुड़ डालकर लगातार चलाते हुए पकाएं, जब तक गुड़ पूरी तरह पिघल जाए और नारियल के साथ अच्छी तरह मिल जाए।
- चावल और नारियल मिश्रण को मिलाएं: अब पके हुए चावल में तैयार नारियल-गुड़ का मिश्रण डालें। ध्यान रखें कि मिलाते समय चावल के दाने न टूटें, इसलिए हल्के हाथ से ऊपर से नीचे की ओर चलाते हुए मिलाएं। इसके बाद कड़ाही को ढककर 4-5 मिनट के लिए धीमी आंच पर पकने दें, ताकि दोनों का स्वाद एक-दूसरे में घुल-मिल जाए।
- गार्निश करें और परोसें: आखिर में ऊपर से भुने हुए काजू, किशमिश और थोड़े से ताजे कसे नारियल से सजाकर परोसें। चाहें तो ऊपर से थोड़े केसर के धागे भी बिखेर सकते हैं।
स्वाद दोगुना करने वाले खास टिप्स
- नारियल और गुड़ को ज्यादा देर तक न पकाएं, वरना गुड़ कड़वा हो सकता है।
- चावल को थोड़ा कम पकाएं, क्योंकि नारियल मिश्रण के साथ वह फिर पकता है।
- गुड़ की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं।
- खोवा या थोड़ी दूध की मालाई मिलाकर बनाएं तो स्वाद और भी रिच हो जाता है।
- नारली भात को गर्म या ठंडा, दोनों ही तरीकों से खाया जा सकता है।
नारली भात के साथ त्योहार की मिठास
महाराष्ट्र के कई घरों में नारली पूर्णिमा पर नारली भात के अलावा नारियल से बनी अन्य मिठाइयां जैसे नारलाची खीर और नारियल के लड्डू भी बनाए जाते हैं। नारियल को इस दिन शुभ माना जाता है और इसे देवताओं को अर्पित करने का विशेष महत्व है। यह मीठा भात न केवल जश्न का हिस्सा है, बल्कि ताजे नारियल के गुणों से भी भरपूर है, जो सावन के मौसम में शरीर को ऊर्जा देता है।
इस बार नारली पूर्णिमा पर घर पर इस पारंपरिक महाराष्ट्रियन रेसिपी को जरूर आजमाएं और परिवार के साथ त्योहार की मिठास बांटें। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी को इसका स्वाद खूब पसंद आएगा।
























